Wednesday, August 6, 2014

सनातनी विचार !
मन इधर - उधर भटकाने वाला जीवात्मा है .मन को बस में करो,उस पर अंकुश रखो .मन सुधरेगा तो जीवन सुधरेगा .मन को विवेक रूपी लकड़ी से रोज पीटो . भोग से जीव तृप्त हो ही नहीं सकता .त्याग में ही तृप्ति समायी है .

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