Thursday, February 11, 2016

सनातनी विचार !
शरीर की सभी इन्द्रियाँ आपस में झगड़ रही थी और अपनी-अपनी श्रेष्ठता सिद्ध कर रही थीं। तब आत्मा ( परमात्मा ) बोली तुम सब मेरे इसी शरीर के अंग हो लड़ने की अपेक्षा परस्पर एक दुसरे के हित की बात सोचो तो सबका मंगल होगा।
शरीर की यह कहानी सुन कर ''गुरु देव'' ने कहा-सभी देवता परमात्मा की ही शक्तियाँ हैं उनके छोटे-बड़े के झगड़े में न पड़कर जो उनके आदर्श अपने जीवन में धारण करते हुए उन्हीं की देवाराधन सार्थक होता है। ध्यान रहे गाय में ये सभी देवता एक साथ स्थित है।
''नयाल सनातनी''

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