सनातनी विचार !
ईर्ष्या ही सत मार्ग की सबसे बड़ी बाधक है। जो व्यक्ति दूसरे का यस,धन-दौलत, सुख-सौंदर्य, बल- बुद्दी और प्रतिष्ठा से ईर्ष्या करता है उसकी व्याधि की कोई औषधि नहीं है, बल्किन उसका रोग लाइलाज होते जाता है। ईर्ष्या उनको अधिक होती है जो कुछ कर नहीं पाते या करना नहीं चाहते सिर्फ निन्दा के आलावा ! इसलिए ईर्ष्या को निन्दा की बड़ी बहन कहा गया है। हो सके तो इन दोनों बहनों को अलक्ष्मी की तरह अपने से दूर रखें। इसलिए अपने मन को गौ-सेवा में लगायें गौ-भक्ति, गौ-सेवा जीवन में आ जायेगी तो इर्ष्या भाग जाएगी। अगर गौ- सेवा के बाद भी इर्ष्या मन से नहीं जाती तो समझो अभी गौ- भक्ति जीवन में आई ही नहीं अभी आप अपिपक्क है गौ-सेवा में । ''नयाल सनातनी''
ईर्ष्या ही सत मार्ग की सबसे बड़ी बाधक है। जो व्यक्ति दूसरे का यस,धन-दौलत, सुख-सौंदर्य, बल- बुद्दी और प्रतिष्ठा से ईर्ष्या करता है उसकी व्याधि की कोई औषधि नहीं है, बल्किन उसका रोग लाइलाज होते जाता है। ईर्ष्या उनको अधिक होती है जो कुछ कर नहीं पाते या करना नहीं चाहते सिर्फ निन्दा के आलावा ! इसलिए ईर्ष्या को निन्दा की बड़ी बहन कहा गया है। हो सके तो इन दोनों बहनों को अलक्ष्मी की तरह अपने से दूर रखें। इसलिए अपने मन को गौ-सेवा में लगायें गौ-भक्ति, गौ-सेवा जीवन में आ जायेगी तो इर्ष्या भाग जाएगी। अगर गौ- सेवा के बाद भी इर्ष्या मन से नहीं जाती तो समझो अभी गौ- भक्ति जीवन में आई ही नहीं अभी आप अपिपक्क है गौ-सेवा में । ''नयाल सनातनी''
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