Tuesday, December 30, 2014

सनातनी विचार !
जो महर्षि मनु की सन्तान मनुष्य ( मानव ) अपनी सारी जिन्दगी ज्ञान प्राप्ति और उसके बाद ज्ञान बाटने में लगा देता है , मूल सनातन धर्म के अनुसार उसकी कभी मृत्यु नहीं होती। वह परलोक गमन के बाद भी किताबो के माध्यम से सदा जीवित बना रहता है। जैसे स्वामी करपात्री जी महाराज,भाई श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार, स्वामी विवेकानंद, स्वातंत्रत वीर सावरकर आदि
 ''नयाल सनातनी''

Monday, December 29, 2014

सनातनी विचार !
व्यक्ति चाहे पूरा गेरुवे रंग में रंग जाये, वैराग्य अपना ले, तांत्रिक कालनेमि की तरह काले कपड़ो के साथ तंत्र-मन्त्र की अनेको अंगूठी पहन ले,चाहे जितना कर्म-कांड करें ,दिन-रात भक्ति में डूबा रहे, तो भी अगर ईर्ष्या, अहंकार- अहंभाव, ममत्व को नहीं छोड़ता तब तक उसे ज्ञान की प्राप्ति नहीं हो सकती ना ही सत मार्ग पर ले जाने वाले ज्ञानी गुरु के दर्शन होंगे।
                       ''नयाल सनातनी''  
सनातनी विचार !
जब आप एकनिष्ठ होकर किसी सतकर्म को करने लगते है। तो आप में सब कुछ करने की शक्ति का संचार होने लगता है। और जब आप पूर्ण सफल होने ही वाले होते है। तब सबसे पहले इंद्र आदि देवता आपकी परीक्षा हेतु आसुरी शक्तियों की सहायता से आपके राह की रूकावट बन जाते है। आप पर अनेक आरोप -प्रत्यारोपो का दौर चल पड़ता है,आप घबरा कर उस राह को छोड़ देते हो या परिवार और समाज छुडवा देता है। पर सत्य संकल्प का व्यक्ति कभी सत-मार्ग  नहीं छोड़ता भले दुनिया को लगे यह रुक गया वह आखिर तक प्रयत्न नहीं छोड़ता और अंत में विजयी होता है।
                           ''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
सनातन धर्म में बड़े उचे खजूर के पेड़ की बजाय उपयोगी तुलसी का छोटा पोधा पूजा जाता है। धनवान की उसके धन रसूक के कारण आदर करो ना करो पर उदार मन वाले का आदर होना ही चाहिए। सूर्य की कद्र अत्यधिक उचाई में होने के कारण नहीं बल्किन उदार मन से नियमित संसार की सेवा में रत रहने के कारण होती है।
                    ''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
जब आपका समय बुरा हो,बिपत्ति ने चारो ओर से घेरा हो उस वक्त अपनों और मित्रो से कोई मदद मत मांगों। कही इनकी एक हलकी मुश्कराहट, या एक तंज आपके दुःख को दुगुना ना कर दें। ऐसे वक्त सिर्फ परमात्मा को ही अपना सच्चा मित्र, हितैसी जान प्रार्थना करो। प्रार्थना में बड़ी शक्ति है।
                                 ''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
सावधान दुःख-विप्पति किसी पर भी आ सकती है, दुसरो के दुःख-विपत्ति में दया दिखा कर या दुखी मनुष्य का साहस बढ़ा कर आप आने वाले दुःखो से छूट जाओगे। और जो दुखी मनुष्य की अवगणना करता है या उस पर हर्ष मनाता है , वह कभी न कभी स्वयं उस दुःख में जा पड़ता है। कुदरत का नियम है जो बोया वह काटना पड़ेगा।
