Thursday, February 11, 2016

सनातनी विचार !
एक बन्दर और भालू में दोस्ती थी एक दिन वे दोनों एक साथ कही जा रहे थे। रास्ते में एक कब्रिस्तान मिला। बन्दर एक कब्र के पास जाकर खड़ा हो गया और आँख मूँदकर कुछ स्तुति सी करने लगा। उसका ख्याल था इससे भालू प्रभावित होकर उसकी विद्वता का लोहा मानेगा। पर भालू ने समझा इसे कोई बीमारी हो गई है। सो उसने पूछा-क्यों भाई क्या पेट में दर्द हो गया है ?
बन्दर झुँझला कर बोला-नहीं यार यह मेरे पूर्वजों की समाधि है। मैं उनके ज्ञान, बल, पौरुष की महानता का गुणानुवाद गा रहा था ताकि में भी उनसा ज्ञानी बन सकू ।
बुद्दिमान जामवंत बोले -- महोदय बानर राज गुण गाने से ही नहीं आचरण में लाने से ही कोई महान बन सकता है । बुद्दिमानी आचरण में होनी चाहिए।
''नयाल सनातनी''

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