Wednesday, August 27, 2014

सनातनी विचार !
सनातन  शास्त्रों के अनुसार गाय के एक आँख में सूर्य, एक में चंद्रमा , शरीर में सबही शनि- राहु-केतु आदि ग्रहों का वास है .अब इन ग्रहों को मनाने गाय को तो 10 -20 रुपये का घास खिलाया नहीं .ग्रह भूख से तड़फ रहे है . लगे शनि आदि ग्रहों की शांति में लाखों का अनुष्ठान करने ! नवों ग्रहों, पितर देवो को मनाने का सबसे आसन और कम खर्चीला और सटीक तरीका कोई है तो गौग्रास का दान,गौ हित में कार्य ..........
''नयाल सनातनी'';--- सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार
सनातनी विचार !
आलोचनाओं को अपना हथियार ना बना कर प्रोत्साहन को स्वरचित परमाणु बम बनाइये .क्योकि प्रोत्साहन का बम सच में बम-बम भोले और श्रीमननारायण के आशीर्वाद जैसा अमृत है . वह अपाहिज को भी पर्वत के शिखर पर ले जाकर पर्वत विजयी बना सकता है .
॥ यत्कृपा तमहं वन्दे परमानन्द माधवम् ॥

                              ''नयाल सनातनी''
एक कसाई किसी मुर्ख स्वार्थी के घर से ढाई लीटर दूध देने वाली गाय ले आया . कसाई को मांस से मतलब था वह दूध से भरे थनों के तरफ ध्यान ही नहीं दे रहा .तब गौ माँ अपने संत स्वाभाव बस राम्हाने लगी यह देख पडोसी ने कहाँ इसके थन दूध से भरे हुए है दूध निकल ले. उस कसाई को आराम से ढाई लीटर दूध दिया मेरी गौ माँ ने फिर उस कसाई ने काट कर मांस बेच दिया .गौ माँ तो सबको गले लगाती है कसाई काटने से पहले दूध निकाल लेता है .वह यह नहीं कहती की तू काट रहा है मुझे पहले दूध क्यों दू .इतनी सरल कोई होगा संसार में ? फिर भी हम उसकी ममता को नहीं समझ पाते अपने सुख के जतन में लगे है ............धिक्कार हमारे स्वाभाव को .नमन उस देवी के स्वाभाव को .

Saturday, August 23, 2014

सनातनी विचार !
  सनातन हिन्दू धर्म में शास्त्रनुसार
5 संप्रदाय प्रायः माने गए है।
१- वैष्णव संप्रदाय,
२- शैव संप्रदाय
३ - शाक्त संप्रदाय,
४- सौर संप्रदाय,
५- गाणपत्य संप्रदाय।-
गाणपत्य संप्रदाय में छः उप संप्रदाय है। १- महागणपति संप्रदाय २- हरिद्रागणपति संप्रदाय ३- उच्छिष्टगणपति संप्रदाय,४- नवनीतगणपति संप्रदाय,
५- स्वर्ण गणपति संप्रदाय,६- संतान-गणपति संप्रदाय। गणेश की उत्पति माँ पार्वती अपने रक्षा हेतु अपने शरीर के मैल से की थी है।
कालांतर में पार्वती देवी ने गाय के रूप में महर्षि मार्कण्डेय को उत्तराखंड के बागेश्वर धाम में दर्शन दिये थे । अब इस गुड रहस्य से भी पर्दा उठा जाना चाहिए की श्री गणेश जब गाय के गोबर से जन्म लिए होंगे जब माँ पारवती गौ रूप में धरती पर विचर रही थी। इसलिए ही गोबर के गणेश बनाने की परम्परा पड़ी। और गोबर से गणेश की प्रतिमा बनाने से भगवान गणेश अति प्रसन्न होते है सभी मनोकाना पूर्ण करते है।
                                  ''नयाल सनातनी'';--''सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार''