  ''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
   अपने पर विजय प्राप्त करना ही असली विजय है जिसने अपने पर, अपने तन-मन, पर अपने व्योहार पर विजय पा ली समझो उसके लिए संसार पर विजय पाना कठिन नहीं। मन के जीते जीत है मन के हारे हार। आत्म विजेता ही इस संसार से विजय होकर उस लोक की विजय यात्रा पर निकलता है। जहाँ अनेको ब्रह्मांडो का विजयी परमात्मा का निवास है। 
                                  ''नयाल सनातनी'' 
सनातनी विचार !
  तुम्हारे ह्रदय के मंदिर में बैठा सच्चा मन ही बता सकता है की तुम अच्छा और पवित्र कार्य में रत हो। जब मन-आत्मा गवाही दे रहा है तो दुनिया लाख खुदगर्ज, मतलब-परस्त होने का दोषारोपण करें तो परवाह ना करो।  अच्चा और सच्चा कार्य करते रहों। क्योकि सच्चा मन-आत्मा ही परमात्मा है।और परमात्मा कभी गलत राह नहीं दिखातें। 
                                ''नयाल सनातनी'' 
सनातनी विचार !
  तुम्हारे ह्रदय के मंदिर में बैठा सच्चा मन ही बता सकता है की तुम अच्छा और पवित्र कार्य में रत हो। जब मन-आत्मा गवाही दे रहा है तो दुनिया लाख खुदगर्ज, मतलब-परस्त होने का दोषारोपण करें तो परवाह ना करो।  अच्चा और सच्चा कार्य करते राहों। क्योकि सच्चा मन-आत्मा ही परमात्मा है। और परमात्मा कभी गलत राह नहीं दिखातें। 
                                ''नयाल सनातनी'' 
सनातनी विचार !
जिन्होंने दुनिया को बदलने की ठानी है वे खुद बदल गए ये दुनिया को बदलना बहुत कठिन है।  भगवान राम को भी इस दुनिया को बदलने से पहले 14 वर्ष वन - वन भटकना पड़ा तब जा के कही ''राम-राज्य'' आया यानि बदलाव आया। अगर आप में वह सामर्थ्य है जो राम जैसा जीवन जी सको सारी मर्यादाओं का पालन कर सको तो आप भी दुनिया को बदल सकते है। पर कमजोर संकल्प वालो के बस की बात नहीं दुनिया बदलना।
                                        ''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
श्री रामचरित मानस बाल कांड १४२ सो० के अगले चौपाई के अनुसार --
आये मिलन सिद्द मुनि ज्ञानी,धरमधुरंधर नृपऋषि ज्ञानी। 
 जब सम्पूर्ण पृथ्वी जलमग्न हो गई मानव रूप में सिर्फ मनु ही बचे तो महर्षि मनु ने ही मानव जाति की फिर से उत्पति की इस लिए  राजर्षि मनु ही पूरी मानव जाती के जन्म दाता यानि पिता है . और राजर्षि का मतलब क्षत्रिय राजा फिर ब्राहमण क्षत्रिय से श्रेष्ठ कैसे ? क्या पिता से पुत्र श्रेष्ठ होता है ? अगर सब एक ही पिता की संतान है तो फिर कुछ ब्राहमणों द्वारा श्रेष्ठता का जगतीय व्योहार क्यों ?
 कुछ विद्द्वानो के अनुसार ! अगर ब्राहमण ब्रह्मा के मुख से उत्पन्न है तो वे मृत्य लोक में क्या कर रहे है ? जबकि अनेक ब्रह्मा के मानस पुत्र ऋषि लोक या ब्रह्म लोक में निवास करते है। ‘’नयाल सनातनी’’

