सनातनी विचार !
आपका आचरण ही आपकी पूजा करता है !
एक सुन्दर तालाब के किनारे खुबसुरत फूल से ईर्ष्या वस पत्थर गुस्से से बोला-फूल जानता नहीं तुझे अभी पीस कर रख दूँगा।
फूल मुस्कराया और बोला-तब तो आप बड़े उपकारी हैं, मुझे कुचल कर आप मेरी सुगन्ध और भी दूर-दूर तक फैलाने में ही सहायक होंगे। पत्थर अपनी अकड़ पर बड़ा लज्जित हुआ और अनुभव किया कि फूल का जीवन ही सच्चा और सार्थक है। हम उनका धन्यबाद करते है जिन्होंने हमें कुचलने के लिए साजिस रची थी।
''नयाल सनातनी''
आपका आचरण ही आपकी पूजा करता है !
एक सुन्दर तालाब के किनारे खुबसुरत फूल से ईर्ष्या वस पत्थर गुस्से से बोला-फूल जानता नहीं तुझे अभी पीस कर रख दूँगा।
फूल मुस्कराया और बोला-तब तो आप बड़े उपकारी हैं, मुझे कुचल कर आप मेरी सुगन्ध और भी दूर-दूर तक फैलाने में ही सहायक होंगे। पत्थर अपनी अकड़ पर बड़ा लज्जित हुआ और अनुभव किया कि फूल का जीवन ही सच्चा और सार्थक है। हम उनका धन्यबाद करते है जिन्होंने हमें कुचलने के लिए साजिस रची थी।
''नयाल सनातनी''
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