सनातनी विचार !
भगवान की ---
पंचोपचार (5 प्रकार)
दशोपचार (10 प्रकार)
षोडशोपचार (16 प्रकार)
द्वात्रिशोपचार (32 प्रकार)
चतुषष्टि प्रकार (64 प्रकार)
एकोद्वात्रिंशोपचार (132 प्रकार) और भी अनेक प्रकार पूजा विधि हो सकती है .पर सबसे सरल उपाय है भगवान को देखने का उनको महसूस करने का ध्यान में आप बैठ जाए .परमात्मा को अपने अंदर महसूस करें .अपने स्वासों को आता-जाता देखे, महसूस करें कुछ समय बाद आपको अतुलीनीय आनन्द की प्राप्ति होने लगेगी . जिस तरह इस मंदिर के दरवाजे पर ताला लगा हुआ है जब खुलेगा तब ही देव दर्शन होंगे .उसी प्रकार हमारे आत्मा के दरवाजे पर भी ताला लगा है जब ध्यान करंगे तभी परमात्मा के दर्शन होंगे . और कोई उपाय है ही नहीं परमात्मा तक पहुचाने का, परमात्मा को महसूस करने का -----
''नयाल सनातनी''.संस्थापक अध्यक्ष ;--सर्वदलीय गौरक्षा मंच
भगवान की ---
पंचोपचार (5 प्रकार)
दशोपचार (10 प्रकार)
षोडशोपचार (16 प्रकार)
द्वात्रिशोपचार (32 प्रकार)
चतुषष्टि प्रकार (64 प्रकार)
एकोद्वात्रिंशोपचार (132 प्रकार) और भी अनेक प्रकार पूजा विधि हो सकती है .पर सबसे सरल उपाय है भगवान को देखने का उनको महसूस करने का ध्यान में आप बैठ जाए .परमात्मा को अपने अंदर महसूस करें .अपने स्वासों को आता-जाता देखे, महसूस करें कुछ समय बाद आपको अतुलीनीय आनन्द की प्राप्ति होने लगेगी . जिस तरह इस मंदिर के दरवाजे पर ताला लगा हुआ है जब खुलेगा तब ही देव दर्शन होंगे .उसी प्रकार हमारे आत्मा के दरवाजे पर भी ताला लगा है जब ध्यान करंगे तभी परमात्मा के दर्शन होंगे . और कोई उपाय है ही नहीं परमात्मा तक पहुचाने का, परमात्मा को महसूस करने का -----
''नयाल सनातनी''.संस्थापक अध्यक्ष ;--सर्वदलीय गौरक्षा मंच
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