Sunday, December 28, 2014


सनातनी विचार !
 देने वाला सदा उचे पद का अधिकारी होता है . और लेने वाला ( मांगने वाला ) सदा निचे स्थान प्राप्त करता है . उच्च पद पाने हेतु सदा देने की आदत डालना चाहिए . देवताओं की उचे स्थान पर पूजा-आराधना इसलिए होती है क्योकि देवता सदा देते रहते है . सूर्य अन्धकार से निकाल कर प्रकाश देते है, इसलिए उनको सूर्य देवता कहते है .
‘’नयाल सनातनी’’
सनातनी विचार !
ज्ञानी वह जो परमात्मा के गुणों का बखान करे , ज्ञानी वह जो यह समझ गया की वही परमतत्व ही सब कर्ता-धर्ता है जो एक छोटे से बीज से विशाल काय पेड़ की उत्पति का कारक है। जो कल-कल बहती निर्मल नदियों का कारक है और समुन्द्र के रूप में सब का पति है , जो हरे पेड़ में लाल, नीले, पीले फूल उगा रहा है। ज्ञानी वह है जो संसार को नहीं परमात्मा की लगन लगाये है। ज्ञानी वह नहीं जो अपने और अपने गुरु के ज्ञान का बखान में लगा रहे। ज्ञानी वह है जो यह जान चुका की मेरे और गुरु के अन्दर ज्ञान के रूप में कोन बोल रहा है ?
                                                    ''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
एक पेड़ लगाने का मतलब लाखों निराश्रय जीव-जंतु ,पशु-पक्षी को आसरा देना। मानव के लिए घाम-बारिशा में बचाव का साधन करना,अनेको पुण्यों का अर्जन करना। और एक हरा-भरा पेड़ काटने का मतलब इन सबके साथ धोखा कर पाप की राह पकड़ना। एक हरा- भरा पेड़ अपने जीवन काल में करोडो लोगो को आक्सीजन देकर जीवन दान देता है। और हरा-भरा पेड़ काटने वाला इन सब लोगो का गुनाहगार बन जाता है।
       ''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
जो मनुष्य खेतों से अनाज प्राप्त करने के बाद खेतों को आग के हवाले कर देते है। वे महान पाप के भागी होते है। क्योकि वे अविवेकी मनुष्य लाखों जीव-जंतुओं के हत्या एवं भोजन-निवाला छिनने के कारक बनते है खेतों और जंगलों में आग लगाने के कारण लाखों पशु-पक्षी अपना हक़ से बंचित हो जाते है।
 ''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
 मानव जीवन में ही परमात्मा की प्राप्ति हो सकती है ! ईश्वर कृपा से मानव को विवेक की प्राप्ति है। और विवेक ही परमात्मा के द्वार तक ले जाने वाली चेतना शक्ति है। और विवेकी अहंकारी नहीं समर्पित होता है। जो फूल की तरह समर्पित हो गया वह भगवान को स्वीकार हो गया।
                      ''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
गुरु वह नहीं है जो शिष्य का धन हरण करे ! वह तो ठग है। सच्चा गुरु तो वह है जो शिष्य का अज्ञान हर लें, और शिष्य के ह्रदय में परमात्मा की ओर ले जाने वाली ज्योति जला  दें। ''नयाल सनातनी''

Friday, December 26, 2014

सनातनी विचार !
  सावधान -- सतकर्म हो या दुष्कर्म फल समय आने पर जरूर मिलता है। जिस तरह लाखों रुपये से लगाई गई फैक्ट्री सही दिशा में मेहनत न करने पर खाक हो सकती है और मेहनत करने पर करोड़पति बना देती है। वैसे ही सत-कर्म और दुष्कर्म का चक्र है। सतकर्म स्वर्ग और दुष्कर्म नर्क की राह दिखाता ही है।
                                         ''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
कभी-कभी आपके द्वारा तेजी से किये जा रहे सत-कर्म की राह में अचानक वे लोग विघ्न पैदा कर देते है, जिनको आप वर्तमान में जानते तक नहीं ! पर यह ना समझो की वे किसी के द्वारा भेजे गए विघ्नकारक दूत है, ये तो आपके पूर्व के अज्ञानता में किये गए दुष्कर्म है।  जो अब आपको सतमार्ग की राह में सावधान करने फिर सामने खड़े है। और आगे के लिए आपको निष्पाप बनाने आये है। यह जानियें ये आपके हितचिंतक ही है। 
    ''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
ब्राह्मण वाद ब्राहमणों के ज्ञान पर नहीं बल्किन सनातन शास्त्र ना पड़ने वाले मूल सनातन धर्म की राह से भटके लोगो के अज्ञान पर टिका है। जिस दिन साधारण मनुष्य भी सनातन वेद-शास्त्रों का मनन करने लग जायेगा उसी दिन ब्राहमण वाद , क्षत्रिय वाद आदि सारे वाद-विवाद ख़त्म हो जायेगा।
फिर सिर्फ मानवता वाद चलेगा जो सम्पूर्ण मानव जाति के लिए सुखद है। 
                                               ''नयाल सनातनी''

