सनातनी विचार !
सनातन धर्म ही वह महा सागर है जिसमे सभी मत-धर्म-संप्रदाय समा जाते है !
बूँद सागर में घुलने लगी तो उसे अपना अस्तित्व समाप्त होने का बड़ा दुःख हुआ। सागर ने समझाया-बेटी तुम्हारी जैसी असंख्य बूँदों का ही तो मैं सम्मिलित रूप हूँ। यहाँ तो तुम लघुतम में विराटतम की अनुभूति करोगी। बूँद को यह सब अच्छा नहीं लगा बूँद फिर जमीन से नदी में होती हुई सागर में पहुँची तो बड़ी पछतायी और समझ गई कि अपने उद्गम में लीन होना ही सच्ची शान्ति सच्चा जीवन लक्ष्य है।
''नयाल सनातनी''
सनातन धर्म ही वह महा सागर है जिसमे सभी मत-धर्म-संप्रदाय समा जाते है !
बूँद सागर में घुलने लगी तो उसे अपना अस्तित्व समाप्त होने का बड़ा दुःख हुआ। सागर ने समझाया-बेटी तुम्हारी जैसी असंख्य बूँदों का ही तो मैं सम्मिलित रूप हूँ। यहाँ तो तुम लघुतम में विराटतम की अनुभूति करोगी। बूँद को यह सब अच्छा नहीं लगा बूँद फिर जमीन से नदी में होती हुई सागर में पहुँची तो बड़ी पछतायी और समझ गई कि अपने उद्गम में लीन होना ही सच्ची शान्ति सच्चा जीवन लक्ष्य है।
''नयाल सनातनी''
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