सनातनी विचार !
दीन-दुनिया की परवाह ना करके अहंकार शून्य होकर जो मानव इस कलिकाल में गौमाता की सेवा-रक्षा और प्रचार का कार्य तन-मन-धन से करता है ! उसके प्रतेक कदम- कदम पर एक-एक यज्ञं का पुण्य फल नौछावर होते रहतें है, गौमाता के कृपा प्रसाद से। गौ सेवक अगर कोई यज्ञं-पूजा-पाठ-तीर्थ स्नान- पुराण पठन आदि नहीं कर सकें तो भी ! उसके द्वारा सच्चे ह्रदय से की गई ''गौ-सेवा'' के पुण्यों से ही वह अपने परिवार के कई पीढ़ी आगे और पीछे के पितरों के साथ गौलोक का अधिकारी बन जाता है। यही सनातन सत्य है।
''नयाल सनातनी'' सर्वदलीय गौरक्षा मंच
दीन-दुनिया की परवाह ना करके अहंकार शून्य होकर जो मानव इस कलिकाल में गौमाता की सेवा-रक्षा और प्रचार का कार्य तन-मन-धन से करता है ! उसके प्रतेक कदम- कदम पर एक-एक यज्ञं का पुण्य फल नौछावर होते रहतें है, गौमाता के कृपा प्रसाद से। गौ सेवक अगर कोई यज्ञं-पूजा-पाठ-तीर्थ स्नान- पुराण पठन आदि नहीं कर सकें तो भी ! उसके द्वारा सच्चे ह्रदय से की गई ''गौ-सेवा'' के पुण्यों से ही वह अपने परिवार के कई पीढ़ी आगे और पीछे के पितरों के साथ गौलोक का अधिकारी बन जाता है। यही सनातन सत्य है।
''नयाल सनातनी'' सर्वदलीय गौरक्षा मंच
No comments:
Post a Comment