Friday, August 22, 2014

विज्ञान की दृष्टी में गौवंश।
1.जर्सी नस्ल की गाय का दूध पीने से 30 प्रतिशत कैन्सर बढने की संभावना हैं। -----  नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट आॅफ अमेरिका
2.गाय अपने सींग के माध्यम से काॅस्मिक पाॅवर ग्रहण करती हैं। ------ रूडल स्टेनर,जर्मन वैज्ञाानिक
3.गोबर की खाद की जगह रासायनिक खाद का उपयोग करने के कारण महिलाओं का दूध दिन प्रतिदिन विषैला होता जा रहा हैं। ----- डाॅ. विजयलक्ष्मी सेन्टर फाॅर इण्डियन नोलिज सिस्टम
4.गौमूत्र के उपयोग से हदय रोग दूर होता है तथा पेशाब खुलकर होता है कुछ दिन तक गौमूत्र सेवन से धमनियों में रक्त का दबाव स्वाभाविक होने लगता हैं, गौमूत्र सेवन से भूख बढती है, यह पुराने चर्म रोग की उत्तम औषधि है। ----- डाॅ. काफोड हैमिल्टन, ब्रिटेन
5.गौमूत्र रक्त में बहने वाले दूषित कीटाणुओं का नाश करता है। ---- डाॅ.सिमर्स, ब्रिटेन
6.विश्व में केवल गौवंश ही ऐसा दिव्य जीव है जो अपनी निश्वास में आॅक्सीजन छोडती हैं। ----- कृषि वैज्ञानिक डाॅ. जूलिशस एवं डाॅ. बुक जर्मन
7.शहरों से निकलने वाले कचरे पर गोबर के घोले को डालने से दुर्घन्ध पैदा नहीं होती है व कचरा खाद के रूप में परिवर्तित हो जाता हैं। --- डाॅ.कान्ति सेन सर्राफ मुम्बई
8.गौ दूध में विद्यमान सेरिब्रासाइय मस्तिक और स्मरण शक्ति के विकास में सहायक होती हैं साथ ही एम.डी.जी.आई. प्रोटीन के कारण रक्तर्कोँणकाओं में कैंसर प्रवेश नहीं कर सकता हैं। ----- प्रो. रानाल्ड गौ रायटे कारनेल विश्व विद्यालय
9.समस्त दुधारू प्राणियों में गाय ही एक ऐसा प्राणी हे जिसकी बडी आंत 180 फीट लम्बी होती है इसकी विशेषता यह है कि जो चारा ग्रहण करती है उससे दुग्ध में केरोटीन नामक पदार्थ बनता है यह मानव शरीर में पॅंहूचकर विटामीन ए तैयार करता है तो नेत्र त्योति के लिए आवश्यक है। -----डॉ अनाम
10.गौमाता के गोबर में हैजे के कीटाणुओं को समाप्त करने की अद्भूत क्षमता होती है। ----- प्रसिद्ध डाॅ. किंग मद्रास
11.जिन घरों में गौमाता के गोबर से लिपाई-पुताई होती है वह घर रेडियों विकिरण से सुरक्षित रहते है। ---- प्रसिद्ध वैज्ञानिक शिरोवीच, रूस
                                     देसी गाय के घी के वैज्ञानिक लाभ-
1- देसी गाय का घी हृदय रोगियों के लिए भी लाभदायक है व मोटापा कम करता है l
2- देसी गाय का 10 ग्राम घी का दीपक जलने से वातावरण शुद्ध होता है l
3- देसी गाय का घी आसानी से पच जाता है तथा मानव शरीर में (Lubricant) का कार्य करता है l
4- देसी गाय का घी बच्चो, गर्भवती महिलाओ व युवाओं के लिए आवश्यक व लाभदायक है l
5- देसी गाय के घी में (Butyric) एसिड होता है, जो कैंसर और वाइरल जेसे रोगों की रोकथाम करता है l
6- देसी गाय का घी सुक्ष्म कण का होता है, जो दिमाग की प्रत्येक नस नाडी तक पहुंचकर स्मरण शक्ति बढाता है l
7- देसी गाय का घी त्रिदोष (कफ ,वात ,पित्त) नासक है l
                         देश एवं सर्वजन हित में जारी --सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार द्वारा
वेद -शास्त्रो, संतो और विद्वानों ने गौ-माता के बारे मे इस तरह कहा :
१- गौवंश की रक्षा मे देश की रक्षा समाई हुई है। --  पण्डित मदन मोहन मालवीय जी |
२- गौवंश की रक्षा इश्वर की सारी मूक सृष्टी की रक्षा करना है,भारत की सुख समृधि गौ के साथ जुडी है। ----- महात्मा गाँधी जी
३- समस्त गौ वंश की हत्या कानूनन बंद होनी चाहिए.अब भारत आजाद है |--गौ प्राण करपात्रीजी महाराज
४- गौ का समस्त जीवन देश हितार्थ समर्पित है,अतः भारत मे गौ वध नहीं होना चाहिए |----माता आनंदमयी जी माँ
५- यही आस पूरण करो तुम हमारी, मिटे कष्ट गौअन, छूटे खेद भारी |----गुरु गोविन्द सिंहजी |
६- भारत मे गौवंश के प्रति करोडो लोगो की आस्था है, उनकी उपेक्षा नहीं की जानी चाहिए |---लाल बहादुर शास्त्री
७-  सम्पूर्ण गौवंश परम उपकारी है | सबका कर्तव्य है तन, मन, धन लगाकर गौ हत्या पूर्ण रूप से बन्द करा----सेठ जुगल किशोर बिडला जी
८- जब तक भारत की भूमि पर गौ रक्त गिरेगा तब तक देश सुख-शांति ,धन-धान्य, से वंचित रहेगा|----गौ प्राण हनुमान प्रसाद पोद्दारजी |
९- सम्पूर्ण गौ वंश हत्या बंद कर के राष्ट्र की उन्नति के लिए गौ को राष्ट्र पशु घोषित कर भारत सरकार यशजीवी बने |--गौ रक्षा हेतु ७३ दिन तक अन्न-जल त्याग देने वाले पूरी के शंकराचार्य स्वामी निरंजन देव तीर्थ जी महाराज |
१० - जब तक भारत भूमि पर गौमाता के रक्त की एक भी बूंद गिरेगी तब तक कोई धार्मिक अनुष्ठान सफल नहीं होगा। ----- पूज्य देवराहा बाबा
११ - धेनु. सदनम् रयीणम्-गाय सम्पतियों का घर है। --------- अथर्ववेद
१२ - -गौमात्रा न विधते-यानी गौ अनुपमेय है। ---------- यजुर्वेद
१३  -गाय निरपराध जीव है, उसे नहीं मारना चाहिये।  ------- ऋग्वेद
१४  -गौहत्या जैसा घृणित दुष्कृत्य करने वाले का सिर धड से अलग कर देना चाहिये। ------ ऋग्वेद   .
१५ - श्रीकृष्ण ने बृजमण्डल में गौ चारण नंगे पाॅंव किया। ------ श्रीमद्भागवत महापुराण
१५  - गौ द्विज-धैनु देव हितकारी, कृपा सिन्धू मानस तनूधारी। ------- रामचरितमानस
१७  -  जो सवेरे शयन से उठकर भक्ति पूर्वक गौ की परिक्रमा करता है उसके द्वारा समूची पृथ्वी की परिक्रमा हो जाती है इसमें कोई संशय नहीं हैं। ---- महाभारत श्रीकृष्ण-युधिष्ठर संवाद्
१८ - गौहत्या की अनुमति देने वाला काटनेवाला-पकाने वाला, खरीदनेवाला, बेचने वाला परोसने वाला खाने वाला सभी गौहत्या के दोषी है, इनको मत्यु दण्ड मिलना चाहिये। ---- महर्षि मनु
१९ - गौरक्षा से ही मानव मात्र सुरक्षित हो सकता है। --------- भगवान महावीर स्वामी
२० - एक बैल को मारना-एक मनुष्य को मारने के समान है। ---- --- ईसा मसीह
