Thursday, February 11, 2016

सनातनी विचार !
मालवी जी का सनातन जबाब !
सोमनाथ लुटा तब भी शंकर भगवान कुछ न कर सके ! फिर भी आप मूर्ति पूजा को महत्त्व देते हैं? एक अर्ध नास्तिक आदमी ने मदन मोहन मालवीय जी से प्रश्न किया ?
मालवीय जी बोले ‘क’ माने कबूतर और ‘ख’ माने खरगोश भी तो नहीं होता फिर भी छोटे बच्चों को यही क्यों पढ़ाया जाता है ? यह तो प्रारम्भिक शिक्षण की विधि है अल्प बुद्धि बच्चे इसी से शिक्षा की ओर आकर्षित होते हैं। मालवीय जी बोले-उपासना और ध्यान की उच्चस्तरीय साधना के लिये इसी प्रकार मूर्ति पूजा भी प्रारम्भिक अनिवार्य आवश्यकता है।
मूर्ति पूजा साधना की ओर आकर्षित करने की एक राह है, मंजिल तो 'ध्यान' में कठोर साधना से अपने इष्ट को प्राप्त करना है।
''नयाल सनातनी''

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