Monday, August 18, 2014

सनातनी विचार !
कही आपका प्रारब्ध भी सतकर्म, गौसेवा, गौरक्षा, गौ- कार्यों  में जाने से रोकता तो नहीं ? आप अपने संकल्प शक्ति से उसे तोडिये बरना गौलोक धाम तो सपना है बाकी संसार ही अपना है वाली कहावत आपके साथ भी हो सकती है !
हमने देखा है। 
हमारे कई मित्रों का जब वे किसी सत-कर्म की ओर कदम बढ़ाते है, उनको प्रारब्ध रोक देता है । जैसे नौकरी से छूटी नहीं मिली, व्यापर से समय नहीं मिला,शादी में जाना है, दोस्त के बेटे का जन्म दिन पार्टी है, पत्नी को आज बहुत खाँसी है,मेरा सर दुःख रहा है। आदि अनेक छोट कारण ही सत कर्म से मनुष्य को रोकते है। पर मजबूत इरादो और भाग्यशाली मानव इन सब छोटे कारणों को अनदेखा कर आगे बढ़ जाता है।  और अपने खाते में सतकर्मो की लम्बी लिष्ट जमा कर लेता है।
                      ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार''

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