Wednesday, August 27, 2014

एक कसाई किसी मुर्ख स्वार्थी के घर से ढाई लीटर दूध देने वाली गाय ले आया . कसाई को मांस से मतलब था वह दूध से भरे थनों के तरफ ध्यान ही नहीं दे रहा .तब गौ माँ अपने संत स्वाभाव बस राम्हाने लगी यह देख पडोसी ने कहाँ इसके थन दूध से भरे हुए है दूध निकल ले. उस कसाई को आराम से ढाई लीटर दूध दिया मेरी गौ माँ ने फिर उस कसाई ने काट कर मांस बेच दिया .गौ माँ तो सबको गले लगाती है कसाई काटने से पहले दूध निकाल लेता है .वह यह नहीं कहती की तू काट रहा है मुझे पहले दूध क्यों दू .इतनी सरल कोई होगा संसार में ? फिर भी हम उसकी ममता को नहीं समझ पाते अपने सुख के जतन में लगे है ............धिक्कार हमारे स्वाभाव को .नमन उस देवी के स्वाभाव को .

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