समस्त देश वासियों से एक पवित्र अपील ।
गाय को भारत के प्राण मानने वाला एवं स्वामी करपात्री जी महाराज का कट्टर अनुयायी होने के नाते !
मैं देश की समस्त मत- संप्रदायों की जनता-जनार्दन से एक अपील करता हूँ की इसबार 1 से 8 नवम्बर तक भारत ही नहीं विश्व जननी "गाय माता" के लिए 1966 में शहीद हो गए हजारों संतो की 50 वी वर्षगाठ पर जरूर जन्तर-मंतर दिल्ली पहुचे ।
सामूहिक रूप से अपनी सरकार और विपक्ष के सभी सांसदों से भारत की एकता-अखंडता और भाई चारे के लिए देश में संपूर्ण गौरक्षा का कड़क क़ानून मांगे ।
मैं समस्त भारतीय मुस्लिम और इसाई संप्रदाय के अनुयायियों से भी आग्रह करता हूँ आप अगर मुहमद साहब एवं इसामशीह जी के सच्चे अनुयायी हो तो उनकी कुरान और बाइबिल में कही बात गाय का दूध, दही, घी मानव के लिए अत्यंत लाभकारी और गौ मांस शरीर के लिए हानिकारक और धर्म को नष्ट करने वाला है उसे भी माने । मुस्लिम भाइयों क्या आप बाबर, हुमायु,अकबर से भी बड़े इस्लाम धर्म के रक्षक है । या उनसे अधिक मानवतावादी है जिन्होंने भारत में लंबे समय तक राज ही नहीं किया भारत की जनता के ह्रदयों पर भी राज किया । इसका कारण एकमात्र यह था कि वे अल्ला के आलावा अन्य धर्म के लोगो की भावनाओं को भी इबादत समझते थे । देश के राष्ट्रपति डॉ अब्दुल कलाम को भारत का जनमानस धर्म-जाती से ऊपर उठकर देवता की तरह सम्मान देता है । क्योंकि वे सभी धर्मों के लोगो के पूजनीय प्रतीकों को आदर करते थे । गाय और बैल आदि को चुनाव चिन्ह की तरह इस्तेमाल कर भारत पर एक क्षत्र राज करने वाली कोंग्रेस के शासन काल में अहंकार बस एक समय संतों और गौरक्षको पर बड़े जुल्म हुए परिणाम स्वरुप उनके शासन करने वाले शासको एवं पार्टी का लगभग सूर्य अस्त हुआ सा प्रतीत होता है । जिसकी शायद ही कोई कल्पना कर सकता था !
वही जिस पार्टी के मुखिया अटल बिहारी बाजपेई जी ने 1966 में गौरक्षा के आंदोलन में संतों का साथ दिया लाठिया खाई गोली लगते- लगते बचे !
जिस पार्टिय का आजादी के बाद आज तक नारा रहा गौ हत्या बंद करो उस पार्टी को पहली बार देश के सभी गौभक्तों ने बहुमत से जिताया तो अहंकार बस वह पार्टी के मुखिया भी वही गलती दुहराते से दिखे !
पर उस पार्टी के मार्गदर्शक एक सत्य की राह पर देश हित में सब सुख कुर्बान कर देने वाला संगठन भी है जिसे संघ कहते है वे सजग पहरी की तरह उस पार्टी को कभी कोंग्रेश की तरह अहंकार के गटर में नही उतरने देगी यह विश्वास भी देश की जनता को हो गया । जब संघ प्रमुख ने कहाँ गौरक्षक और गौ सेवक भले मानव होते है । उनका उद्देश्य देश को बर्बाद करना नहीं बल्किन देश को आवाद करना है ।
वर्तमान में एवम पूर्व में सर्ववोच्च पदों पर बैठे देश के हुक्मरानों अभी अधिक देर नहीं हुई है हम देश की सत्ता पक्ष और विपक्ष के सभी सांसदों से कर वद्द निवेदन करते है कि गाय भारत माता की आत्मा और भारतीयों की जीवन में बसी साँस की तरह सुख देने वाली है ममता मई माँ के सामान हितकारी है । या यों कहें तो अतिशयोक्ति नहीं होगी भारत माता ही गाय माता है । गाय की हत्या भारत की हत्या के सामान जघन्य अपराध है ।वह अपने हत्यारे को भी हत्या से पूर्व दूध देकर गर्दन देने वाली परोपकारी प्राणी है ।
जब कोई बहुत ही अच्छा और सीधा व्यक्ति होता है तो मुस्लिम भाई कहते है यह तो अल्ला मिया की गाय है यानि जो सिर्फ देती ही देती है उसको काट कर खाना कहाँ का न्याय है ? सनातन धर्म में गाय को संत की उपाधि से नवाज गया है । संत जो समाज को देता है लेता नहीं ।
गौ चरणों का दास मैं "नयाल सनातनी" आप सभी देश वासियों से फिर एक बार मन में बैठे परमात्मा की ओर से अपील करता हूँ गाय और उसके वंश को नष्ट होने से बचाने सरकार को और विपक्ष को मनाने सभी देश के गौ- गोपाल प्रेमी 7 नवम्बर को सिर्फ एक दिन जंतर - मंतर आकर अपना निवेदन भारत की संसद जो भारतीय संविधान का रक्षक है उसके सामने रखें ।
क्या आज संचार के युग में भी हम एक दिन 20 लाख लोग अपनी माँ को भी जीवन दान देने वाली माँ से भी बढ़कर निस्वार्थ सेवा करने वाली गाय और उसके वंश की रक्षा के लिए सरकार से निवेदन करने दिल्ली नहीं पहुच सकते !
