सनातनी विचार ! करो आत्मचिंतन ।
अपने कर्म और अपने को सबकुछ मान लेना ! अहंकार रूपी कल्युग के इस महाभूत से कही आप भी तो परेशान नहीं ?
अहंकार से बचने के लिए आत्मचिंतन जरूरी है। हमेशा हमें यह सोचना चाहिए की जो वस्तु हमारे पास है वह क्षणभंगुर है। यह भी सत्य है कि मूल्य, अच्छाइयां, धन, दौलत और ज्ञान सब उस परम सत्य परमात्मा की ही देन है। फिर अभिमान करने का कोई मतलब नहीं है।
''नयाल सनातनी''
अपने कर्म और अपने को सबकुछ मान लेना ! अहंकार रूपी कल्युग के इस महाभूत से कही आप भी तो परेशान नहीं ?
अहंकार से बचने के लिए आत्मचिंतन जरूरी है। हमेशा हमें यह सोचना चाहिए की जो वस्तु हमारे पास है वह क्षणभंगुर है। यह भी सत्य है कि मूल्य, अच्छाइयां, धन, दौलत और ज्ञान सब उस परम सत्य परमात्मा की ही देन है। फिर अभिमान करने का कोई मतलब नहीं है।
''नयाल सनातनी''
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