२१ - गाय का दूध रसायन, गाय का घी अमृत और गाय का माॅंस बीमारी हैं। ------- पैंगंबर मोहम्मद साहब
२२ - गाय की कुर्बानी इस्लामी धर्म का नियम नहीं हैं। ----- फतबे हुमायुनी
२३  -गौ हत्या हेतु मुस्लिम आग्रह मूर्खता की पराकाष्ठा हैं। ----सुलतान अहमद खाॅं
२४-  ना कुरान, ना ही अरब प्रथा-गौ कुर्बानी की इजाजत देती हैं। -------- हकीम अजमल खाॅं
२५  - राम मंदिर, राम सेतु, आदि मुद्दो से भी पहला मुद्दा गौ हत्या बंद कानून बनाने के लिए सरकार को बाध्य करना होना चाहिए |-----राजर्षि धर्मवीर ठाकुर जयपाल सिंह ''नयाल सनातनी''  ---संस्थापक अध्यक्ष ;--''सर्वदलीय गौरक्षा मंच''
सनातनी विचार !
हमारे एक मित्र है जो पिछले एक साल से हर महीने गोवर्धन की परिक्रमा में लगातार जा रहे है। अब तक उनके 12 यात्रा हो चुकी है जिसे वे अपने मित्रो के साथ गाज़ियाबाद से गोवर्धन तक की यात्रा कार से करते है। साल भर की गोवर्धन यात्रा में उनका लगभग 20 से 24 हजार का यात्रा खर्चा आया ही होगा ।
गोवर्धन का मतलब है ! गायों का संवर्धन करना या सरल भाषा में गाय के गोबर का पहाड़ बनाना । अब गाय के गोबर का पहाड़ तो तभी बनेगा ना जब गाय पालोगे ! गोवर्धन ''गोबर + धन'' यानि गोबर से धन कमा ,खेतो में डाल सोना उगा। कंडे बना, धुप बना,कैचुवा खाद बना ,गैस तैयार कर जलावन में ला रोटी पका आदि कई सारे उपयोग है।  गोबर के तो जो लिखने बैठंगें तो कई पन्ने भर जायेंगे । आधिक उपयोग जानने के लिए ''नयाल सनातनी'' के पुराने लेखो से ढूड लें इंटर-नेट से। पर कुछ लोग नासमझी में गोवर्धन पहाड़ की नंगे पाँव परिक्रमा करते है। वे भगवान श्री कृष्ण की सांकेति शब्दावली का मतलब आज तक नहीं निकाल पाए ना ही उनकी गूढ़ बातों अर्थ ही नहीं समझ पाये। पण्डे-पुजारियों के जाल में फ़सं कर मन -धन- जन शक्ति का ह्रास किये है। वह भी येसे पंडो की बातो में आके जिन्होंने गलत ईतिहास पढाया जिन्होंने कहाँ की भगवान परशुराम ने 21 बार धरती को क्षत्रियविहीन कर दिया था। जो परशुराम क्षत्रिय कुल में जन्मे श्री राम को नमन करते थे। गहराई से सोचिए एक ही बार क्षत्रियों से विहीन धरती पर दूसरी बार कैसे क्षत्रियों का जन्म हुआ ? कभी हिन्दू- मुस्लिम के नाम पर कभी ब्राह्मण - क्षत्रिय के नाम पर कभी छोटे बड़े के नाम पर हमें सिर्फ बाटा गया।  क्या आप बाटने वाला अगर अपना खास सगा भी हो तो उसको पुजोगे ? या जोड़ने वाले को ! आपस में लड़ा कर कुछ लोगो ने अपना उल्लू सीधा किया आज भी कर रहे है पहाड़ पुजा कर। पत्थर पूजा कर। क्या गोवर्धन में जो लाखों लीटर दूध चडाया जाता है उससे हजारो लोगो को बलवान नहीं बनाया जा सकता ? क्या अब जो कैमिकल वाला दूध गोवर्धन पर्वत पर डाला जा रहा है उससे पर्वत नष्ट नहीं हो रहा इस ओर किसी गोवर्धन में रहने वाले का ध्यान है ? या गोवर्धन को भी कमाई का साधन बना दिया है।
 वे निंदा करे हमारी हमें फर्क नहीं पड़ता पर सत्य के मार्ग को छोड़ अगर नर्क भी मिले तो स्वीकार है हमें। हमने देखा है जो निंदा करते है वे हमारे ही शब्दों को तोड़ - मरोड़ कर पेस कर देते  हुए वाह-वाही लुट लेते है और खूब निंदा भी करते है। धन्य है उनकी कुटील चाल। इस चाल को भी नमन है हमारा।  
कास आज भी लोग सही मार्ग का दर्शन कर उस पर चलते तो भारत फिर सोना उगलता,लोगो को समझ आ जाता गोवर्धन का सही अर्थ तो आज तक लाखो गौवंश की जान बच गई होती ! मानव गाय को सिर्फ कुछ रुपियों का हरा चारा ही खिला दे और भारतीय गौवंश की सेवा कर अपने घर पर ही गाय की सात परिक्रमा कर ले तो हजारो-लाखों रुपये खर्च कर जो यात्रायें की जाती है उससे होने वाले पुण्य से कई गुणा अधिक पुण्य उनको गौमाता की कृपा प्रसाद से प्राप्त होता है ! बोनस में कई गौवंश को बचाने का पुण्य अलग से प्राप्त होता जो देवताओं को भी दुर्लभ है। अथर्ववेद में गाय को 'धेनु: सदनम् रमीणाम' कहा गया है और इसे धन-संपत्ति का भंडार कहा गया है।
कबीर दास कहते रहे लोग समझे नहीं। पाहन पूजे हरि मिले तो मैं पूजूँ पहार । ताते यह चाकी भली पीस खाय संसार।।
संत कवि रविदास जो कबीर दास के गुरुभाई थे। गुरु भाई अर्थात दोनों के गुरु ब्रह्म तत्व को जानने वाले स्वामी रामानंद थे। उन्होंने भी सांकेतिक भाषा में यही समझाने की कोशिश की -- मन चंगा तो कठौती में गंगा। येसे ही अनेक संतो ने जो किसी भी कक्षा तक नहीं पड़ें जिनको नीच जाती का कह कर दुत्कार मिली उन्होंने बहुत कुछ संसार को दिया जैसे छातिसीगढ़ के संत घासीदास, काशी के चंडाल जिन्होंने शंकराचार्य को सत्य का दर्शन कराया। नवधा भक्ति से परिपूर्ण शबरी,पशु योनी में जन्मा गिद्ध राज आदि।  समझो तो काम का, बरना हराम का।  मेरा क्या ? 
''नयाल सनातनी'' गौ-चरणों का दास ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार''
सनातनी विचार !
हमारे एक मित्र है जो पिछले एक साल से हर महीने गोवर्धन की परिक्रमा में लगातार जा रहे है। अब तक उनके 12 यात्रा हो चुकी है जिसे वे गाज़ियाबाद से गोवर्धन तक की यात्रा कार से करते है। साल भर की गोवर्धन यात्रा में उनका लगभग 24 हजार का खर्चा आया है।
गोवर्धन का मतलब है ! गायों का संवर्धन करना या सरल भाषा में गाय के गोबर का पहाड़ बनाना । अब गाय के गोबर का पहाड़ तो तभी बनेगा न जब गाय पालोगे !
पर कुछ लोग नासमझी में गोवर्धन पहाड़ की नंगे पाँव परिक्रमा करते है। वे श्री कृष्ण की गूढ़ बातों का अर्थ ही नहीं समझ पाये। कास ऐसे लोग गाय को सिर्फ हरा चारा ही खिला देते तो हजारो रुपये खर्च कर जो उनको प्राप्त होता है उससे कई ज्यादा गुणा पुण्य उनको भारतीय गौ की सात परिक्रमा से प्राप्त हो जाता
जो गोवर्धन की यात्रा से मिलता है। बोनस में कई गौवंश को बचाने का पुण्य अलग .
 ''नयाल सनातनी'' सर्वदलीय गौरक्षा मंच

