Thursday, February 11, 2016

सनातनी विचार !
सनातन सत्य वचन !
आशा तजि माया तजै, मोह तजै अरू मान।
हरष शोक निन्दा तजै, कहैं कबीर सन्त जान॥
कबीरदास जी कहते है कि जिस व्यक्ति ने आशाओं का त्याग कर दिया। संसार के माया मोह में नाता तोड़ लिया और मान और अपमान की भावना का त्याग कर दिया। किसी वस्तु की प्राप्ती पर प्रसन्नता व्यक्त करना अथवा कोई हानि होने पर दुखी होना छोड़ दिया। निन्दा और ईर्ष्या से दूर हो गये। ऐसे मानव को भेष कैसा भी पूर्ण सन्त जानो।

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