Wednesday, August 20, 2014

यस त्वं कृष्णे गते दूरम सः गाण्डीव धनवाना ,
सोचियोसी असोचयान रहसी प्रहाराण वधम अर्हसि ।।

हे दुष्ट अधर्मी गौ-विरोधी !
क्या तुम भगवान श्री कृष्ण और गाण्डीव धारी अर्जुन को अद्रश्य जान निर्दोष गाय को पीटने- मारने की हिम्मत करता है ।
तुम निर्दोष गाय को एकान्त में पीट रहे हो, इसलिए तुम अपराधी हो और तुम मृत्यु दण्ड देने के लायक हो। जिस सभ्यता में भगवान को भुला दिया जाता है, और अर्जुन की तरह गौ - भक्त योद्धा नहीं होता तब काले- कलयुग के साथी अधर्म का लाभ उठाके निर्दोष गाय-गौवंश को एकांत के बूचड़खानों में काटते है।
महाराज परीक्षित के आदेश अनुसार ऐसे हत्यारों को मार देना चाहिए। धर्मपरायण राजा के अनुसार जो मुजरिम गाय को काटता है उसे मौत की सजा दे देनी चाहिए। बिलकुल वैसे ही जैसे किसी दुष्ट हत्यारे को दी जाती है जिसने मासूम बच्चे की हत्या एकान्त में की हो।
''नयाल सनातनी'' संस्थापक;-- ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार''

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