1966 में हमारे संतों से कैसे किया हूँगा प्रचार ? सोचो कैसे उस वक्त 20 लाख लोग दिल्ली आये होंगे ?
कितनी श्रद्धा होगी उनके मनो में अपनी गाय माता के लिए ? आज क्या होगया देश की जनता को कही हम स्वार्थी तो नहीं हो गए ! अगर हां तो यह बात याद रखिए स्वार्थी सिर्फ अपना नुकसान करता है लोगो का नहीं !
मैं अपने साथियों के साथ पूरे 8 दिन जंतर-मंतर पर लाखों मच्छरों के बीच डेंगू और चिकन गुनिया के भय के विपरीत जो मुझे हो चूका है पिछले साल 21 दिन जन्तर- मन्तर पर सत्याग्रह के बाद फिर वहां देश की कानून बनाने वाली संसद में बैठने वाले सभी पक्ष- विपक्ष के माननीय सांसदों से "सत्य का आग्रह" सत्याग्रह" करने एक झोपड़ी बना कर जन्तर-मंतर पर फिर आंदोलन करूँगा ।
आप में अगर गाय और उसके वंश के त्याग तपस्या के प्रति थोड़ी भी श्रद्धा है ! तो मेरा साथ देने आ पहुँचिये । मैं 1 तारीख नवम्बर से आपको 8 तरीख नवम्बर तक वही बैठा टकटकी लगाए आपके इंतजार में मिलूंगा ।
मेरा जन्म भले देव भूमि उत्तराखंड में हुआ हो पर मैंने अपनी कर्म भूमि हैदराबाद को बनाया है । अपने परिवार को उनके हाल पर इतने दूर छोड़ कर मैं दिल्ली में भूख़े- प्यासे अपनी या अपने परिवार की लड़ाई लड़ने नहीं आप सबके कल्याण की लड़ाई लड़ने जा रहा हूँ । मुझे आपका साथ चाहिए । क्योकि गौवंश के कटने से संसार पर बड़ी भारी विपदाएं आती है जिनको आप महामारी, भूकंप-सुनामी आदि नामो से जानते है । कुछ साल पहले केदार नाथ-बद्रीनाथ की घटना आपको याद हो तो समझ जाइये वह पहाड़ी गौवंश के नाश का ही बीज था ।
आपको याद होगा उज्जैन,ओंकारेश्वर, इंदौर आदि का वह प्रलय जिससे संत जन भी त्राहिमाम- त्राहिमाम करने लगा था । जब महाराष्ट्र हाय कोट ने हजारों बैल और गौहत्या पर बैन लगा दिया था तो चेन्नई में कुछ दुष्टो ने हाय कोट के सामने कुछ नंदी बैलो को खुलेआम क़त्ल कर विरोध किया । तब दुनिया ने देखा की चैन्नई के लोगो को अपनी जान बचाने आर्मी की मदद लेनी पड़ी और उनका सब कुछ तबाह हो गया । नेपाल में पहाड़ी गौवंश के अनादर के कारण ही पिछले साल क्या हुआ दुनिया को मालूम है । ये तो कुदरत के कानून को न मानने और कुदरत और पृकृति की सबसे हमदम गाय के कत्लेआम से होने वाले दुष्परिणाम की एक बानगी भर था । आगे जो होने वाला है उसकी कल्पना से ही विद्द्वानो की रूह कांप रही है ।
"नयाल सनातनी"स्वामी करपात्री जी महाराज का कट्टर अनुयायी रामराज्य वादी चिंतक विचारक ।
गाय को भारत के प्राण मानने वाला एवं स्वामी करपात्री जी महाराज का कट्टर अनुयायी होने के नाते !
