Tuesday, February 23, 2016

देश द्रोह क्या-क्या है ! लुट गया हरियाणा का गरीब !
क्या देश के खिलाफ नारे लगाना ही देश द्रोह है, देश के टुकते -टुकड़े करने के नारे ही देश द्रोह है ? या सच में देश के लोगो के ह्रदय के टुकड़े -टुकड़े कर देना देश द्रोह है। देश की 34 हजार करोड़ की सम्पति को नष्ट कर देना आग के हवाले कर देना लूट लेना भी देश द्रोह की परिधि में आता होगा ? कल हरियाणा के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु रुधें गले से टीवी में बोल रहे थे मेरे परिवार के 9 सदस्यों को एक कमरे में बंद करके पुरे मकान को आग के हवाले कर दिया उप्रदवियों ने।
अगर पडोसी धुवे के गुब्बार में छुप के पिछले दरवाजे से मेरे परिवार को बाहर नहीं निकालते तो 9 जीवन दम तोड़ देते ! क्या ये देश द्रोह नहीं है ? जब एक पावरफुल वित्त मंत्री की यह गति है हरियाणा में तो बाकी आम लोगो की गति सब आसानी ले अनुमान लगा सकते साधारण बुद्दी वाले लोग भी !
एक गरीब ढाबे वाली महिला कह रही है मैं विधवा हूँ मेरे दो जवान बेटियां है, मेरे ढाबे को आग लगा दिया, अब कुछ नहीं बचा मेरा परिवार आज रोड पर है ? क्या मुगलों ने भी ऐसा किया हूँगा नहीं नहीं इतने निर्दयी मुग़ल भी नहीं होंगे !
ऐसा वाक्य आज तक सुनने को नहीं मिलता जो लुटने के बाद गरीबो की सम्पति सब आग के हवाले किये हूँ। हरियाणा के लोगो का विश्वास हरियाणा के पोलिश प्रशासन पर से भी उठ गया। अपने जीवन को अब भी असुरक्षित महसूस कर रहे आम नागरिक सब कुछ बेच के हरियाणा से जाना चाहते है। किसी को अपने देश- घर-बार सब छोड़ने पर मजबूर करना क्या यह देश द्रोह नहीं ?? इंद्रा गाँधी के हत्या के बाद जो सिक्खों के साथ अत्याचार हुआ उससे भी विकराल रूप इस बार आम हरियाणा के नागरिको के साथ हुआ। इस देश में जब आज तक सिक्खों को न्याय नहीं मिला तो हरियाणा के आम नागरिको को न्याय मिलेगा यह संभव ही नहीं ?
एक टीवी चैनल वाले कह रहे थे कुरुक्षेत्र के महाभारत युद्ध में हुए नुकसान से अधिक नुकसान है यह। फर्क सिर्फ इतना है तब हर तरफ लाशों के मुंड दिख रहे थे पर अब हर तरफ घरों दुकानों मॉलो के जले हालत में सर मुंड दिख रहे है। अब क्या यह हमेशा के लिए दिलो में आई दीवार को आरक्षण मिलने के बाद भी लोग पाट पाएंगे ? भय अपने दिलो से निकल पाएंगे ये लोग भगवान इनको शक्ति देना ! क्योकि मरे हुए आदमी को दुःख नहीं होता लुटा-पिटा आदमी पल-पल बददुवा देता है जिससे लुटेरा खुशहाल परिवार भी बर्बाद हो जाता है। सावधान अब जो लुटा है उसे पचा के दिखाओं ! जिन लोगो ने इंद्रा गाँधी की हत्या के समय सिक्खों से लूट-पाट की वे सब बर्बाद है। कईयों के तो वंश उजाड़ गया कोई तिलांजलि देने वाला नहीं बचा --- अगर थोड़ी भी शर्म बची है तो दुबारा हरियाणा के लोगो के आशु पोछो ! बाकी राम भली करें। जो लोग लुट चुके रो-रो कर अपनी किसमत और भगवान को कोष रहे है ! उनके साथ पूरा देश है अगर सरकार उनको सही मुवाजा नहीं दे पाती है तो ? पुरे देश के लोगो को एक ''हरियाणा सहायता कोष'' बनान चाहिए जिससे उन आहात लोगो की कुछ मदद हो सकें।
बेहद दुखी ह्रदय से लिखा गया है एक मानवतावादी की कलम में ---
''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
सनातन शास्त्रों के अनुसार दान के तीन भेद ! गृह, मंदिर या महल, विध्या, भूमि, गौ, कूप, प्राण और स्वर्ण – इन वस्तुओं का दान अन्य वस्तुओं की अपेक्षा उत्तम माना गया है । अन्न, बगीचा, वस्त्र तथा अश्व,वाहन आदि – इन द्रव्यों के दान को मध्यम  दान कहते हैं । जूता, छाता, बर्तन, दही, मधु, आसन, दीपक, काष्ठ  और पत्थर आदि वस्तुओं के दान को कनिष्ठ दान बताया है ।
''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
किसी भी प्रकार के दान का थोडा होना या बहुत होना अभ्युदय का कारण नहीं होता ! अपितु श्रद्धा और शक्ति ही दान की वृद्धि और क्षय का कारण होती है । यदि कोई बिना श्रद्धा के अपना सर्वस्व दे दे अथवा अपना जीवन ही निछावर कर दे तो भी यह उसका फल नहीं पाता !
इसलिए दानी को श्रद्धालु होना चाहिए । श्रद्धा से ही धर्म का साधन किया जाता है, धन की बहुत बड़ी राशि से नहीं । अन्न दान देने का मतलब यह नहीं हम रुखा-सुखा भोजन परोषे !
शक्तिनुसार श्रदा से उत्तम भोजन कराने वाला ही अंत में उत्तम फल का भागी होता है ...
 ''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
भगवान ( अल्ला, गॉड,वाहे गुरु ) तो सब जगह है, पर नजर होनी चाहियें ! भूख से बिलखते बच्चों में,कसाई की तलवार के नीचे कांपती गाय में, मछवारे के जाल में फंसी तड़फती मछलियों में, पिजरे में आजादी के लिए फडफाड़ते पंछी में !
''नयाल सनातनी''  
सनातनी विचार !
मूर्खों में साहस होता ही है। (यहाँ साहस का तात्पर्ये चोरी-चकारी, लूट-पाट, हत्या आदि से है ) मूर्खों से विवाद नहीं करना चाहिए।क्योकि वे अपाने हित के लिए किसी की भी जान ले लेने में भी नहीं चूकते। प्रस्तुति - ''नयाल सनातनी''
 विचार -- आचार्य चाणक्य
सनातनी विचार !