Thursday, August 21, 2014

सनातनी विचार !
श्रीराम मंदिर, राम सेतु, आदि मुद्दो से भी पहला मुद्दा गौ हत्या बंद कानून बनाने के लिए सरकार को बाध्य करना होना चाहिए.जब नित्य सूर्य उदय होने से पहले लाखों 33 करोड़ देवी-देवताओं के मंदीर ढहा दिए जा रहे है तो फिर एक राम मंदीर की बात ही क्यों ? 
पहले इन 33 करोड़ देवी -देवतों के सजीव मंदिरो को बचाओं फिर कुछ और बात करो .....

गौ भक्त जिस-जिस वस्तु की इच्छा करता है वह सब उसे प्राप्त होती है | स्त्रियों मे भी जो गौओं की भक्त है, वे मनोवांछित कामनाएं प्राप्त कर लेती है | पुत्रार्थी पुत्र पाता है, कन्यार्थी कन्या, धनार्थी धन, धर्मार्थी धर्म, विद्यार्थी विद्या और सुखार्थी सुख पा जाता है | विश्व भर मे कही भी गौभक्त को कुछ भी दुर्लभ नहीं है | यहाँ तक की मोक्ष भी बिना गाय के पूंछ पकडे संभव नहीं | वैतरणी पर यमराज एवं उसके गण भयभीत होकर गाय के पूंछ पकडे जीव को प्रणाम करते है | 
''नयाल सनातनी'' ;--सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार
काशी अगर मोक्ष नगरी है तो वृन्दावन गौलोक -धाम है...---
सनातनी विचार ----
आज हम कुछ खास बात बताएँगे जो शायद बहुत कम लोगो को मालूम हो !
सनातन शास्त्रों के गहन अध्यन से मालूम पड़ता है, की भगवान श्री कृष्ण हर कल्प में अवतार लेते है।
इस कल्प के इसबार के द्वापर युग में भगवान विष्णु ही 16 कलाओं से सज्जित होकर श्री कृष्ण के रूप में अवतरित हुए थे। अब तक गाय के शरीर पर जितने रोयें है, उतने कल्प बीत चुके है। और परमात्मा के प्रतिनिधि उतने बार द्वापर युग में कृष्ण के रूप में अवतार लिए है।
ब्रह्म वैवर्त पुराण के अनुसार एक कल्प में तो भगवान शंकर ने राधा और देवी पार्वती ने कृष्ण के रूप में अवतार लिया है। इसलिए कुछ परम सत्य को जानने वाले तपस्वी संत यह पूर्ण रूप से मानते है की काली और कृष्ण में कोई अंतर नहीं।
सनातन शास्त्रों के अनुसार जिस प्रकार काशी नगरी इस ब्रह्माण्ड में नहीं बल्किन भगवान शंकर के त्रिशूल पर बसा है। इस लिए संत कहते है कि काशी में कोई पाप ना हो जाय इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए क्योकि तीर्थो में किया पाप बज्रलेप हो जाते है। यानि इन पापो के प्रायश्चित ही नहीं।
वैसे ही भगवान का नित्य धाम वृन्दावन इस ब्रह्माण्ड में नहीं बल्कीन गाय के सिंघो में विराजमान है। इसलिए ही श्री कृष्ण को वृन्दावन अपने प्राणों से भी अधिक प्रिय है.
वृन्दावन में भी भूल से भी पाप नहीं होना चाहिए बरना किया गया पाप ब्रजलेप होना ही है।
यह बात गौर करने वाली बात है जिस प्रकार तीर्थो में जाने से तीर्थ के प्रभाव से पुण्य की प्राप्ति होती ही है। और पुण्य की मात्रानुसार इस लोक तथा पर लोक में भोग और मोक्ष की प्राप्ति होती है। उसी प्रकार तीर्थो में जाकर पाप करने से वहां के सतोगुण को दूषित करने के पाप के कारण मनुष्य का पाप प्रायश्चित योग्य नहीं रहता उसको मृत्य पश्चयात भारी यातनाएं भुगतनी ही पड़ती है।

सनातन सिद्दांतो के अनुसार - यतो शुभ कर्म ततो पुण्यः यतो पाप कर्मो ततो दण्डः
''नयाल सनातनी''--सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार
सनातनी विचार !
सनातन शास्त्रनुसार तीर्थो में एवं तीर्थो में रहने वालो को दान देने से दानी को अक्षय पुण्य प्राप्त होता ही है . वह हर जन्म में दानी बनकर ही जन्म लेता है .यानि कभी दरिद्र नहीं पैदा होता .
वैसे ही तीर्थों के नाम पर दान लेने वालो को भी ध्यान रखना चाहिए की दान जिस मकसद से लिया गया है वह उसी कार्य में लगे अगर गाय के नाम पर लिया गया है तो गाय को भर पेट खिलाएं , ब्राह्मण भोजन को लिया गया है तो ब्राहमणों को ही भोजन करायें,साधू - संतो के भंडारे हेतु दिया गया धन से भण्डारा ही हो, अगर तालाब -पोखरा - कुवाँ आदि खोदने सुधारने लिया गया है तो उसी में लगे, धर्मशाला हेतु दिया धन धर्मशाला ही बने ना की होटल की तरह कमाने का साधन .
ऐसा नहीं होने पर दान लेने वाला अंतिम क्षणों में बड़ी विपदा से प्राण त्यागता है और अगले जन्म में महा दरिद्र पैदा होकर दर-दर भीख मांगता है .
''नयाल सनातनी'' ;-- सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार

