सनातनी विचार !
मनुष्य बन गया तो उसे विदा करते हुए विधाता ( ब्रह्मा जी ) ने कहा-तात जाओ और संसार के प्राणियों का हित करते हुए स्वर्ग और मुक्ति का मार्ग करो, पर ऐसा कुछ न करना जिससे तुम्हें मृत्यु के समय पछतावा हो। आदमी ने विनय कि भगवन् आप एक कृपा और करना मुझे मरने से पहले चेतावनी अवश्य दे देना। ताकि यदि मैं मार्ग भ्रष्ट हो रहा होऊँ तो सँभल जाऊँ !
तथास्तु कह कर विधि ( ब्रह्मा जी ) ने मनुष्य को धरती पर भेज दिया। पर यहाँ आकर मनुष्य इन्द्रिय भोगों में पड़ कर अपने लक्ष्य को भूल गया। जैसे-तैसे आयु समाप्त हुई कर्मों के अनुसार यमदूत उसे नरक ले जाने लगे तो उसने विधाता से शिकायत की आपने मुझे मृत्यु के पूर्व चेतावनी क्यों नहीं दी ??
विधाता हँसे और बोले --
(१) तेरे हाथ काँपे , (२) दाँत टूट गये, (३) आँखों से कम दिखने लगा, (४) बाल पक गये चार संकेत देने पर भी तू न सम्भला तो इसमें मेरा क्या दोष ?
अब पछताये होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत !
''नयाल सनातनी''
मनुष्य बन गया तो उसे विदा करते हुए विधाता ( ब्रह्मा जी ) ने कहा-तात जाओ और संसार के प्राणियों का हित करते हुए स्वर्ग और मुक्ति का मार्ग करो, पर ऐसा कुछ न करना जिससे तुम्हें मृत्यु के समय पछतावा हो। आदमी ने विनय कि भगवन् आप एक कृपा और करना मुझे मरने से पहले चेतावनी अवश्य दे देना। ताकि यदि मैं मार्ग भ्रष्ट हो रहा होऊँ तो सँभल जाऊँ !
तथास्तु कह कर विधि ( ब्रह्मा जी ) ने मनुष्य को धरती पर भेज दिया। पर यहाँ आकर मनुष्य इन्द्रिय भोगों में पड़ कर अपने लक्ष्य को भूल गया। जैसे-तैसे आयु समाप्त हुई कर्मों के अनुसार यमदूत उसे नरक ले जाने लगे तो उसने विधाता से शिकायत की आपने मुझे मृत्यु के पूर्व चेतावनी क्यों नहीं दी ??
विधाता हँसे और बोले --
(१) तेरे हाथ काँपे , (२) दाँत टूट गये, (३) आँखों से कम दिखने लगा, (४) बाल पक गये चार संकेत देने पर भी तू न सम्भला तो इसमें मेरा क्या दोष ?
अब पछताये होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत !
''नयाल सनातनी''
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