Thursday, August 21, 2014

सनातनी विचार !
सनातन शास्त्रनुसार तीर्थो में एवं तीर्थो में रहने वालो को दान देने से दानी को अक्षय पुण्य प्राप्त होता ही है . वह हर जन्म में दानी बनकर ही जन्म लेता है .यानि कभी दरिद्र नहीं पैदा होता .
वैसे ही तीर्थों के नाम पर दान लेने वालो को भी ध्यान रखना चाहिए की दान जिस मकसद से लिया गया है वह उसी कार्य में लगे अगर गाय के नाम पर लिया गया है तो गाय को भर पेट खिलाएं , ब्राह्मण भोजन को लिया गया है तो ब्राहमणों को ही भोजन करायें,साधू - संतो के भंडारे हेतु दिया गया धन से भण्डारा ही हो, अगर तालाब -पोखरा - कुवाँ आदि खोदने सुधारने लिया गया है तो उसी में लगे, धर्मशाला हेतु दिया धन धर्मशाला ही बने ना की होटल की तरह कमाने का साधन .
ऐसा नहीं होने पर दान लेने वाला अंतिम क्षणों में बड़ी विपदा से प्राण त्यागता है और अगले जन्म में महा दरिद्र पैदा होकर दर-दर भीख मांगता है .
''नयाल सनातनी'' ;-- सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार

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