Wednesday, December 24, 2014

सनातनी विचार !
 जो मनुष्य सकल ब्रह्माण्ड की अधिष्ठात्री देवी गौ-माता से प्राप्त पञ्च-गव्यों के इस्तेमाल से ही संतुष्ट हो उन्ही का दोहन कर धन-यस कमा लिया और संतुष्ट हो गया . उस व्यक्ति को सायद ही बैतरणी पर गौमाता पार लगाने आये ! क्योकि उस व्यक्ति ने गौ-माता की असली महिमा को तो जाना ही नहीं आखिर गौमाता का प्राकट्य क्यों हुआ इस मृत्य लोक में ?
जबकि गौ-माता को तो भगवान ने बिना जाति-वर्ण-धर्म का विचार करे सच्चे सेवक को मोक्ष देने की शक्ति प्रदान की है .
‘’नयाल सनातनी’’

Wednesday, December 17, 2014

सनातनी विचार !
  हम सब मानव जाती नित्य अपनी मर्यादाओं का उलंघन करते रहते है। सोचा है एक भी दिन अगर भगवान सूर्य नारयण ने अपनी मर्यादा का थोडा भी उलंघन किया ( अपने स्थान से थोडा निचे खिसके से ) तो पूरा विश्व जल कर ख़ाक हो जायेगा। सावधन मर्यादाओं का उलंघन मानव जाति को पतन की ओर ले जा रहा है। और मर्यादा में रहने वाला मर्यादा-पुरुषोत्तम श्री राम की तरह पूजनीय- बंदनीय बना रहता है युगो-युगों तक ।
                                     ''नयाल सनातनी''

Tuesday, December 16, 2014

सनातनी प्रार्थना !
जो सबको अपनी ओर आकृष्ट करने वाले सच्चिनानन्द स्वरुप है, इसलिए 'कृष्ण' कहलाते है, सर्वव्यापी होनेके कारण जिनकी 'विष्णु' संज्ञा है, सबके भीतर निवास करने से जिनका नाम 'वासुदेव' है, जो 'परमात्मा' एवं 'ईश्वर' है, 'गोविन्द,  'परमानन्द,' 'एक',  'अक्षर', 'अच्युत', 'गोपेश्वर', 'गोपीश्वर', 'गोप', 'गौरक्षक', 'विभु', 'गौओं के स्वामी', 'गोष्ठनिवासी', 'गोवत्स-पुच्छधारी', 'ग्वालो, गोपों' और गोपियों के मध्य विराजमान',  'प्रधान' , 'पुरुषोत्तम' , 'नवघनश्याम', 'रासवास' और मनोहर' आदि अनेक नाम धारण करते है उन श्री कृष्ण से हम नित्य प्रातः एवं सायं पूजा काल में गौवंश की रक्षा हेतु प्राथना रत है।
                                                                                                 ''नयाल सनातनी'' संस्थापक अध्यक्ष '-- सर्वदलीय गौरक्षा मंच
सनातनी विचार !
      जो आपके सद कार्यों को देख, बढ़ते कदमो को रोकने हेतु ईर्ष्या वस आपको बदनाम कर अपने को उठाना चाहते है।  समझ लीजिये आपका कद समाज में और बड रहा है। बदनाम करने वालो का निश्चित ही पतन हो रहा है।  ''नयाल सनातनी''

Monday, December 15, 2014

सनातनी विचार !
जिस स्थान में ,शहर में , गावं में  या तालुका में अतियधिक दुर्जन बस गए हो ! जहाँ का वातावरण सज्जनों के रहने लायक न रह गया हो ! उस स्थान का विद्द्वानो को तुरंत त्याग कर देना चाहिए।  बर्ना दुर्जनो के क्रियाकलापों से पहले विद्द्वान का रजोगुण जाग्रत होगा फिर तमोगुणो की अधिकता होने लगेगी अंत में सतोगुण नष्ट होकर विद्द्वान सज्जन भी उन दुर्जनों के जैसा ही आचरण करते देखा-सुना जायेगा।
पूर्व में संत - विद्द्वान कहाँ करते थे की लाख दुर्जनों से भेट हो दिन भर में पर शाम होते-होते एक विद्द्वान सज्जन के दर्शन पुरे दिन की दुर्जनता को दूर कर देती है।  ''नयाल सनातनी'' 

