Saturday, February 7, 2015

सनातनी विचार !
जब त्रेतायुग में माता कैकयी प्रजा के मत के विरुद्ध जाकर ''भरत'' को राजा नहीं बना सकी, तब तत्कालीन ''विद्द्वान संतों'' ने कहाँ प्रजा के विरुद्ध होकर तो ''विधाता'' ब्रह्मा जी भी किसी को राजा (शासक ) नहीं बना सकते । साधारण मानव की बात ही क्या ? प्रजाजनों के आत्मा में तो परमात्मा का वास है।  
                                                                ''नयाल सनातनी ''

No comments:

Post a Comment