भगवान सबके लिए सुलभ है, बस हमें पात्र बनना है। क्योकि भगवान को सोने-चाँदी के पात्र में ही भोग लगाया जाता है पीतल में नहीं।
''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
जिस प्रकार कीमती रत्न-आभूषण खंडित होने पर भी फैका नहीं जा सकता ! उसे हिफाजत से सम्भाल कर रखा जाता है । उसी प्रकार विद्वान व्यक्ति में कोई साधारण दोष होने पर उस पर ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए।विद्द्वान भी एक अमूल्य रत्न है, संकट काल के समय विद्द्वान 'राजा' को सही मार्गदर्शन कर प्रजा के संकटों का हरण करता सिद्द होते है।
     ''नयाल सनातनी'' 
सनातनी विचार !
सम्पूर्ण राज्य पर अधिकार, मंत्रीगण कर्तव्य परायण, पदाधिकारी आज्ञाकारी,चतुरंगणी सेना (हाथी, घोड़े, रथ और पैदल) समस्त वीर सैनिक ( जल सेना, थल सेना, वायु सेना, ) सब अधिकार क्षेत्र में और सब पर नियंत्रण पर अपनी इन्द्रियों पर नियंत्रण नहीं ! तो राजा नष्ट हो सकता है। अपनी इन्द्रियों पर विजय पाकर देश हित ( प्रजा हित )  में कार्य करने वाला 'राजा' ही सदा विश्व विजेता बनता है।
''नयाल सनातनी''

Monday, February 22, 2016

सनातनी विचार !
इस पृथ्वी पर राज्य, स्वर्ण आभूषण-हीरे-मोती ,दास- दासीया, गाय-बैल, अश्व, हाथी और पृथ्वी तक का दान देने वाले राजा-महाराजा बहुत हुए आगे भी होंगे इसमें संसय नहीं ! लेकिन जीव मात्र को सदा अभयदान देने वाले मानव दुर्लभ हैं।
      ''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
मनुष्य आया ख़ाली हाथ था पर जब जायेगा उसके साथ उसके अच्छे और बुरे कर्म जरूर साथ जाते है। जो यह निश्चित करते है की 'जीव' भयंकर यातनाओं वाले यमराज के लोक जायेगा या पवित्र आत्मा वाले महाराज धर्मराज के धर्म-लोक !
         ''नयाल सनातनी''

Saturday, February 20, 2016

सनातनी विचार !
दुष्ट की संगति अर्थात कुसंगति से सावधान !
दुष्ट की संगति कीर्ति नष्ट कर देती है, कलेश उत्पन्न कराती है, अशुभ गति प्रदान करती है,मनुष्यों में उद्वेग और खिन्नता उत्पन्न कराती है। बुद्दी को भ्रम में डालती है।प्रतिष्ठा का नाश कराती है। प्राण शक्ति क्षीण करा देती है। जिस प्रकार अग्नि शीतल चन्दन की लकड़ी को भी जला देती है उसी प्रकार दुष्ट व्यक्ति किसी का भी अहित कर सकते है। कुसंगति सकल मंगलों को नष्ट करा देती है।
''नयाल सनातनी''

Thursday, February 11, 2016

सनातनी विचार !
नींद- इर्ष्या - काम चोरी आदि अनेक अपनी बुराइयों को स्वीकार करना बड़े साहस का काम है। पर उससे बड़ी हिम्मत की बात यह है कि उन्हें छोड़ने का दृण निश्चय किया जाय ! जीवन में आगे बढ़ा जाय,जब हम ये सब बुराइया छोड़कर आगे बढ़ते है तो अनेक 'शुभ मंजिलें' हमारा इंतजार करते हुए खड़ी मिलती है,जो सत मार्ग की ओर ले चलती है। और उस राह पर हमें परमात्मा के सच्चे बन्दे मिलते जाते है।
''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
साहस (मजबूत आत्म-बल ) ही एक मात्र ऐसा सच्चा साथी है। जो जिसे लेकर मनुष्य एकाकी भी दुर्गम दिखने वाले पथ पर चल पड़ने एवं लक्ष्य तक जा पहुँचने में समर्थ हो जाता  है। जैसे ही साहस टुटा रास्ता छूटा, मंजिल बहुत दूर होती जाती है। गहरे दरिया को लांघने का साहस दिखाने वाला 5 फुट का साहसी बालक एक दिन देश का प्रधान मंत्री बन जाता है। ( लाल बहादुर )
   ''नयाल सनातनी''
  
सनातनी विचार !
अहिंसा परमो धर्मः ! जो व्यक्ति हिंसा में प्रवृत्त होता है, उसका सारा धर्म नष्ट हो जाता है। हे मानव ! पुराणों में विद्द्वानो ने जीव-हिंसा छः प्रकार के बताये है। पहला हिंसक वह जो हिंसा का अनुमोदन करता है, यानि हिंसा करो कह कर लोगो को गलत राह की ओर भटकाता है। दूसरा हिंसक वह है जीव को मारता है। तीसरा हिंसक वह है जो विश्वास पैदा करके जीवो को फंसाता है। मारे गए जीव का मांस खाने वाला चौथा हिंसक है। उस मांस को पकाकर तैयार करने वाला पाँचवाँ हिंसक है। हे मानव ! जो उस मांस का बटवारा करता है वह छठा हिंसक है। क्रमशः ये एक के बाद एक बड़े हिंसक है, इन हिंसक प्रवृत्ति से बचकर ही श्रीमन-नारायण की शरणागति प्राप्त होती है बर्ना लाखों जन्म लेने पर भी भगवत भक्ति दुर्लभ ही मानना चाहिए जीव को ।
''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
सनातन सत्य !
शंकराचार्य ज्योतिष पीठ बद्रिकाश्रम के अनुसार आज से 1 करोड़ 62 लाख 84 हजार वर्ष पूर्व श्री राम जो राम राज्य की स्थापना किये। उनकी सत्ता इस धरा धाम पर थी।
तब भगवान श्री राम ने एक दिन अपने कुलगुरु वशिष्ठ महामुनि से एक प्रसन्न पूछा !
हे महामुनि ! हे कुलगुरु ! सनातन धर्म की व्याख्या कीजिये ? तब सम्पूर्ण वेद-शास्त्रों के जानकार वशिष्ठ महामुनि ने कहाँ।
हे राम आप सर्वग्य है, सब जानते है पर शायद अपने कुल गुरु को ईतिहास में सम्मान दिलाने ही यह प्रसन्न किये है। पर जब प्रसन्न पूछा है तो जबाब सुनो।
हे सर्वग्य श्री राजा राम ! हे मर्यादा पुरुषोत्तम ! सनातन धर्म की व्याख्या करने की मेरी सामर्थ नहीं है। ना ही मेरे पूर्वजों की थी। यह सनातन धर्म स्वयम्भू है ना इसे किसी ने बनाया, ना ही कोई बना सकता था। सनातन का मतलब ही है जो सदा था सदा रहेगा।
हे राम ! आप और हम रहे या ना रहें पर यह सनातन धर्म हमेशा रहेगा। वेद भी नेति-नेति करके इस ''सनातन धर्म'' की प्रसंसा करते है। पर व्याखया नहीं करते।
"असित गिरी समं स्यात, कज्जलं सिन्धु पात्रे,
सुरतरुवर शाखा, लेखनी पत्र मूर्वी।
लिखति यदि गृहीत्वा, शारदा सर्व कालं,
तदपि तव गुणानामीश! पारं ना याति।"
अर्थात -- हिमालय जैसे असीमित पर्वत के बराबर स्याही को समुद्र के पात्र में घोलकर देववृक्ष की शाखा की लेखनी बनाकर अनंत आकाश में यदि स्वयं ज्ञान की देवी सरस्वती भी कल्प कल्पांत तक यानी सदैव लिखती रहें तो भी शिव की महिमा का गुणगान लिखना संभव नहीं है ।
जिस तरह भगवान शिव की महिमा को कोई नहीं लिख सकता उसी तरह ''सनातन धर्म'' की गहराई नापने को कोई पैमाना नहीं है, ना होगा।
''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
सनातन सत्य वचन !