Thursday, November 27, 2014

सनातनी प्रार्थना !
जो सबको अपनी ओर आकृष्ट करने वाले सच्चिनानन्द स्वरुप है, इसलिए 'कृष्ण' कहलाते है, सर्वव्यापी होनेके कारण जिनकी 'विष्णु' संज्ञा है, सबके भीतर निवास करने से जिनका नाम 'वासुदेव' है, जो 'परमात्मा' एवं 'ईश्वर' है, 'गोविन्द,  'परमानन्द,' 'एक',  'अक्षर', 'अच्युत', 'गोपेश्वर', 'गोपीश्वर', 'गोप', 'गौरक्षक', 'विभु', 'गौओं के स्वामी', 'गोष्ठनिवासी', 'गोवत्स-पुच्छधारी', 'ग्वालो, गोपों' और गोपियों के मध्य विराजमान',  'प्रधान' , 'पुरुषोत्तम' , 'नवघनश्याम', 'रासवास' और मनोहर' आदि अनेक नाम धारण करते है उन श्री कृष्ण से हम नित्य प्रातः एवं सायं पूजा काल में गौवंश की रक्षा हेतु प्राथना रत है।
                                                                                                 ''नयाल सनातनी'' संस्थापक अध्यक्ष '-- सर्वदलीय गौरक्षा मंच 
सनातनी विचार !
           जिस प्रकार एक पुत्रवालों का अपने पुत्र में, वैष्ण-पुरुषों का भगवान श्री हरि नारायण में, भगवान शंकर के भक्तों का अपने भोले में, एक नेत्र वालों  का अपने नेत्र में, प्यासे जनों का जल में, भूखे से पीड़ित का अन्न में निरंतर मन लगा रहता है, उसी प्रकार सभी देवी-देवताओं की आश्रय स्थला गौमाता के भक्त का भी गौ-माता पर ही नित्य एवं हर वक्त ध्यान रहना चाहिए तभी कल्याण संभव है।
जब नित्य लाखों गौवंश कट रहा हो उस वक्त ऐन-केन प्रकारेण जगत कल्याणकारी गौवंश की रक्षा के अनेक उपायों का साधन करने वाला ही बैतरणी पर गौ माता के इंतजार का हक़दार है।  ''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
अपने सुख में अनेक मित्र और साथीयों को खुशी प्रदान करने वाला व्यक्ति अपने दुःख के समय में जब अकेले विष पान करता है समझों उसकी परीक्षा स्वयंग भगवान के सामने हो रही होती है। जो हर परीक्षा में उत्तीर्ण ना हो सके वह कैसा गौ-भक्त ??
                                                                          ''नयाल सनातनी''

Tuesday, November 25, 2014

सनातनी विचार !
 आत्मविश्वास से भरपूर संत प्रकृति के मजबूत लोग सदा जीतते है। किसी कारण बस ये कुछ देर के लिए रुके हुए से दिखे तो कदापि न समझे की ये हतोत्साहित है, बल्किन ये नंदी-बैल की तरह लड़ाई से पहले दो कदम पीछे हटकर दुश्मन के लिए जमीन में गड्डा खोद रहे होते है, ताकि दुश्मन के दुर्गुणो को वे जमीन में सदा के लिए दफना सकें। और अपने सदगुणों से दुश्मन को भी संत बना सकें।
                                                                           ''नयाल सनातनी''  - राष्ट्रिय अध्यक्ष ; -- सर्वदलीय गौरक्षा मंच

