सनातनी विचार !
ज्ञान का अहंकार जल्द टूटता है ! क्योकि पूर्ण ज्ञानी यहाँ कोई है ही नहीं ----
एक मनुष्य को पढ़-लिख कर अपनी शिक्षा का बहुत घमंड हो गया। वह घर वालों पर रौब जमाया करता मैं बड़ा ज्ञानी हूँ। एक दिन नन्ही सी बालिका एक नन्हा सा कीड़ा लेकर आई बोली-पिताजी इसका क्या नाम है ? उन सज्जन को उस मकोड़े के नाम का ही नहीं पता था। उसे अपने शिक्षा के अहंकार पर बड़ी ग्लानि हुई।
''नयाल सनातनी''
ज्ञान का अहंकार जल्द टूटता है ! क्योकि पूर्ण ज्ञानी यहाँ कोई है ही नहीं ----
एक मनुष्य को पढ़-लिख कर अपनी शिक्षा का बहुत घमंड हो गया। वह घर वालों पर रौब जमाया करता मैं बड़ा ज्ञानी हूँ। एक दिन नन्ही सी बालिका एक नन्हा सा कीड़ा लेकर आई बोली-पिताजी इसका क्या नाम है ? उन सज्जन को उस मकोड़े के नाम का ही नहीं पता था। उसे अपने शिक्षा के अहंकार पर बड़ी ग्लानि हुई।
''नयाल सनातनी''
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