आशा तजि माया तजै, मोह तजै अरू मान।
हरष शोक निन्दा तजै, कहैं कबीर सन्त जान॥
कबीरदास जी कहते है कि जिस व्यक्ति ने आशाओं का त्याग कर दिया। संसार के माया मोह में नाता तोड़ लिया और मान और अपमान की भावना का त्याग कर दिया। किसी वस्तु की प्राप्ती पर प्रसन्नता व्यक्त करना अथवा कोई हानि होने पर दुखी होना छोड़ दिया। निन्दा और ईर्ष्या से दूर हो गये। ऐसे मानव को भेष कैसा भी पूर्ण सन्त जानो।
सनातनी विचार !
अनुभव की बात !
निष्कपट मन से जो 33 करोड़ देवी-देवताओं की पूज्या गौमाता का कार्य करते है, उनके राह में बाधा पहुचाने वाले कभी सुखी नहीं होते।उन्होंने जितना बुरा दुसरे का किया उससे अधिक उनका हो जाता है, कुछ समय में ही उनको पता चल जाता है। यह हमारी अनुभव की हुई बात है। पर उसके बाद भी उन कपटियों के बारे में पूर्ण जानकारी होने पर भी जो उनके सफलता की कमाना करता है, उनको माफ़ कर उनके साथ फिर से गौ कार्य करने को तैयार रहता है, उसपर गौमाता और अधिक प्रसन्न रहती है। उसका यस दिनों-दिन बढ़ता ही जाता है। यही सनातन सत्य है।
जय गौ माता जय गोपाल।
''सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार''
सनातनी विचार !
भगवान की ---
पंचोपचार (5 प्रकार)
दशोपचार (10 प्रकार)
षोडशोपचार (16 प्रकार)
द्वात्रिशोपचार (32 प्रकार)
चतुषष्टि प्रकार (64 प्रकार)
एकोद्वात्रिंशोपचार (132 प्रकार) और भी अनेक प्रकार पूजा विधि हो सकती है .पर सबसे सरल उपाय है भगवान को देखने का उनको महसूस करने का ध्यान में आप बैठ जाए .परमात्मा को अपने अंदर महसूस करें .अपने स्वासों को आता-जाता देखे, महसूस करें कुछ समय बाद आपको अतुलीनीय आनन्द की प्राप्ति होने लगेगी . जिस तरह इस मंदिर के दरवाजे पर ताला लगा हुआ है जब खुलेगा तब ही देव दर्शन होंगे .उसी प्रकार हमारे आत्मा के दरवाजे पर भी ताला लगा है जब ध्यान करंगे तभी परमात्मा के दर्शन होंगे . और कोई उपाय है ही नहीं परमात्मा तक पहुचाने का, परमात्मा को महसूस करने का -----
''नयाल सनातनी''.संस्थापक अध्यक्ष ;--सर्वदलीय गौरक्षा मंच
सनातनी विचार !
तुम जीत गये मैं हार गया, तेरे संसार ने मुझे मार दिया।
जिन्दगी भर जो 'राम' जपा, अंत समय मेरा काम दिया।
''नयाल सनातनी''
जीत किसके लिए,हार किसके लिए।
ज़िंदगी में ये तकरार किसके लिए।?।
जीव आया है संसार में, एकदिन जाना ही होगा।
फिर इतना सारा अहंकार, किसके लिए।?।

तुम जीत गये मैं हार गया, तेरे संसार ने मुझे मार दिया।
जिन्दगी भर जो 'राम' जपा, अंत समय मेरा काम दिया।
''नयाल सनातनी'
सनातनी विचार !
आदि-अनादि ''सनातन धर्म'' के मुकुटमणि ''सनातन ब्रह्म'' सूर्य देव के उपासना का महान पर्व, ''आदि देव'' सूर्य की कृपा प्राप्त करने का महान पर्व मकर संक्रान्त्रि की हार्द्दिक शुभ कामना सभी ''सनातनी गौ-भक्त समाज'' को जय गौ माता की ।
भगवान सूर्य को ''आदि सनातन देव'' इसलिए भी कहाँ गया है सत्युग में घोर तपश्या के पुण्य से महर्षि कश्यप की संतान के रूप में ऋषि को सम्मान देने प्रकटे सूर्य नारायण, जब श्रीराम ने अवतार लिया त्रेता युग में तब भी आप संसार का अंधकार मिटा रहे थे और जब श्री कृष्ण अवतार हुआ द्वापर युग में तब भी आप मौजूद थे, और आज कल्युग में जब पुरे विश्व में आध्यतम के क्षेत्र में घोर अँधेरे का वातावरण है तो भी आप ही अज्ञान मिटाने मौजूद है अदितीय पुत्र।
''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
मुर्ख और स्वार्थी मित्रों पर, अधर्म से कमाया धन पर - देश-धर्म के काम ना आये बेकार की जवानी पर, कभी गर्व ना करों ! काल कभी भी पलक मारते इनका अपहरण करने आने ही वाला है। इसलिए तो कह गए है ''महापुरुष'' मुर्ख मित्र से विद्द्वान दुशमन हितकारी है।
''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
सावधान -- सतकर्म हो या दुष्कर्म फल समय आने पर जरूर मिलता है। जिस तरह लाखों रुपये से लगाई गई फैक्ट्री सही दिशा में मेहनत न करने पर खाक हो सकती है और मेहनत करने पर करोड़पति बना देती है। वैसे ही सत-कर्म और दुष्कर्म का चक्र है। सतकर्म स्वर्ग और दुष्कर्म नर्क की राह दिखाता ही है।
''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
यमराज कहते है ! जो पुरुष अपने वर्णधर्म से विचलित नहीं होता, अपने सुहृदय और विपक्षियों में समान भाव रखता है, किसी का धन हरण नहीं करता, न किसी जीव को कष्ट ही पहुचता है, गौ-माता में 33 करोड़ देवी-देवताओं की परिकल्पना करते हुए उनकी सेवा रक्षा का प्रयास करता है .