मैं देश की समस्त मत- संप्रदायों की जनता-जनार्दन से एक अपील करता हूँ की इसबार 1 से 8 नवम्बर तक भारत ही नहीं विश्व जननी "गाय माता" के लिए 1966 में शहीद हो गए हजारों संतो की 50 वी वर्षगाठ पर जरूर जन्तर-मंतर दिल्ली पहुचे ।
सामूहिक रूप से अपनी सरकार और विपक्ष के सभी सांसदों से भारत की एकता-अखंडता और भाई चारे के लिए देश में संपूर्ण गौरक्षा का कड़क क़ानून मांगे ।
मैं समस्त भारतीय मुस्लिम और इसाई संप्रदाय के अनुयायियों से भी आग्रह करता हूँ आप अगर मुहमद साहब एवं इसामशीह जी के सच्चे अनुयायी हो तो उनकी कुरान और बाइबिल में कही बात गाय का दूध, दही, घी मानव के लिए अत्यंत लाभकारी और गौ मांस शरीर के लिए हानिकारक और धर्म को नष्ट करने वाला है उसे भी माने । मुस्लिम भाइयों क्या आप बाबर, हुमायु,अकबर से भी बड़े इस्लाम धर्म के रक्षक है । या उनसे अधिक मानवतावादी है जिन्होंने भारत में लंबे समय तक राज ही नहीं किया भारत की जनता के ह्रदयों पर भी राज किया । इसका कारण एकमात्र यह था कि वे अल्ला के आलावा अन्य धर्म के लोगो की भावनाओं को भी इबादत समझते थे । देश के राष्ट्रपति डॉ अब्दुल कलाम को भारत का जनमानस धर्म-जाती से ऊपर उठकर देवता की तरह सम्मान देता है । क्योंकि वे सभी धर्मों के लोगो के पूजनीय प्रतीकों को आदर करते थे । गाय और बैल आदि को चुनाव चिन्ह की तरह इस्तेमाल कर भारत पर एक क्षत्र राज करने वाली कोंग्रेस के शासन काल में अहंकार बस एक समय संतों और गौरक्षको पर बड़े जुल्म हुए परिणाम स्वरुप उनके शासन करने वाले शासको एवं पार्टी का लगभग सूर्य अस्त हुआ सा प्रतीत होता है । जिसकी शायद ही कोई कल्पना कर सकता था !
वही जिस पार्टी के मुखिया अटल बिहारी बाजपेई जी ने 1966 में गौरक्षा के आंदोलन में संतों का साथ दिया लाठिया खाई गोली लगते- लगते बचे !
जिस पार्टिय का आजादी के बाद आज तक नारा रहा गौ हत्या बंद करो उस पार्टी को पहली बार देश के सभी गौभक्तों ने बहुमत से जिताया तो अहंकार बस वह पार्टी के मुखिया भी वही गलती दुहराते से दिखे !
पर उस पार्टी के मार्गदर्शक एक सत्य की राह पर देश हित में सब सुख कुर्बान कर देने वाला संगठन भी है जिसे संघ कहते है वे सजग पहरी की तरह उस पार्टी को कभी कोंग्रेश की तरह अहंकार के गटर में नही उतरने देगी यह विश्वास भी देश की जनता को हो गया । जब संघ प्रमुख ने कहाँ गौरक्षक और गौ सेवक भले मानव होते है । उनका उद्देश्य देश को बर्बाद करना नहीं बल्किन देश को आवाद करना है ।
वर्तमान में एवम पूर्व में सर्ववोच्च पदों पर बैठे देश के हुक्मरानों अभी अधिक देर नहीं हुई है हम देश की सत्ता पक्ष और विपक्ष के सभी सांसदों से कर वद्द निवेदन करते है कि गाय भारत माता की आत्मा और भारतीयों की जीवन में बसी साँस की तरह सुख देने वाली है ममता मई माँ के सामान हितकारी है । या यों कहें तो अतिशयोक्ति नहीं होगी भारत माता ही गाय माता है । गाय की हत्या भारत की हत्या के सामान जघन्य अपराध है ।वह अपने हत्यारे को भी हत्या से पूर्व दूध देकर गर्दन देने वाली परोपकारी प्राणी है ।
जब कोई बहुत ही अच्छा और सीधा व्यक्ति होता है तो मुस्लिम भाई कहते है यह तो अल्ला मिया की गाय है यानि जो सिर्फ देती ही देती है उसको काट कर खाना कहाँ का न्याय है ? सनातन धर्म में गाय को संत की उपाधि से नवाज गया है । संत जो समाज को देता है लेता नहीं ।
गौ चरणों का दास मैं "नयाल सनातनी" आप सभी देश वासियों से फिर एक बार मन में बैठे परमात्मा की ओर से अपील करता हूँ गाय और उसके वंश को नष्ट होने से बचाने सरकार को और विपक्ष को मनाने सभी देश के गौ- गोपाल प्रेमी 7 नवम्बर को सिर्फ एक दिन जंतर - मंतर आकर अपना निवेदन भारत की संसद जो भारतीय संविधान का रक्षक है उसके सामने रखें ।
क्या आज संचार के युग में भी हम एक दिन 20 लाख लोग अपनी माँ को भी जीवन दान देने वाली माँ से भी बढ़कर निस्वार्थ सेवा करने वाली गाय और उसके वंश की रक्षा के लिए सरकार से निवेदन करने दिल्ली नहीं पहुच सकते !
1966 में हमारे संतों से कैसे किया हूँगा प्रचार ? सोचो कैसे उस वक्त 20 लाख लोग दिल्ली आये होंगे ?
कितनी श्रद्धा होगी उनके मनो में अपनी गाय माता के लिए ? आज क्या होगया देश की जनता को कही हम स्वार्थी तो नहीं हो गए ! अगर हां तो यह बात याद रखिए स्वार्थी सिर्फ अपना नुकसान करता है लोगो का नहीं !
मैं अपने साथियों के साथ पूरे 8 दिन जंतर-मंतर पर लाखों मच्छरों के बीच डेंगू और चिकन गुनिया के भय के विपरीत जो मुझे हो चूका है पिछले साल 21 दिन जन्तर- मन्तर पर सत्याग्रह के बाद फिर वहां देश की कानून बनाने वाली संसद में बैठने वाले सभी पक्ष- विपक्ष के माननीय सांसदों से "सत्य का आग्रह" सत्याग्रह" करने एक झोपड़ी बना कर जन्तर-मंतर पर फिर आंदोलन करूँगा ।
आप में अगर गाय और उसके वंश के त्याग तपस्या के प्रति थोड़ी भी श्रद्धा है ! तो मेरा साथ देने आ पहुँचिये । मैं 1 तारीख नवम्बर से आपको 8 तरीख नवम्बर तक वही बैठा टकटकी लगाए आपके इंतजार में मिलूंगा ।
मेरा जन्म भले देव भूमि उत्तराखंड में हुआ हो पर मैंने अपनी कर्म भूमि हैदराबाद को बनाया है । अपने परिवार को उनके हाल पर इतने दूर छोड़ कर मैं दिल्ली में भूख़े- प्यासे अपनी या अपने परिवार की लड़ाई लड़ने नहीं आप सबके कल्याण की लड़ाई लड़ने जा रहा हूँ । मुझे आपका साथ चाहिए । क्योकि गौवंश के कटने से संसार पर बड़ी भारी विपदाएं आती है जिनको आप महामारी, भूकंप-सुनामी आदि नामो से जानते है । कुछ साल पहले केदार नाथ-बद्रीनाथ की घटना आपको याद हो तो समझ जाइये वह पहाड़ी गौवंश के नाश का ही बीज था ।
आपको याद होगा उज्जैन,ओंकारेश्वर, इंदौर आदि का वह प्रलय जिससे संत जन भी त्राहिमाम- त्राहिमाम करने लगा था । जब महाराष्ट्र हाय कोट ने हजारों बैल और गौहत्या पर बैन लगा दिया था तो चेन्नई में कुछ दुष्टो ने हाय कोट के सामने कुछ नंदी बैलो को खुलेआम क़त्ल कर विरोध किया । तब दुनिया ने देखा की चैन्नई के लोगो को अपनी जान बचाने आर्मी की मदद लेनी पड़ी और उनका सब कुछ तबाह हो गया । नेपाल में पहाड़ी गौवंश के अनादर के कारण ही पिछले साल क्या हुआ दुनिया को मालूम है । ये तो कुदरत के कानून को न मानने और कुदरत और पृकृति की सबसे हमदम गाय के कत्लेआम से होने वाले दुष्परिणाम की एक बानगी भर था । आगे जो होने वाला है उसकी कल्पना से ही विद्द्वानो की रूह कांप रही है ।
"नयाल सनातनी"स्वामी करपात्री जी महाराज का कट्टर अनुयायी रामराज्य वादी चिंतक विचारक ।
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