Wednesday, August 20, 2014

यस त्वं कृष्णे गते दूरम सः गाण्डीव धनवाना ,
सोचियोसी असोचयान रहसी प्रहाराण वधम अर्हसि ।।

हे दुष्ट अधर्मी गौ-विरोधी !
क्या तुम भगवान श्री कृष्ण और गाण्डीव धारी अर्जुन को अद्रश्य जान निर्दोष गाय को पीटने- मारने की हिम्मत करता है ।
तुम निर्दोष गाय को एकान्त में पीट रहे हो, इसलिए तुम अपराधी हो और तुम मृत्यु दण्ड देने के लायक हो। जिस सभ्यता में भगवान को भुला दिया जाता है, और अर्जुन की तरह गौ - भक्त योद्धा नहीं होता तब काले- कलयुग के साथी अधर्म का लाभ उठाके निर्दोष गाय-गौवंश को एकांत के बूचड़खानों में काटते है।
महाराज परीक्षित के आदेश अनुसार ऐसे हत्यारों को मार देना चाहिए। धर्मपरायण राजा के अनुसार जो मुजरिम गाय को काटता है उसे मौत की सजा दे देनी चाहिए। बिलकुल वैसे ही जैसे किसी दुष्ट हत्यारे को दी जाती है जिसने मासूम बच्चे की हत्या एकान्त में की हो।
''नयाल सनातनी'' संस्थापक;-- ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार''

Tuesday, August 19, 2014

सनातनी विचार !
प्रत्येक गौ- भक्ति से जुड़ा गौ-प्रेमी, गौरक्षक अपने महान लक्षय ( गौ माता को राष्ट्रिय प्राणी बनाने ) की प्राप्ति करें। जीस महान उद्देश्य के लिए हजारों संतो ने अपना बलिदान दिया है अब तक। 

Monday, August 18, 2014

सनातनी विचार !
कही आपका प्रारब्ध भी सतकर्म, गौसेवा, गौरक्षा, गौ- कार्यों  में जाने से रोकता तो नहीं ? आप अपने संकल्प शक्ति से उसे तोडिये बरना गौलोक धाम तो सपना है बाकी संसार ही अपना है वाली कहावत आपके साथ भी हो सकती है !
हमने देखा है। 
हमारे कई मित्रों का जब वे किसी सत-कर्म की ओर कदम बढ़ाते है, उनको प्रारब्ध रोक देता है । जैसे नौकरी से छूटी नहीं मिली, व्यापर से समय नहीं मिला,शादी में जाना है, दोस्त के बेटे का जन्म दिन पार्टी है, पत्नी को आज बहुत खाँसी है,मेरा सर दुःख रहा है। आदि अनेक छोट कारण ही सत कर्म से मनुष्य को रोकते है। पर मजबूत इरादो और भाग्यशाली मानव इन सब छोटे कारणों को अनदेखा कर आगे बढ़ जाता है।  और अपने खाते में सतकर्मो की लम्बी लिष्ट जमा कर लेता है।
                      ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार''

Saturday, August 16, 2014

सनातनी विचार !
जन्माष्ठमी पर विशेष ! श्री कृष्ण का असली साथी अन्न दाता किसान और गौ-गौवंश ये सुखी तो सब सुखी, ये दुखी तो संसार दुखी .......

एक शहर की बड़े घर की बेटी एक पड़ें लिखे गावँ के गौ-भक्त किसान माँ- बाप के नवजवान बेटे से शादी कर लेती है। खूब दहेज़ साथ में आता है। और साथ में दहेज़ के साथ बहुत बड़ा अहंकार भी आ जाता है।
एक दिन बहु सीधे-साधे ससुर जो बहुत धार्मिक और गौ- प्रेमी किसान थे। उनके सामने आती है और बार-बार अपने नाख की बहुत सुन्दर और बहुत बड़ी नथ दिखाती है। जब ससुर ने ध्यान नहीं दिया तो बोल पड़ी यह मेरे पिता जी ने 1लाख 90 हजार में बनाया है। ससुर साधारण सा जबाब देते हुए बोले बेटी तुम्हारे पिता जी का धन्यबाद जरुर करना, साथ ही उस परमात्मा का शुक्र भी कर लेना जिसने नाख दी अगर नाख ही नहीं होती तो इस नथ का अहंकार कैसे दिखा पाती ???

गौ-भक्त,गौ सेवक किसान पर किसी का अहंकार टिकता नहीं, गौ-कृपा से गौ-भक्तों के साथ के कारण अन्य साधारण व्यक्ति का अहंकार भी जल्द नष्ठ हो जाता है । अहंकार नष्ट होते ही कार्यों में और दिल में शांति का पथ प्रसस्त हो ही जायेगा तब कृष्ण कृपा को तो आना ही है जीवन में .
''आज श्री कृष्ण की हर्द्दिक बधाई सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार की ओर से'' ------
सनातनी विचार ! 
एक शहर की बड़े घर की बेटी एक पड़ें लिखे गावँ के गौ-भक्त किसान माँ- बाप के नवजवान बेटे से शादी कर लेती है। खूब दहेज़ साथ में आता है। और साथ में दहेज़ के साथ बहुत बड़ा अहंकार भी आ जाता है। एक दिन बहु सीधे-साधे ससुर जो बहुत धार्मिक और गौ- प्रेमी थे। उनके सामने आती है और बार-बार अपने नाख की बहुत सुन्दर और बहुत बड़ी नथ दिखाती है। जब ससुर ने ध्यान नहीं दिया तो बोल पड़ी यह मेरे पिता जी ने 1लाख 90 हजार में बनाया है। ससुर साधारण सा जबाब देते हुए बोले बेटी तुम्हारे पिता जी का धन्यबाद जरुर करना साथ ही उस परमात्मा का शुक्र भी कर लेना जिसने नाख दी अगर नाख ही नहीं होती तो इस नथ का अहंकार कैसे दिखा पाती ??? गौ-भक्त पर किसी का अहंकार टिकता नहीं, गौ कृपा से गौभक्त के साथ के लोगो का भी अहंकार भी जल्द नष्ठ हो जाता है । ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार''