उस अत्यंत रागादिशून्य और निर्मल मन व्यक्ति को भगवान नारायण का भक्त जानो और उसको प्रणाम करने का फल भी श्रीमन-नारायण के प्रणाम के फल सामान ही जानो ------
''विष्णु पुराण से''
''नयाल सनातनी''
!! श्री गिरधर गोपाल गौशाला समिति, देव भूमि, उत्तराखण्ड !!
सनातनी विचार !
जब गाय नहीं होगी, इस कल्युग में गोविन्द क्यों आयेंगे।
गोविन्द के भक्तों, बिना गाय पाले गोविन्द ना रिझ पाएंगे।।
गाय के लिए ही तो गोविन्द, वृन्दावन में नंगे पावँ भागे आये थे।
अगर अब फिर बुलाना है ! गाय पालो फिर गोविन्द को पुकारों जी।।
देखों तो कान्हां फिर कैसे नहीं आते ! कल्कि रूप रख जल्द प्रकट हो जायेंगे।
जब गाय नहीं होगी कान्हा भी नहीं आयेंगे, गाय पालो जी कान्हा चले आयेंगे।।
जो बिना गाय पाले उपदेश बहुत देते,कान्हा भी ना सुने उनकी जनता भी नकारती है।
जब गाय नहीं होगी कान्हा भी नहीं आयेंगे, गाय पालो जी कान्हा फिर चले आयेंगे।।
''नयाल सनातनी''
पर उपदेश कुशल बहुतेरे, जे आचरहिं ते नर न घनेरे----
औरों को नसीहत, खुद मियां फजीहत --- इन निचे वाली दो लाइनों पर जरूर गौर करें सभी गौभक्त मित्र .
श्री गिरधर गोपाल गौशाला समिति, देव भूमि, उत्तराखण्ड
सनातनी विचार !
बच्चों को कुसंगति से, महिलाओं को व्यर्थ बातों से, बुजुर्गों को व्यर्थ चिंता से, स्वयं को विवाद से, गौमाता को मुसीबत से, देश को भ्रष्टाचारियों से बचावें। तब तो देश, विश्व, समस्त ब्रह्माण्ड एवं स्वयंग का कल्याण निश्चित है।
''नयाल सनातनी''
एक सनातन सत्य विचार !
एक बार पत्थरों ने श्री राम सेतु बनकर श्री राम का मान बढाया ,एक बार पत्थर के पहाड़ ने गिरिराज बन कर सम्पूर्ण वृज वासियों की रक्षा कर श्री कृष्ण का यस बढ़ाया। एक बार पत्थर के पहाड़ ने संजीवनी बूटी उगा कर श्री राम के भाई लखन लाल के प्राण बचा कर श्री हनुमान जी महाराज की मेहनत को जग में मान दिलाया। एक बार उसी विशाल पत्थर ने केदार नाथ में महान संकट के समय पौराणिक केदार नाथ के मंदिर एवं उनके भक्तों की रक्षा करके शिव भक्तों के विश्वास को अमर कर दिया।
फिर भी कुछ लोग कहते है ये ''सनातनी हिन्दू'' आखिर क्यों पत्थर को पूजते है ?? जबकि हमारे यहाँ के प्रतेक कंकण- कंकण में शंकर का वास है, जो हमारा द्रण विशवास ही नहीं अटल सनातन सत्य है। इसलिए हम आज पत्थर के ऊपर बैठकर भी उस देवादिदेव महादेव को जो पत्थर के लिंग में सदा विराजमान रहते है, जो इतने भोले है की उनके पत्थर के शिव लिंग पर चोरी की नियत से चड़े चोर को सदा के लिए ईतिहास में अमर कर देते है। मैं ऐसे भोले नाथ, धर्म के रक्षक, नंदी बैल की सवारी करने वाले ''शिव'' को ही याद कर अपना और जग का कल्याण की कमाना करता हूँ। इस पत्थर का आवरण लेकर , पत्थर पर बैठकर ही उनको नमन करता हूँ ।
''नयाल सनातनी'' सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार
सनातन सत्य विचार !
महर्षि मनु की सन्तान मानव जाती के कल्याण के लिए सम्पूर्ण वेद-शास्त्रों का सार !
सहज मृत्यु हो या अकाल मृत्यु मुक्ति हेतु ''श्रीमद् भागवत कथा'' अन्तिम विकल्प !!
श्रीमद भागवत महापुराण 'सनातन हिन्दू धर्म' के 18 पुराणों का मुकुट मणि है। जिसमे भगवान योगी-महा-योगेश्व श्री कृष्ण भगवान की प्राप्ति एवं भक्ति-ज्ञान-वैराग्य और मुक्ति के सरल शाधनों को चारों वेदो की सहायता से सूक्ष्म रूप में भगवान वेद व्यास ने विशाल बुद्दी वाले श्री गणेश की लेखनी की मदद से सहज ही रूपांतरित कर दिया है। जो 'जीव' एक बार ''श्रीमद् भागवत'' का आश्रय ले-लेता है, उसे फिर भक्ति एवं मुक्ति के लिए फटकना नहीं पड़ता।
महाज्ञानी ''गाय के पुत्र गोकर्ण'' ने इस 'महापुराण' में नारद जी ने यही कथा में यह सिद्द किया है जब जीव के गंगा में अस्ति विषर्जन से, 13 दिनों तक पवित्र नदी के तट पर पिंड दान से, एक वर्ष तक विभिन्न श्राद कर्मों से, अनेको प्रकार तिर्थादी एवं अन्य श्राद कर्मों से, अनेको प्रकार के दानादि कर्मो से, अनेको ब्राह्मण-यतियों के भोजन से, गया में श्राद एवं पिंड दान से भी जिस प्रेत आत्मा की मुक्ति नहीं होती उसको किसी 'विद्द्वान वेदपाठी भागवत वक्ता' से अंतिम विकल्प के रूप में ''श्रीमद् भागवत कथा'' सुनानी चाहिए। तब निश्चित ही जीव मुक्त होकर गौलोक धाम चला जाता है। फिर उसे इस 84 लाख योनियों के चक्कर में नहीं आना पड़ता उसे 'पुनर्पि जन्मम पुनर्पि मरणम' से मुक्ति मिल जाती है। यही सनातन सत्य है। यही अमर कथा भगवान शिव ने अमरनाथ में भगवती शिवा को सुनाई थी जिसे एक सुक ने सुनी और सुखदेव नाम से विख्यात होकर श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम वक्ता-श्रोता हुए। और महायोगी सुखदेवजी ने यह कथा प्रथम बार मृत्यु के द्वार पर खड़े राजा परीक्षित को सुनाई जो अंत में भगवान में ही बिलीन हो गए। भगवान नारायण के ही अंस श्री नारदजी ने यही कथा जवान भक्ति के बूढ़े पुत्र ज्ञान एवं वैराग्य को सुनाई थी जो फिर से जवान हो गए , सरांस यह है जिसने भी यह अमर फल खाया वही अमर हो गया,मुक्त हो गया -------
''नयाल सनातनी'' स्वामी करपात्री जी महाराज का अनुयाई
संस्थापक अध्यक्ष ;--- ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच''
सनातनी विचार !
