सनातनी विचार !
जो व्यापारी अपने दुकान पर शुद्द देशी घी से बनी देवतोओं के भोग हेतु मिठाई या बाल भोग लिख कर गाय के घी के वजाय अर्थ लाभ हेतु चर्वी वाला घी में भगवान का भोग बेचता हैं वह अपने साथ अपने कई आगे और पीछे की पीढीयों को नरक मे ले जाता हैं . क्योंकी सनातन शास्त्रों के अनुसार भगवान के भोले-भाले भक्तों को धोखा भगवान को धोखा देने से भी बडा अर्धम हैं .
''नयाल सनातनी"
जो व्यापारी अपने दुकान पर शुद्द देशी घी से बनी देवतोओं के भोग हेतु मिठाई या बाल भोग लिख कर गाय के घी के वजाय अर्थ लाभ हेतु चर्वी वाला घी में भगवान का भोग बेचता हैं वह अपने साथ अपने कई आगे और पीछे की पीढीयों को नरक मे ले जाता हैं . क्योंकी सनातन शास्त्रों के अनुसार भगवान के भोले-भाले भक्तों को धोखा भगवान को धोखा देने से भी बडा अर्धम हैं .
''नयाल सनातनी"
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