Thursday, August 14, 2014

सनातनी विचार ! स्वतंत्रता दिवस विशेष - 15 अगस्त ,स्वतंत्रता दिवस की हर्द्दिक बधाई ---
देश के 15 वे प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र दामोदर दास मोदी जी आज भारतीय मानव जाति के लिए आजादी का दिन है, खुशियों का दिन है,15 अगस्त का दिन है, हम सबकी स्वतंत्रता का दिन है, गुलामी से मुक्ति का दिन है। हम सब भारत वासी आजाद है। खुली हवा में साँस भी ले रहे है, पर इस देश की अर्थ व्यवस्था की रीड ''गौमाता'' -''गौवंश'' जिसने हमेशा अपने वंश का बलिदान ( आजादी के बाद 200 करोड़ से भी अधिक ज्यदा गौवंश का बलिदान ) देकर हमारे रगो में भारत को आजाद करने की शक्ति ( खून-दूध ) भरा था आज भी गुलाम है। जिसने आपको प्रधान मंत्री की कुर्सी तक पहुचाने की शक्ति वाला अनाज पैदा कर दिया। हमें कलम से आप जैसे देश भक्तों को जगाने की शक्ति प्रदान की, उनके वंश के साथ आज भी खौलते पानी से खाल खीचने वाला वह अंग्रेजी दण्ड का सिलसिला जारी है।
महोदय, क्या आपको पिलाये गये गौ - माँ के दूध में वह शक्ति है, जो आज से पहले वाले प्रधान-मंत्रियों को पिलाये गए दूध में नहीं दिखी माँ के कष्ट हरने की शक्ति ? अगर नहीं तो धिक्कार है हमारी आजादी पर माँ आज भी गुलाम है, गौ-माँ को अपने वंश को बचाने जान के लाले आज भी पड़े है , माँ अपने वंश को मिटते देख खून के आँसू आज भी बहा रही है, और बेटा 68 वा स्वतंत्रता दिवस लाल किले से झण्डा फहरा कर मना रहा है, मना रहा है।
फिर भी मैं माँ का नालायक बेटा यही कहूँगा स्वतंत्रता दिवस बधाई,स्वतंत्रता दिवस बधाई । लाल किले को फतह करने वाले मोदी जी स्वतंत्रता दिवस की बधाई...................'' सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार'' भारत देश

Wednesday, August 13, 2014

सनातनी विचार !
किसी से कुछ पाने के प्रलोभन से मनुष्य पराधीन हो जाता है । और अधिक जीने के इच्छा से ही मृत्यु का भय बना रहता है।
अगर हम यह सोच ले की हमें अब किसी वस्तु की आवश्यकता नहीं ( लालच को त्याग दें ) तो फिर कितना ही धनवान हो हमें उसके बड़ेपन से कोई फर्क नहीं पड़ेगा।बड़े से बड़ा राजनेता, व्यापारी या विद्द्वान के सामने हम सहज होंगे सामान्य स्तिथि में।
और मृत्यु तो अटल है, अभी भी आ सकती है। कभी भी आ सकती है, यह समझ में आजाये तो, फिर मृत्यु का भय भी चला जायेगा। 
फिर जो स्थिति होगी वह परमहंस की स्तिथि होगी। और इस परमहंस की स्थिति में मनुष्य केवल ''गौमाता'' की कृपा से पहुच सकता है। शुद्द गव्य पदार्थो का सेवन करके जैसे पूर्व में हमारे संतो, ऋषि- मुनियों ने यह स्तिथि पाई थी,परमहंस की स्तिथि। ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार''

Tuesday, August 12, 2014

सनातनी विचार ! 
भारत में जन्म ले या विदेश में अगर हिन्दू-सनातन धर्मावलम्बी का धन गौ-सेवा के काम में नहीं आता समझो वह धन नहीं मिटटी है।
सनातनी विचार !
 भारत में जन्म ले या विदेश में अगर हिन्दू-सनातन धर्मावलम्बी का धन गौ-सेवा के काम में नहीं आता समझो वह धन नहीं मिटटी है। ''नयाल सनातनी ''
सनातनी विचार !
ईर्ष्या ही सत मार्ग की सबसे बड़ी बाधक है। जो व्यक्ति दूसरे का यस,धन-दौलत, सुख-सौंदर्य, बल- बुद्दी और प्रतिष्ठा से ईर्ष्या करता है उसकी व्याधि की कोई औषधि नहीं है, बल्किन उसका रोग लाइलाज होते जाता है। ईर्ष्या उनको अधिक होती है जो कुछ कर नहीं पाते या करना नहीं चाहते सिर्फ निन्दा के आलावा ! इसलिए ईर्ष्या को निन्दा की बड़ी बहन कहा गया है। हो सके तो इन दोनों बहनों को अलक्ष्मी की तरह अपने से दूर रखें। इसलिए अपने मन को गौ-सेवा में लगायें गौ-भक्ति, गौ-सेवा जीवन में आ जायेगी तो इर्ष्या भाग जाएगी। अगर गौ- सेवा के बाद भी इर्ष्या मन से नहीं जाती तो समझो अभी गौ- भक्ति जीवन में आई ही नहीं अभी आप अपिपक्क है गौ-सेवा में ।  ''नयाल सनातनी''

Monday, August 11, 2014


सनातनी कार्य !
आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद नए बने राज्य ''तिलंगाना'' के मेदक जिल्ला के कोंडापाका विलेज में पहला गोकुल गौ-मंदीरम का निर्माण पूर्ण हुआ . इस अवसर पर पञ्च देव पूजन ,प्रधान देवी गौमाता की पूजा कर उद्घाटन करते हुए तिलंगाना के सिंचाई एवं संसदीय कार्य मंत्री एवं मुख्यमंत्री श्री के० चन्द्र शेखर राव के भतीजे श्री टी० हरीश राव जी , तिलंगाना राज्य के मुख्य सचेतक IAS श्री के० वी० रमणाचारी जी एवं चेयर मैंन श्री वनिसेत्टी राजमौल जी , गौशाला मुख्य प्रबंधक श्री डी० गुरुवै जी , श्री इ०अनज्या जी , श्री पी० वैकुण्ठं जी ,तिलंगाना प्रदेश में ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच'' की मुख्य प्रचारक श्रीमती बी ० पदमा जी जिन्होंने पुरे तिलंगाना में लोगो को गौमाता की ओर प्रेरित कर 108 इस तरह के गौ-मंदिरों के निर्माण करवाने का संकल्प लिया है .साथ में गोकुल गौमंदीरम गौशाला के मुख्य सलाहकार एवं ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच'' के राष्ट्रिय अध्यक्ष जयपाल ''नयाल सनातनी'' तथा अनेक सिद्दिपेट करीमनगर जिल्ला के गौ प्रेमी .