भगवान के वैरी को गुरु माफी दिला सकतें है, सत मार्ग पर ला सकते हैं . पर गुरु से ही वैर करने वाले का सर्वनाश से बचाने वाला परमात्मा भी नही ! गुरु के वैरी को इस धरती पर कही ठोर नही यही सनातन सत्य हैं ..
"नयाल सनातनी"
सनातनी विचार !
जबसे गली के गुंडे राजनीति में आ गये खद्दर (खादी) बदनाम हो गयी, वर्ना पहले हमारे पुर्वजो ने सूत कात-कात कर अपनी तथा बहन-बेटियो की आबरु तन ढककर इस खद्दर ने बचाई थी, आजादी के परवानों ने इसे पहन देश की इज्जत बचाई थी .
हे राम !
यह क्या हो रहा आज उसी खद्दर से बहन- बेटिया डर कर अपनी आबरु बचाती फिर रही हैं .गरीब इस खद्दर से भयभीत कोने मे खडा हैं .
"नयाल सनातनी"
सनातनी विचार !
धर्म किसे कहते है ! युधिष्ठर-भीष्म संवाद -- जिसमे अभुदय ( लोकिक उन्नति ) और निःश्रेयस ( पार-लौकिक उन्नति यानि मोक्ष ) सिद्द होते हो वही धर्म है। धर्म अधोगति में जाने से रोकता है, मानव जीवन की रक्षा करता है।
धर्म ने ही सारी प्रज्ञा को धारण कर रखा है। इसलिए जिससे धारण और पोषण सिद्द हो वही धर्म है। जो अहिंसा से युक्त हो वही धर्म है। जहाँ हिंसा हो वही अधर्म की सुरुवात हो जाती है। सनातन काल से ही हिंसक से जीव-जन्तु दूर भागते हुए 'अहिंसक' की शरण लेते है। जो हिंसा से पीड़ित जीव को शरण देता है वही धार्मिक है।
''नयाल सनातनी''सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार
सनातनी विचार !
मनुष्य के मुख से निकले व्यंग बाण अधिक गहराई तक, (अधिक समय) तक चोट करते हैं, वरन उसके द्दारा चलाये गये तरकस के बाणों के !
द्रोपदि के व्यंग बाण ही थे जो दुर्योधन को अर्जुन के काल समान बाणों, महाबली भीम का दुशासन की छाती फाड कर लहु पी जाने वाला महाकाल रौद्र रुप भी भयभीत नही कर पाया !!!
"नयाल सनातनी"
सत्य पथ है ! या नहीं !
जब कोई पड़ा-लिखा, अमीर या किसी सरकारी-निजी क्षेत्र में उच्च पद पर कार्यरत ब्राह्मण कुल में जन्म लिए व्यक्ति उसी ब्राह्मण कुल में ही जन्म लिए सिर्फ शास्त्रीय, वैदिक और देवपूजा, पाठ से अपने कुटम्ब का भरण-पोषण करने वाले साधारण आय वर्ग के ब्राह्मण का हक़ मारने ! अपने कार्यालय से छूटी लेकर अधिक कमाई के लालच में पंडिताई करता है। मुझे अच्छा नहीं लगता ! मैंने ऐसे ब्राह्मणों से कोई देव कार्य नहीं कराने का संकल्प लिया है। आपने ???
''नयाल सनातनी'' राष्ट्रिय अध्यक्ष :--सर्वदलीय गौरक्षा मंच
सनातनी विचार !
आपका घर वास्तु दोष से मुक्त हो सकता है ! अगर आपके पास गाय या बैल रखने का स्थान है तो एक गौ का पालन करें। अगर आप शहर में रहते है, आपके पास स्थान का आभाव है। तो आप अपने घर में एक गौमाता की मूर्ति अथवा कामधेनु गाय की फोटो जरूर रखें। आपका घर वास्तु-दोष से मुक्त हो जायेगा।क्योकि सबसे अधिक सकारात्मक उर्जा गौमाता से निकलती है। ''नयाल सनातनी''सर्वदलीय गौरक्षा मंच
सनातनी विचार !
दीन-दुनिया की परवाह ना करके अहंकार शून्य होकर जो मानव इस कलिकाल में गौमाता की सेवा-रक्षा और प्रचार का कार्य तन-मन-धन से करता है ! उसके प्रतेक कदम- कदम पर एक-एक यज्ञं का पुण्य फल नौछावर होते रहतें है, गौमाता के कृपा प्रसाद से। गौ सेवक अगर कोई यज्ञं-पूजा-पाठ-तीर्थ स्नान- पुराण पठन आदि नहीं कर सकें तो भी ! उसके द्वारा सच्चे ह्रदय से की गई ''गौ-सेवा'' के पुण्यों से ही वह अपने परिवार के कई पीढ़ी आगे और पीछे के पितरों के साथ गौलोक का अधिकारी बन जाता है। यही सनातन सत्य है।
''नयाल सनातनी'' सर्वदलीय गौरक्षा मंच
सनातनी विचार !
1---- भगवान के तीन ही मुख है प्रसाद ग्रहण करने के !
पहला गाय -गौवंश को दिया तृण सीधे भगवान को प्राप्त होता है और स्वाद की चर्चा तक गौमाता के यहाँ नहीं होती बस आशीर्वाद की प्राप्ति अवश्य
होती है यह सनातन सत्य है।
२---- भगवान का दूसरा मुख है संत- ब्राह्मण का मुख जहां स्वादिष्ट भोजन से आशीर्वाद प्राप्त होता है और आपका दिया भोग नारायण तक पहुचता है।अंत में दक्षिणा अति आवश्यक है !!
३ - --- भगवान का तीसरा मुख है अग्नि जहाँ हवन द्वारा जड़ी- बूटी,जौ -तिल,ड्राय-फ़ूडऔर गौ घृत से भगवान को भोग लगाया जाता है जिसे साधारण
मनुष्य अपनी गरीबी के कारण बहुत कम कर पाते है। जो कर पाते है उनका कल्याण और लोक कल्याण निश्चित है यह भी सनातन सत्य है।
मनुष्य को इन तीनो में से जो सरल उपाय हो या जो उनके सामर्थ्य में हो उसको अपना कर भगवान को नित्य भोग जरूर लगाना चाहिए
जिससे परमात्मा द्वारा प्राप्त मानव शरीर, जल,अग्नि, वायु, पृथवी और आकाश के उपभोग का कर्ज कुछ कम हो। वैसे तो माता- पिता और भगवान
का कर्ज कोई चूका नहीं पाया पर स्वार्थी नहीं परमार्थी बनने की कोशिश मानव को जरूर करनी चाहिए यही सनातन शास्त्रों का मत है ।
''नयाल सनातनी'' सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार।
सनातनी विचार !