Wednesday, November 19, 2014

सनातनी विचार !
एक राम अनेक काम सिर्फ राम भरोसे मत बैठो ! कर्म करों, आलोचनाओं में समय मत गवाओं । कर्म के बल पर ही ब्रह्म-देव जीवों की उत्पति करते है, विष्णु भगवान जीवो का पालन करते है, और शंकर-भोले संघार करते है।
याद रखों ! --- संतों की तपस्या भी एक कर्म है परमात्मा को पाने और परमात्मा की प्राप्ति बिना कर्म के संभव ही नहीं।
''नयाल सनातनी'' संस्थापक अध्यक्ष ;-- ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच''

Tuesday, November 18, 2014

सनातनी विचार !
सत्य का सूर्य सदा के लिए अस्त नहीं हो सकता। उल्लू, चमगादड़ों, ठगों और कालनेमियों को प्रसन्न करने वाली निशा का आखिर अंत होता ही है।
देखो-देखो अब वह युग, वह पवित्र समय निकट आ गया है, जब सच्चाई प्रकट होगी और उसके प्रकाश में सब भारत की धर्म प्राण जनता- जनार्दन वास्तविकता का दर्शन कर सकेंगे। बस थोडा धीरज और !
सावधान जनक-पुर के धनुष यज्ञं में अब श्री राम धनुष तोड़ असली और नकली का भेद खोलने ही वाले है । क्यकी उनके साथ सचाई विश्वामित्र और वशिष्ठ महामुनि दोनों ही है .
''नयाल सनातनी'' राष्ट्रिय अध्यक्ष ;---- ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच''

Sunday, October 26, 2014

एक महत्वपूर्ण सूचना 7 नवम्बर के सामूहिक श्रधांजलि-सभा हेतु !
नोट ! इस बैनर में किसी मंच या दल का नाम नहीं है इसे आप प्रचार कर सकते है।

7 नवम्बर की गौ-मैराथन एवं 1966 के गौ-भक्त सहीदों को श्रधांजलि जंतर-मन्तर पर किसी एक गौ-रक्षा दल या मंच की नहीं है,गौ-भक्त मित्रो। देश भर के हम सब गौ-भक्तों की है। गौ-माता को राष्ट्रिय प्राणी घोषित कराने ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच संस्था'' सिर्फ प्रचार कर रही है इस महाभियान की जो 1966 के बाद थोडा रुक सा गया था हजारों गौ भक्तों की निर्मम हत्या से। जबकि हर साल जंतर मंतर पर श्रधांजलि सभा होती ही है।
इस बार आप सब गौ-भक्तों के सहयोग से बनी सरकार है। सायद इस बार आपकी और हमारे संतों की बात यह सरकार और मुखिया श्री मोदी जी, राष्ट्रपति जी सुने इसलिए यह महा-आव्हान देश भर के गौ-भक्तों से है । आप सभी गौरक्षा दल,गौशालायें,संस्थायें अपने पोस्टर-बैनर - नारे और अपने ज्ञापन बना कर लायें हम सब अपनी-अपनी ओर से प्रधानमंत्री जी और राष्ट्रपति जी, देश के ग्रह-मंत्री जी को ज्ञापन मिलकर देंगे। अगर कोई व्यक्ति गौ-भक्त किसी गौ-रक्षा दल या मंच से जुडा नहीं है तो भी अपना ज्ञापन ला सकता है उसका भी देश के प्रधान मंत्री जी एवं सरकार तक ज्ञापन पहुचाया जायेगा।
जन्तर- मंतर पर गौ-भक्त श्रधांजलि सभा का ज्यादा से ज्याद प्रचार करें क्योकि यह आप सब गौ-भक्तों का अपना गौरक्षा दलों, गौ रक्षा सेनाओं,गौरक्षा मंचों का सामूहिक श्रधांजलि सभा का ही कार्यकर्म है।
क्या एक दिन अब तक आजाद देश में क़त्ल कर दिए गए उन 200 करोड़ गौ-वंश की सहादत और हजारों गौ-भक्त सहीदो के लिए हम एक मंच पर नहीं आ सकते ??
जंतर- मंतर मुख्य बैनर में सिर्फ गौ-माता की ही तस्वीर रहेगी। किसी भी व्यक्ति का फोटो नहीं होगी।
हां अपने प्रचार के पर्चों में, बैनरों में जरूर संतो, शैलिब्रिटी और अपने गौ-रक्षको और गौ-भक्तों की तस्वीर डाले यह जरूरी भी है प्रचार के लिए। धन्यवाद।
निवेदक ;-सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार।