Saturday, August 9, 2014

सनातनी विचार !
आज राखी पर बहनों की रक्षा के साथ-साथ भाइयों को एक और संकल्प लेना होगा। संसार की पहली माँ, बहन, बेटी गाय की रक्षा का संकल्प। क्योकि आदित्यों की बहन, रुद्रों की माता, वसुओं की दुहिता है गौमाता। राखी (रक्षा संकल्प ) के इस महा पर्व पर देश की सभी भाई-बहनों को हर्द्दिक शुभ कामना निवेदक ;-- ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार''

Friday, August 8, 2014

राखी की सबही भाई-बहनों को हर्द्दिक शुभ कमाना....
येन बद्धो बलि: राजा दानवेन्द्रो महाबल:।
तेन त्वामभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥
जिस रक्षासूत्र से महान शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बाँधा गया था, उसी सूत्र से मैं आज तुझे बाँधती हूँ। हे मेरे प्यारे भाई यह बात बोलते हुए रक्षा बाधनी चाहिए प्रतेक बहन को राखी पर अपने भाई को और साथ में यह कहना चाहियें भाई तू मेरी रक्षा के संकल्प से कभी भी विचलित न होना।

देश की सभी मातायें-बहनों से एक निवेदन ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार '' एवं ''प्रखर साहित्यकार मंच परिवार '' के भाई भी करना चाहते है एक संकल्प अपने भाइयों को यह भी दिला दें की प्रतेक भाई को बहन-बेटियों और माता की रक्षा के साथ-साथ गौवंश की रक्षा का, गौमाता की रक्षा का भी संकल्प लेना जरूरी है क्योकि इस धरा की सबसे पहली बेटी - बहन - माता गाय है। ''नयाल सनातनी'' संस्थापक अध्यक्ष ;-सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार
सनातनी विचार !
जिस प्रकार राजनैतिक पार्टी के कुछ सच्चे प्रचारक चाहते है कि सभी लोग उनकी पार्टी के सदस्य बन जाय और उनकी पार्टी देश में सबसे बड़ी पार्टी हो .उसी प्रकार मित्रो हम गौ माता के चरणों के दास है हम भी यही चाहते है सब गौ माता के प्रचारक या सदस्य बन जाय क्या गलत है ? चाहे वे किसी भी पार्टी - मत संप्रदाय से क्यों ना जुड़े हो .''नयाल सनातनी''

Thursday, August 7, 2014

''सर्वदलीय गौरक्षा मंच'' के अनुरोध पर इस बार बहुत सारे गणेश प्रतिमा बनाने वालो ने गाय और बैल के साथ गणेश की मुर्तिया मुम्बई में बनाई है .जो गौवंश के प्रचार में मुख्य भूमिका निभाएंगे यह बात आज सर्वदलीय गौरक्षा मंच के संस्थापक अध्यक्ष जयपाल नयाल ने बताई .आगे उन्होंने बताया की इस बार दुर्गा पूजा से पहले वे पश्चिम बंगाल के दौरे पर जा के यही अनुरोध कोल्कता के कारीगरों से भी करेंगे .
जन-जन को भेजो सन्देश, घर लायें इस बार गाय-बैल वाले गणेश.
जो भक्त इस बार गाय-बैल वाले गणेश घर लायेंगे उनके सबही मनोकाना पूर्ण होंगे .''
गौ भक्त मित्रो खुशिया मनाओं इस बार गणेश जी गाय के साथ आ रहे है . इसका मतलब है अब गौमाता के अच्छे दिन आने वाले है ...जय गौ माता की .
नयाल सनातनी'

सनातनी विचार !
आखिर अच्छे दिन किसके ? आलू 30 रूपया प्याज 32 रूपया टमाटर 60 रूपया, अरहर दाल 117 रुपिया, चावल 47 रूपया आदि हर वस्तू के दाम 3 गुना बढे है .

गरीबो के अच्छे दिन कब आयेंगे ? व्यापारियों को तो उनकी सेवा का मेवा मिल रहा है . गरीब को अपने वोट की कीमत भी मिलेगी क्या ?

और सबसे बुरी निकृष्ठ और पाप की बात तो यह है गाय को दिया जाने वाला कुट्टी चारा भी जो 2 महीने पहले हैदराबाद में 4 रूपया था अब 6 रूपया से निचे नहीं दे रहे है व्यापारी कहते है मिल ही नहीं रहा इस रेट में .
गौ माता तेरे भी अच्छे दिन आयेंगे क्या ? ''नयाल सनातनी''

Wednesday, August 6, 2014

सनातनी विचार !
मन इधर - उधर भटकाने वाला जीवात्मा है .मन को बस में करो,उस पर अंकुश रखो .मन सुधरेगा तो जीवन सुधरेगा .मन को विवेक रूपी लकड़ी से रोज पीटो . भोग से जीव तृप्त हो ही नहीं सकता .त्याग में ही तृप्ति समायी है .

Tuesday, August 5, 2014

सनातनी विचार !
जब कोई आपके गलत कार्य का भी समर्थन कर रहा हो, तो समझो यह स्लो-पोइजन या चाटुकार है उसका कोई छुपा स्वार्थ है आपसे . मित्र भटक रहा हो उसपर भी उसको पोत्साहन सत्य आत्मा नहीं दे सकती . आपको आपकी अंतर आत्मा बता देती है की आप का मार्ग सत्य का है या असत्य का .जब सही सलाहकार या गुरु ना हो तो अपने आत्मा से ही जबाब मांगना चाहिए .आत्मा परमात्मा का ही रूप है .
१-- सनातनी विचार ! भगवान के तीन ही मुख है प्रसाद ग्रहण करने के। पहला गाय को दिया तृण सीधे भगवान को प्राप्त होता है और स्वाद की चर्चा तक गौमाता के यहाँ नहीं होती बस आशीर्वाद की प्राप्ति अवश्य होती है यह सनातन सत्य है।

२- सनातनी विचार ! भगवान का दूसरा मुख है ब्राह्मण का मुख जहां स्वादिष्ट भोजन से आशीर्वाद प्राप्त होता है और आपका दिया भोग नारायण तक पहुचता है।अंत में दक्षिणा आवश्यक है !!