जो व्यापारी अपने दुकान पर शुद्द देशी घी से बनी देवतोओं के भोग हेतु मिठाई या बाल भोग लिख कर गाय के घी के वजाय अर्थ लाभ हेतु चर्वी वाला घी में भगवान का भोग बेचता हैं वह अपने साथ अपने कई आगे और पीछे की पीढीयों को नरक मे ले जाता हैं . क्योंकी सनातन शास्त्रों के अनुसार भगवान के भोले-भाले भक्तों को धोखा भगवान को धोखा देने से भी बडा अर्धम हैं .
''नयाल सनातनी"
सनातनी विचार !
एक टिन चर्वी वाले सस्ते घी से हवन करने के वजाय शुद्द प्रमाणित गाय के एक चम्मच घी से किया गया हवन से ठाकुर जी दोडे-दोडे भोग पाने आते है . जबकी चर्वी वाले एक टिन घी से जो हवन करते है उससे दानव बलवान होकर सनातन धर्म की कमर तोडने दोडे-दोडे आते हैं .
"नयाल सनातनी"
सनातनी विचार !
पवित्र भारत देश के प्रधान मंत्री एंव राष्ट्रपति जी को नयाल सनातनी का एक पवित्र संदेश !
मोदी जी गंगा मंत्रालय आपने बनाया साधुवाद !
पर गौ-मंत्रालय पहले बनाना चाहिये था . गंगा से गाय नही निकली है गौमुख से गंगा निकली हैं . गंगा विलुप्त भी हो गयी तो देश खत्म नही होने वाला !
पर अगर कहीं भारतवर्ष से गौवंश खत्म हो गया तो सब कुछ खत्म हो जायेगा . मानव जाति का नामोनिशान मिट जायेगा .
यही सनातन सत्य है .
"नयाल सनातनी"
सनातनी विचार !
एक अति आवश्यक सूचना सभी गौप्रमियों हेतु --
गौशाला मे गायों के साथ कभी कुत्तों को नही रखना चाहियें, क्योकिं गौवंश अस्वस्थ हो जाते हैं, गायों का दूध कम हो जाता हैं,गायों मे रोग उत्पन्न हो जायेंगे . यह सब 'गीताप्रेस' के गो-अंक मे छपा हैं . बताइये जब सब रोगो की नाश करने वाली गौमाता कुत्तो के निकटता से बिमारी हो सकती है तो ! जो लोग गौवंश को त्यागकर कुत्तो के साथ सोते है उनका क्या हाल होता होगा ??
जन हित-गौवंश के हित मे जारी सर्वदलीय गौरक्षा मंच द्दवारा ..
"नयाल सनातनी"
सनातनी विचार !
कल तक अर्धम की राह पर चल रहा कोई व्यक्ति अगर आज धर्म की राह पर चलने की कोशिस कर रहा है, तो उसकी जरुर मदद करें . वह चाहे आपका कल तक लाख विरोधी क्यों ना हों !
यही सनातन धर्म हैं .यही सत्य धर्म हैं .
"नयाल सनातनी"
सनातनी विचार !
संसार का कोई भी मनुष्य एक हाथ से ताली नहीं बजा सकता। ताली तो दो हाथों से ही बजेगी ना !
यहाँ तक की ईश्वर ( देवताओं ) का भी कार्य एक दूसरे के बिना नहीं होता। इसलिए शिव कही राम चरणों के दास हनुमान जी तो कही परमेश्वर राम उनको रामेश्वर रूप में पूजते है।
!! मारुति बन हरि-सेवा कीन्ही। रामेश्वर बन सेवा लीन्ही॥
''नयाल सनातनी'' ;-- सर्वदलीय गौरक्षा मंच - राष्ट्रिय अध्यक्ष
सनातनी विचार !
जो मानव अपने को इज्जत नहीं देता, अपने को प्यार नहीं करता, उससे संसार को भी कोई आसा नहीं होती !
पहले परमात्मा द्वारा दिया गया ( अमूल्य ) खरबों रुपये का अपने तन - शरीर की इज्जत कीजिये, फिर समस्त मानव जाति एवं जीव जन्तुओ से आपको प्यार करना आ जायेगा !
''नयाल सनातनी''
कटु मगर सत्य--- सनातनी विचार !
पहले गेरुवा वस्त्र ( सन्यास आश्रम ) त्याग का प्रतिक होता होगा ! पर आज गेरुवा वस्त्र ( सन्यास आश्रम ) सबसे बड़े संग्रह का प्रतिक बन गया है।
बाबाओं ( साधुओं ) में होड़ मची है अधिक से अधिक कंकरीट के जंगलों की स्थापना करने की।
हे राम तेरी माया ! जिस माया को त्यागने गेरुवा पहना उसने ही सबसे बड़े माया जाल में फंसाया !
इसलिए धन्य है गृहथ आश्रम,धन्य है प्रतेक सद गृहस्थ इसमें चीटी से लेकर हाथी तक और अंत्यज से लेकर साधू- ब्राह्मण तक के कल्याण हेतु मेहनत करता है गृहस्थ। और 33 करोड़ देवों की जननी गौमाता, उसके वंश एवं देवी- देवताओं के लिए भी भोग की व्यवस्था करता है एक गृहस्थ।
''नयाल सनातनी'' सर्वदलीय गौरक्षा मंच .
सनातनी विचार !
शिव (कल्याण ) को पाना पहले भी आसन था, आज भी। अपने अहंकार को त्यागना पहले भी कठिन था आज भी।
जिन्होंने अपने अहंकार को त्याग दिया, उनका जीवन शिव-मय ( कल्याण-मय ) हुआ है पहले भी आज भी !
''नयाल सनातनी''
सनातनी अनुरोध !
आदरणीय प्रधान मंत्री मोदी जी संपूर्ण धरती का 3/4 भाग (71 प्रतिशत) भाग जल है।
भगवान ना करें ! अगर गंगा आदि नदियों में से किसी एक नदी विलुप्त हो गई तो 'महासागरीय जल' को पीने लायक वैज्ञानिक बना सकते है। और कई विकसित देश बना रहे है।
पर अगर गाय - गौवंश विलुप्त हो गया तो शायद ही विश्व में किसी वैज्ञानिक की ताकत हो ! भारतीय देश गौवंश का दूध ( अमृत ) उपलब्ध करा दें।
देर नहीं हुई है अभी भी जागिये - गौ-मुख से निकली - गंगा को भी विपत्ति काल में अपने मूत्र द्वार में स्थान देकर रक्षा करने वाली गाय के लिए ''गौ-मत्रालय'' जल्द बनाइये --. भारतीय गौवंश बचाइये----
''नयाल सनातनी'' - सर्वदलीय गौरक्षा मंच अध्यक्ष
नोट --आपको मतदान देश की गौभक्त जनता ने इसीलिए किया था की गौ-रक्षा हो !
जबाब चाहिए !
गौ-रक्षा हेतु निवेदन लेकर बाबा जी आपसे मिले !
मोदी जी आपके लिए गौरथ लेकर 3 महीने चले !!
बाबा जी आपको 2 सौ करोड़ खाद्य मंत्रालय से मिल गए !
मोदी जी आपतो प्रधान मंत्री बन कर भी गाय मंत्रालय नहीं दिए !!
