Thursday, February 11, 2016

सनातनी विचार !
यमराज कहते है ! जो पुरुष अपने वर्णधर्म से विचलित नहीं होता, अपने सुहृदय और विपक्षियों में समान भाव रखता है, किसी का धन हरण नहीं करता, न किसी जीव को कष्ट ही पहुचता है, गौ-माता में 33 करोड़ देवी-देवताओं की परिकल्पना करते हुए उनकी सेवा रक्षा का प्रयास करता है .
उस अत्यंत रागादिशून्य और निर्मल मन व्यक्ति को भगवान नारायण का भक्त जानो और उसको प्रणाम करने का फल भी श्रीमन-नारायण के प्रणाम के फल सामान ही जानो ------
''विष्णु पुराण से''
''नयाल सनातनी''
!! श्री गिरधर गोपाल गौशाला समिति, देव भूमि, उत्तराखण्ड !!

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