सनातनी विचार !
जहाँ गौमाता है
वहां गोपाल यानि श्री कृष्ण है, श्री राम है,
शंकर भगवान है, और अन्य सबही देवी देवता है ही ।
इसपर यह कहना की केवल वृन्दावन, अयोध्या, मथुरा, काशी, हरिद्वार आदि तीर्थो में
ही गौ-दान का महत्व है, सारी जेबे यही
ख़ाली करो यह बात तर्क संगत नहीं लगती।
इन तीर्थ स्थनों
में तो गायों को खुले घुमाने की जगह तक नहीं यहाँ गौवंश को मजा नहीं सजा है। क्योकि जबतक गौवंश नित्य 4 किलोमीटर नहीं चलेगा उसका ना दूध में वह पोषक
तत्व पूर्ण रूप से आते है ना अन्य पञ्च गव्य में।
जितने इन तीर्थो
में गौवंश है उतना अकेले राजस्थान के एक गौवंश ऋषि दत्त शरानानंद जी अकेले पाल रहे
है जहाँ सिर्फ रेत ही रेत है।जिस स्थान को कल्युग का वृन्दावन कहाँ जा रहा है
आज।
इस लिए गौ-प्रेमी
मित्रो हमारा मानना है आप जहाँ है गावों में गौ -शालायें खुलवाइये वही वृन्दावन
वही अयोध्या बनाइये। और यह सुनिश्चित जरूर कर ले की सच में आपका दिया दान कहाँ
सार्थक हो रहा है।
क्योकि लालची,अपात्र और कुपात्र को दिया दान कोई पुण्य फल
नहीं देता।अगर आपके मेहनत के कामाये धन का दुरपयोग होता है तो दोषी आप भी है
क्योकि बिना सोचे-समझे आपने दान किया है .
निवेदक ;--''सर्वदलीय गौरक्षा
मंच परिवार''
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