पुरे 20 महीने बाद भी हम गौ प्रेमियों की तखलीफ़ कोन सुनेगा ?!
मोदी जी क्या गंगा मंत्रालय की तर्ज पर गौ मंत्रालय भी बनेगा ?!!

''नयाल सनातनी''.
सनातनी विचार !
भगवान के घर जाने की तैयारी कर चूका नादान !
गठरी बांध उस रास्ते पर रख चूका सामान ।
पर जो साधन से कुछ साथ जा सकता था .
वह पूरी जिंदगी में कभी कमाया भी !?!
सोच के सोचो साथ क्या ले जायेगा ????------
गौ की सेवा ने सदा मानव को गौलोक पहुचाया ---
''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
अहंकार भारत में नहीं टिक सकता क्योकि यहाँ की सनातनी शिक्षा वैदिक-पौराणिक है ..
उदाहरण --
एक डॉक्टर धर्म, कर्म को नहीं मानता था पर उसकी स्त्री बड़ी साधना शील और धर्म परायण थी। डॉक्टर रोज एक बार कहता मैं हजारों लोगों को बचा लेता हूँ, भगवान क्यों आकर नहीं बचा लेता।
उसकी स्त्री तब तो कुछ न बोली पर कुछ समय बाद जब डॉक्टर के बाल सफेद हुए,
स्त्री बोली आपके दाँत टूट गए नये दाँत, नई काली मूँछें कब तक निकलेंगी ?
डॉक्टर साहब कुछ उत्तर न दे सके-जो ज्ञान जीवन का अर्थ न समझा सके निरर्थक है। ''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
ज्ञान का अहंकार जल्द टूटता है ! क्योकि पूर्ण ज्ञानी यहाँ कोई है ही नहीं ----
एक मनुष्य को पढ़-लिख कर अपनी शिक्षा का बहुत घमंड हो गया। वह घर वालों पर रौब जमाया करता मैं बड़ा ज्ञानी हूँ। एक दिन नन्ही सी बालिका एक नन्हा सा कीड़ा लेकर आई बोली-पिताजी इसका क्या नाम है ? उन सज्जन को उस मकोड़े के नाम का ही नहीं पता था। उसे अपने शिक्षा के अहंकार पर बड़ी ग्लानि हुई।
''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
एक मंदीर में रख्खी मूर्ति को अहंकार हो गया ! कहने लगी देखो लोग कितनी दूर-दूर से आ आकर मुझे शीश झुकाते हैं !
अभी मूर्ति अहंकार में फूल ही रही थी कि आकाश बोला-बावरी मनुष्य तुझे शीश नहीं झुकाते इन्हें तो अपनी श्रद्धा को दूर जाकर प्रणाम करने की आदत है।
आकाश फिर बोला अरे मूर्ति ये मानवों के घर पर 33 करोड़ देवो की मूर्ति गाय है उसको समय पर ये चारा तक नहीं देते ये सब स्वार्थी है --
इनको जो कुछ स्वीकार ना करें सिर्फ देता रहे ( देवता ) उसे प्रणाम करने की आदत है !
.''नयाल सनातनी''
जन हित- गौ हित में जारी !
आज जरूर करें गौ-पूजा, गौ-सेवा, एवं गौ-ग्रास दान !
8 फरवरी आज (सोमवार) को देशभर में मौनी अमावस्या मनाई जा रही है । इस बार मौनी व सोमवती अमावस्या का विशेष संयोग बन रहा है। शास्त्रों के अनुसार मौनी व सोमवती अमावस्या के महासंयोग में आपको दान-पुण्य का कई गुना अधिक फल मिलेगा।
गौ दान- गौ हित में दान --- तुरत कल्याण ---
''नयाल सनातनी'' सर्वदलीय गौरक्षा मंच
सनातनी विचार !
एक बन्दर और भालू में दोस्ती थी एक दिन वे दोनों एक साथ कही जा रहे थे। रास्ते में एक कब्रिस्तान मिला। बन्दर एक कब्र के पास जाकर खड़ा हो गया और आँख मूँदकर कुछ स्तुति सी करने लगा। उसका ख्याल था इससे भालू प्रभावित होकर उसकी विद्वता का लोहा मानेगा। पर भालू ने समझा इसे कोई बीमारी हो गई है। सो उसने पूछा-क्यों भाई क्या पेट में दर्द हो गया है ?
बन्दर झुँझला कर बोला-नहीं यार यह मेरे पूर्वजों की समाधि है। मैं उनके ज्ञान, बल, पौरुष की महानता का गुणानुवाद गा रहा था ताकि में भी उनसा ज्ञानी बन सकू ।
बुद्दिमान जामवंत बोले -- महोदय बानर राज गुण गाने से ही नहीं आचरण में लाने से ही कोई महान बन सकता है । बुद्दिमानी आचरण में होनी चाहिए।
''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
शरीर की सभी इन्द्रियाँ आपस में झगड़ रही थी और अपनी-अपनी श्रेष्ठता सिद्ध कर रही थीं। तब आत्मा ( परमात्मा ) बोली तुम सब मेरे इसी शरीर के अंग हो लड़ने की अपेक्षा परस्पर एक दुसरे के हित की बात सोचो तो सबका मंगल होगा।
शरीर की यह कहानी सुन कर ''गुरु देव'' ने कहा-सभी देवता परमात्मा की ही शक्तियाँ हैं उनके छोटे-बड़े के झगड़े में न पड़कर जो उनके आदर्श अपने जीवन में धारण करते हुए उन्हीं की देवाराधन सार्थक होता है। ध्यान रहे गाय में ये सभी देवता एक साथ स्थित है।
''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
मालवी जी का सनातन जबाब !
सोमनाथ लुटा तब भी शंकर भगवान कुछ न कर सके ! फिर भी आप मूर्ति पूजा को महत्त्व देते हैं? एक अर्ध नास्तिक आदमी ने मदन मोहन मालवीय जी से प्रश्न किया ?
मालवीय जी बोले ‘क’ माने कबूतर और ‘ख’ माने खरगोश भी तो नहीं होता फिर भी छोटे बच्चों को यही क्यों पढ़ाया जाता है ? यह तो प्रारम्भिक शिक्षण की विधि है अल्प बुद्धि बच्चे इसी से शिक्षा की ओर आकर्षित होते हैं। मालवीय जी बोले-उपासना और ध्यान की उच्चस्तरीय साधना के लिये इसी प्रकार मूर्ति पूजा भी प्रारम्भिक अनिवार्य आवश्यकता है।
मूर्ति पूजा साधना की ओर आकर्षित करने की एक राह है, मंजिल तो 'ध्यान' में कठोर साधना से अपने इष्ट को प्राप्त करना है।
''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
मानव जीवन का परम लक्ष्य परमात्मा की प्राप्ति है ! अनासक्ति परमात्मा तक ले जाती है आसक्ति शमशान से नरक की ओर !
