सनातनी विचार !
सम्पूर्ण राज्य पर अधिकार, मंत्रीगण कर्तव्य परायण, पदाधिकारी आज्ञाकारी,चतुरंगणी सेना (हाथी, घोड़े, रथ और पैदल) समस्त वीर सैनिक ( जल सेना, थल सेना, वायु सेना, ) सब अधिकार क्षेत्र में और सब पर नियंत्रण पर अपनी इन्द्रियों पर नियंत्रण नहीं ! तो राजा नष्ट हो सकता है। अपनी इन्द्रियों पर विजय पाकर देश हित ( प्रजा हित ) में कार्य करने वाला 'राजा' ही सदा विश्व विजेता बनता है।
''नयाल सनातनी''
सम्पूर्ण राज्य पर अधिकार, मंत्रीगण कर्तव्य परायण, पदाधिकारी आज्ञाकारी,चतुरंगणी सेना (हाथी, घोड़े, रथ और पैदल) समस्त वीर सैनिक ( जल सेना, थल सेना, वायु सेना, ) सब अधिकार क्षेत्र में और सब पर नियंत्रण पर अपनी इन्द्रियों पर नियंत्रण नहीं ! तो राजा नष्ट हो सकता है। अपनी इन्द्रियों पर विजय पाकर देश हित ( प्रजा हित ) में कार्य करने वाला 'राजा' ही सदा विश्व विजेता बनता है।
''नयाल सनातनी''
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