Wednesday, August 13, 2014

सनातनी विचार !
किसी से कुछ पाने के प्रलोभन से मनुष्य पराधीन हो जाता है । और अधिक जीने के इच्छा से ही मृत्यु का भय बना रहता है।
अगर हम यह सोच ले की हमें अब किसी वस्तु की आवश्यकता नहीं ( लालच को त्याग दें ) तो फिर कितना ही धनवान हो हमें उसके बड़ेपन से कोई फर्क नहीं पड़ेगा।बड़े से बड़ा राजनेता, व्यापारी या विद्द्वान के सामने हम सहज होंगे सामान्य स्तिथि में।
और मृत्यु तो अटल है, अभी भी आ सकती है। कभी भी आ सकती है, यह समझ में आजाये तो, फिर मृत्यु का भय भी चला जायेगा। 
फिर जो स्थिति होगी वह परमहंस की स्तिथि होगी। और इस परमहंस की स्थिति में मनुष्य केवल ''गौमाता'' की कृपा से पहुच सकता है। शुद्द गव्य पदार्थो का सेवन करके जैसे पूर्व में हमारे संतो, ऋषि- मुनियों ने यह स्तिथि पाई थी,परमहंस की स्तिथि। ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार''

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