वासना के उपक्रम में पड़कर महाराज ययाति असमय ही वृद्ध हो गये। उनकी इन्द्रियाँ शिथिल पड़ गई, पर मन में वासना का भूत नहीं उतरा, अतएव वे अपने पुत्रों से यौवन की याचना करने लगे। पहले तीन पुत्रों ने तो इनकार कर दिया पर चौथे पुत्र ने कहा-पिताजी मनुष्य संसार में इन्द्रिय सुख व भोगों के लिए नहीं आत्मोत्थान के लिए आया है। आप मेरा यौवन लेकर अपनी जरा मुझे सहर्ष दे दें। मैं थोड़े से सुख लेकर क्या करूँगा मुझे जीवन लक्ष्य अभीष्ट है सो उसके लिये वृद्ध शरीर से भी काम चल जायेगा।
पुत्र की इस अनासक्ति ने केवल अन्य भाइयों की ही नहीं वरन् ययाति की भी आँखें खोल दीं।
''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
मनुष्य बन गया तो उसे विदा करते हुए विधाता ( ब्रह्मा जी ) ने कहा-तात जाओ और संसार के प्राणियों का हित करते हुए स्वर्ग और मुक्ति का मार्ग करो, पर ऐसा कुछ न करना जिससे तुम्हें मृत्यु के समय पछतावा हो। आदमी ने विनय कि भगवन् आप एक कृपा और करना मुझे मरने से पहले चेतावनी अवश्य दे देना। ताकि यदि मैं मार्ग भ्रष्ट हो रहा होऊँ तो सँभल जाऊँ !
तथास्तु कह कर विधि ( ब्रह्मा जी ) ने मनुष्य को धरती पर भेज दिया। पर यहाँ आकर मनुष्य इन्द्रिय भोगों में पड़ कर अपने लक्ष्य को भूल गया। जैसे-तैसे आयु समाप्त हुई कर्मों के अनुसार यमदूत उसे नरक ले जाने लगे तो उसने विधाता से शिकायत की आपने मुझे मृत्यु के पूर्व चेतावनी क्यों नहीं दी ??
विधाता हँसे और बोले --
(१) तेरे हाथ काँपे , (२) दाँत टूट गये, (३) आँखों से कम दिखने लगा, (४) बाल पक गये चार संकेत देने पर भी तू न सम्भला तो इसमें मेरा क्या दोष ?
अब पछताये होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत !
''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
धन शांति नहीं साधन दे सकता है !
एक शहर में दो पड़ोसी थे - एक ईमानदार और ईश्वर भक्त, दूसरा छल-कपट से धन कमाता और खूब सांसारिक सुख भोगता। पहला आदमी यह देखकर दिन भर ईर्ष्या से कुढ़ता रहता। एक दिन वह भगवान् से जाकर बोला-प्रभु आपसे जो कुछ माँगा धन, सम्पत्ति, स्त्री, पुत्र सब कुछ मिला फिर भी सुखी नहीं हो पाया सो क्यों ?
भगवान् हँसे और बोले इसलिए कि तू भी वही चाहता है जो कोई भी सांसारिक सुखों में आसक्त चाहता है। अब तू आत्म सुख, आत्म-शान्ति की कामना कर उसी से सुख मिलेगा। धन सम्पत्ति से नहीं।
''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
आपका आचरण ही आपकी पूजा करता है !
एक सुन्दर तालाब के किनारे खुबसुरत फूल से ईर्ष्या वस पत्थर गुस्से से बोला-फूल जानता नहीं तुझे अभी पीस कर रख दूँगा।
फूल मुस्कराया और बोला-तब तो आप बड़े उपकारी हैं, मुझे कुचल कर आप मेरी सुगन्ध और भी दूर-दूर तक फैलाने में ही सहायक होंगे। पत्थर अपनी अकड़ पर बड़ा लज्जित हुआ और अनुभव किया कि फूल का जीवन ही सच्चा और सार्थक है। हम उनका धन्यबाद करते है जिन्होंने हमें कुचलने के लिए साजिस रची थी।
''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
सनातन धर्म ही वह महा सागर है जिसमे सभी मत-धर्म-संप्रदाय समा जाते है !
बूँद सागर में घुलने लगी तो उसे अपना अस्तित्व समाप्त होने का बड़ा दुःख हुआ। सागर ने समझाया-बेटी तुम्हारी जैसी असंख्य बूँदों का ही तो मैं सम्मिलित रूप हूँ। यहाँ तो तुम लघुतम में विराटतम की अनुभूति करोगी। बूँद को यह सब अच्छा नहीं लगा बूँद फिर जमीन से नदी में होती हुई सागर में पहुँची तो बड़ी पछतायी और समझ गई कि अपने उद्गम में लीन होना ही सच्ची शान्ति सच्चा जीवन लक्ष्य है।
''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
संसार में रहकर भी आप विरक्त हो सकते है विदेह हो सकते है !
एक साधु कह रहे थे यह संसार मिथ्या है, स्त्री, पुत्री छोड़ कर आत्म कल्याण की बात सोचनी चाहिए। जंगल की ओर चलना चाहिए। एक बालक ने पूछा-महात्मन् मैं कौन हूँ-साधु बोले-आत्मा। अच्छा तो अब यह बताइये लड़के ने पूछा- मेरी माँ मेरी सेवा सहायता करती है, मेरे हित की बात सोचती है क्या वह आत्म-कल्याण न हुआ ?
प्रवचन करता साधु को कोई उत्तर देते न बना। उनको समझ आ गया संसार खराब नहीं अपना दृष्टिकोण खराब होता है। उसे ठीक कर लिया जाये तो समाज में रहकर ही मुक्ति का आनन्द लिया जा सकता है।
''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
जहाँ आपसी प्रेम है वही स्वर्ग है !
मनुष्यों के व्यवहार में क्रुद्ध होकर देवताओं ने दुर्भिक्ष को भेजा। दुर्भिक्ष धरती में आकर एक स्थान पर छुपकर देखने लगा यहाँ के लोग आखिर किस तरह खराब हैं। तभी वहाँ एक परिवार आकर रुका। खाने के लिये उन्होंने रोटियाँ निकाली। रोटी एक ही थी। पत्नी ने रोटी पति को देते हुए कहा-आप खा लीजिए मुझे तो भूख नहीं है। पति ने पुत्री को देते हुए कहा-बेटी तू खा ले मैंने तो पानी पीकर पेट भर लिया। तभी वहाँ एक अपंग दिखाई दिया लड़की ने रोटी उसे देते हुए कहा-भाई तुम बहुत भूखे दिखाई देते हो लो रोटी खा लो। दुर्भिक्ष यह देखकर चुपचाप लौटकर देवताओं के पास जाकर बोला आप लोगों ने मुझे भूल से स्वर्ग भेज दिया था। देवता कहने जा रहे थे कि वही मृत्युलोक है पर तभी विधाता बोल पड़े-सचमुच तात ! जहाँ लोग प्रेम पूर्वक रहें स्वर्ग वहीं रहता है।
''नयाल सनातनी''