Thursday, February 11, 2016

सनातनी विचार !
धन शांति नहीं साधन दे सकता है !
एक शहर में दो पड़ोसी थे - एक ईमानदार और ईश्वर भक्त, दूसरा छल-कपट से धन कमाता और खूब सांसारिक सुख भोगता। पहला आदमी यह देखकर दिन भर ईर्ष्या से कुढ़ता रहता। एक दिन वह भगवान् से जाकर बोला-प्रभु आपसे जो कुछ माँगा धन, सम्पत्ति, स्त्री, पुत्र सब कुछ मिला फिर भी सुखी नहीं हो पाया सो क्यों ?
भगवान् हँसे और बोले इसलिए कि तू भी वही चाहता है जो कोई भी सांसारिक सुखों में आसक्त चाहता है। अब तू आत्म सुख, आत्म-शान्ति की कामना कर उसी से सुख मिलेगा। धन सम्पत्ति से नहीं।
''नयाल सनातनी''

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