३ - सनातनी विचार ! भगवान का तीसरा मुख है अग्नि जहाँ हवन द्वारा जड़ी- बूटी,जौ -तिल,ड्राय-फ़ूड और गौ घृत से भगवान को भोग लगाया जाता है जिसे साधारण मनुष्य अपनी गरीबी के कारण बहुत कम कर पाते है। जो कर पाते है उनका कल्याण और लोक कल्याण निश्चित है यह भी सनातन सत्य है।

मनुष्य को इन तीनो में से जो सरल उपाय हो उसको अपना कर भगवान को नित्य भोग जरूर लगाना चाहिए जिससे परमात्मा द्वारा प्राप्त मानव शरीर, जल, अग्नि, वायु, पृथवी और आकाश के उपभोग का कर्ज कुछ कम हो। वैसे तो माता- पिता और भगवान का कर्ज कोई चूका नहीं पाया पर स्वार्थी नहीं परमार्थी बनने की कोशिश मानव को जरूर करनी चाहिए यह शास्त्र मत है ।
''नयाल सनातनी'' संस्थापक अध्यक्ष ;--''सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार''

Monday, August 4, 2014

सनातनी विचार !
कितना भी बड़ा विद्द्वान क्यों न हो या उच्च कुल का कुलीन क्यों न हो ? करनी और कथनी में अंतर एक न एक दिन मानव को पतन की राह पर धकेल ही देता है। अधिक जोर से अपनी बात को सिद्द करना या मैं बहुत बड़ा काम कर रहा हूँ यह दर्शाने का मतलब है कुछ दाल में कला है। ''मैं'' मानव का ही नहीं दानव का भी अंत कर देता है।

Sunday, August 3, 2014

सनातनी विचार !
कलाकार, कवि - साहित्यकार,संगीतकार, पत्रकार ये कल को यानि भविष्य को नया आकार देते है . इन सब को स्वच्छ प्रेरणा देकर देश हित में इनकी प्रतिभा को आवश्यकता अनुसार लगाना चाहियें . ये उठ खड़े हुए तो देश उठ खड़ा होता है .''नयाल सनातनी''
 सनातनी विचार -----
क्षमा बड़न को चाहिये, छोटन ( मित्रो ) को उतपात।
कह रहीम हरि का घट्यौ, जो भृगु ( मित्र ) मारी लात॥

दोस्त को विशाल ह्रदय होना चाहिए, समय आने पर अपने मित्र की लात को फूल समझना चाहिए .श्री हरि की तरह इस लिए तो ब्राह्मण देवताओं की और श्री हरि की मित्रता अमर है।
ब्राह्मण देवता सर्वप्रथम श्री हरि की ही पूजा कराते है सभी भक्तो से .....ये है अमर दोस्ती। जय श्री हरि, जय ब्राह्मण देवता -

Saturday, August 2, 2014

सनातनी विचार ! 
सत्य कुछ समय के लिए पिछड़ तो सकता है धनवानों की महफ़िल में खनकते सिक्को के बीच, पर परास्त कदापि नहीं हो सकता ........
सनातनी विचार !
जहाँ राम वही अयोध्या जहाँ गाय वही श्याम.इस लिए गौदान,गौशाला निर्माण में सहयोग अयोध्या,वृन्दावन में ही नहीं पुरे देश में जहाँ गौमाताएँ हो वहाँ करें .https://www.facebook.com/jaypal.singh.35/info
सनातनी विचार !
मानव का कल्याण ब्रह्मा, विष्णु, महेश या गौमाता नहीं करती। मानव का कल्याण तो उसके अपने सत कर्म ही करते है .
इस लिए कहते है ( गायों के स्वामी ) गोस्वामी तुलसीदास जी राम चरित मानस में --
कर्म प्रधान विश्व रची राखा जो जस करही तस फल चाखा..

एक ब्राहमण देवता थे अनेक यज्ञं कीये हजारों कथा कीये खूब धर्म का प्रदर्शन किये अंत में नरक मिला पूछे यम-धर्मराज से येसा क्यों ?
यमराज बोले आपने अनेक यज्ञं किये हजारों कथा की पर सबका फल पहले ही ले लिया .आपने एक - एक कथा करने के लाखो रुपये वसूल किये यज्ञों में यजमान के समर्थ से अधिक दक्षिणा वसूल की और उस वसूल किये धन से कोई भी अपने कल्याण के लिए अनुष्ठान नहीं किया आपको समय भी कहाँ था दूसरो के भाग्य जगाने के आलावा परमात्मा के कार्य के लिए ? अब पस्ताये होत क्या ? जाओं फिर 84 के फेरो में यहाँ कोई रिसवत नहीं चलती .........

Friday, August 1, 2014



सनातनी विचार !
जहाँ गौमाता है वहां गोपाल यानि श्री कृष्ण है, श्री राम है, शंकर भगवान है, और अन्य सबही देवी देवता है ही । इसपर यह कहना की केवल वृन्दावन, अयोध्या, मथुरा, काशी, हरिद्वार आदि तीर्थो में ही गौ-दान का महत्व है, सारी जेबे यही ख़ाली करो यह बात तर्क संगत नहीं लगती। 

इन तीर्थ स्थनों में तो गायों को खुले घुमाने की जगह तक नहीं यहाँ गौवंश को मजा नहीं सजा है।  क्योकि जबतक गौवंश नित्य 4 किलोमीटर नहीं चलेगा उसका ना दूध में वह पोषक तत्व पूर्ण रूप से आते है ना अन्य पञ्च गव्य में।
जितने इन तीर्थो में गौवंश है उतना अकेले राजस्थान के एक गौवंश ऋषि दत्त शरानानंद जी अकेले पाल रहे है जहाँ सिर्फ रेत ही रेत है।जिस स्थान को कल्युग का वृन्दावन कहाँ जा रहा है आज।  
इस लिए गौ-प्रेमी मित्रो हमारा मानना है आप जहाँ है गावों में गौ -शालायें खुलवाइये वही वृन्दावन वही अयोध्या बनाइये। और यह सुनिश्चित जरूर कर ले की सच में आपका दिया दान कहाँ सार्थक हो रहा है।   
क्योकि लालची,अपात्र और कुपात्र को दिया दान कोई पुण्य फल नहीं देता।अगर आपके मेहनत के कामाये धन का दुरपयोग होता है तो दोषी आप भी है क्योकि बिना सोचे-समझे आपने दान किया है .   निवेदक ;--''सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार''