Monday, October 17, 2016

सनातनी विचार !
अहंकार इंद्र के पद से भी गिरा देता है । ब्रह्मा का सिर छेदन कर सकता है । सोने की चमकती लंका में कालिख पोत सकता ! इसलिए संसार में अहंकार से बड़ा सत्रु अपना कोई नहीं हो सकता । और इस रोग से प्रत्येक मानव किसी न किसी रूप में ग्रसित हो ही जाता है !
इससे मुक्ति का मार्ग सिर्फ भगवान के गुणवाद और परमात्मा की सुध जीव के मन में सदा बनी रहे एक मात्र मार्ग महापुरुषों ने सनातन शास्त्रो के माध्यम से हमें बताया है ।
"नयाल सनातनी"

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