Friday, October 24, 2014

सनातनी विचार !
नमों-नमों कामधेनु सुख करनी, नमों-नमों शुरभि दुःख हरनी।
साकार है धरा में गौ रूप तुम्हारी,तिहों लोक में फैली है कीर्ति न्यारी।।
मस्तक पर सदा ब्रह्माजी विराजे , मुख में चारों वेदों है साजे।
सूर्य-चन्द्र आखों रहते,दांतों में गरुड, जिह्वा में सरस्वती विराजे।।
ललाट में रुद्र, सीगोंके में इंद्र ,भगवान शंकर और विष्णु रहत है ।
कानों में अश्विनीकुमार, उदर भाग में भगवान कार्तिकेय बसत है।।
अपान [गुदा] में सारे तीर्थ, मूत्र-स्थान में गंगाजी निवासे है ।
रोमकूपोंमें ऋषिगण, पृष्ठभाग में मृत्यु के देवता यमराज साजे।।
दक्षिण पा‌र्श्व में वरुण -कुबेर, वाम पा‌र्श्व में महाबली यक्ष विराजे ।
मुख के भीतर गंधर्व, नासिका के अग्रभाग में सर्प-राज विराजे।।
खुरों के पिछले भाग में अप्सराएं स्थित हैं, गाय के गोबर में लक्ष्मी रहती है।
गोमूत्र में गंग भवानी, चरणों के अग्रभाग में आकाशचारी देवता रहत है ।।
रंभानेकी आवाज में प्रजापति और थनों में समुद्र प्रतिष्ठित हैं।
मनुष्य प्रात:स्नान करके, गौ स्पर्श करते सब पापों से मुक्त हो जाते ।।
ऐसी सर्वदेवमयी, ममतामयी देवो की पुजती गौ माता है हमारी।
7 नवम्बर गौभक्त शहीद दिवस पर,गौ भक्तो गौ-मैराथन दौड़ है तुम्हारी।।
जीवन भर कमाया-फुका क्या साथ जायेगा,गौ-हित दौडोगे तो अंत समय काम आएगा।
ऋषि-मुनि,बोले असली कमाई कर लो,एक दौड़ गौ-माता के हित बैतरणी पर काम आएगा।

निवेदन सत्य के साथ आने की अपील !
सभी गौ-भक्त, संत, गौ-प्रेमी, गौ-प्रचारक,सनातन धर्म प्रचारक, देश-विदेश में रहते हुए भी इस पवित्र माटी,भारत भूमि का हित चाहने वाले भारत वंशी , नेता-अभिनेता, सद ग्रन्थ-कार, कवि-साहित्यकार, कलाकार, व्यापर-कार ,व्यास पीठ पर बैठने वाले विद्द्वान,गौवंश के हित में लगे महान सेवक गण, अगर सच में आप में गौ-माता के उसके गौवंश के प्रति थोडा भी ह्रदय के किसी कोने में ममता बची है, तो इस अनोखे मुहीम ( एक दौड़ गौ-माता के लिए गौ-मैराथन यह एक सकारात्मक दौड़ है गौ-वंश के हित में इसमें किसी का विरोध नहीं बल्किन सब में उर्जा का संचार है ) से जुड़ों क्योकि गौवंश दिन पर दिन ख़त्म किया जा रहा है। हम दावे के साथ कहते है जिस दिन इस धरा-धाम से आखिरी गौवंश ख़त्म आप और हम सब भी ख़त्म हो जायेंगे। हमारे भी वंश ख़त्म हो जायेगा। क्योकि इस प्रथ्बी को अपने सींगों पर धारण करके जो गाय है वह सब कुछ नष्ट कर देगी, धर्म को धारण किये जो बैल है वह बिपरीत हो सब संसार को जलमहि कर देगा। तब सारा संसार जल में बिलीन हो जायेगा तब कोसते रहना अपने विपरीत वर्ताव को और अपने धन कमाने के लालच को जो एक दिन गौमाता के हक़ में दौड़ भी नहीं पाया। नौकरी और व्यापर ही याद आया।
''नयाल सनातनी'' गौ-चरणों का दास,संस्थापक अध्यक्ष ;- सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार

Sunday, October 19, 2014

सनातनी विचार !
डॉ० एक बात कहते है कि बीमारी का इलाज की जरूरत ही नहीं पड़ेगी अगर आप अपने बिमारियों से बचने के लिए बचाव की मुद्रा में हमेशा रहे। आज वैसे ही हमने ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच'' के माध्यम से पिछले कई वर्षो से प्रचार के माध्यम से किया है। हमने अपने लोगो को जागरूक करना शुरू किया आज लगभग करोडो लोग गौ- माता की बात कर रहे है। लाखों लोग गौवंश के संगरक्षण और संवर्धन में लग गए है। हमें अपने लोगो को जागरूक करना पड़ेगा ना की कसाइयों के पीछे अपनी शक्ति लगा कर समय नष्ट करना होगा। हम गाय के भक्त माने जाने वाले समुदाय अगर गाय पालेंगे तो कसाई कटेगा कहाँ से ??
आइये हम सब सक्षम लोग एक बूढी गाय या बैल को अपनी जुमेमेवारी मानकर सब गौ प्रेमी पालें गौ रक्षा अपने आप हो जाएगी !
''नयाल सनातनी'' संस्थापक अध्यक्ष ;- सर्वदलीय गौरक्षा मंच

Thursday, October 16, 2014

सनातनी विचार !
भूसी से भरे बर्तन की तरह कई मुर्ख पुत्रों को जन्म देने से कोई व्यक्ति महान नहीं होता ! किन्तु कुटुम्ब का पालन- पोषण करते हुए अपने धर्म संस्कृति के अनुसार सनातन परम्परा निभाने वाला, देश धर्म, दरिद्र नारायण,संत,गौ,ब्राह्मण की यथा शक्ति सहयोगी ही पिता का मस्तक इस लोक और परलोक में ऊचा रखता है।
अर्थात पुत्र एक ही हो ''गौ-सेवक''- राष्ट्र सेवक हो कई पीडिया तर जाती है।
ठग -पाखंडी-धर्म का ठेकेदार पुत्र कई पीडिया नर्क में ले जाता है . जो करो जितना करो दिल से करों यही सच्ची सेवा है सनातन हिन्दू धर्म की .

''नयाल सनातनी'' --- सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार

Wednesday, October 15, 2014

सनातनी विचार !
सनातनी हिन्दू, जैनी,मुस्लिम, सिख, इसाई,आर्य समाजी, बौद्द ,अंग्रेज आदि सबसे हमारी दोस्ती हो सकती है। मगर गौवंश का हत्यारा हमारा जानी दुश्मन है। चाहे वह किसी भी धर्म-सम्प्रदाय - या मत- मतान्तर से क्यों ना हो ??? हम उनके सर्वनाश के लिए ही प्रार्थना करते है नित्य जो गौ-कशी,गौ मांस ( माँ ) का भक्षण करते है।
''नयाल सनातनी''-- सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार

Monday, October 13, 2014

नयाल सनातनी विचार !
जो एक बार, इस बार 7 नवम्बर को गौ सहीद दिवस पर उन हजारों गौ भक्त सहीदो के लिए गौ-मैराथन में गौरक्षा का संकल्प लेकर दौड़ेगा उसको लख चौरासी के फेरो में नहीं दौड़ना पड़ेगा ..''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
कुछ लोग बड़ी-बड़ी बातें करते है कुछ लोग बड़े-बड़े काम कर जाते है .खुदाया मुझे नफरत है सिर्फ बातें-आलोचना में समय गवानें वालो से जो-जो किसी संगठन में अजगर बन कर बड़ा शरीर दिखाते है .100 टन का अहंकार सर पर रख कर घूमते है .
नमन उनको जो कर्म को प्रधान मानते है .जो काम सौपा है किसी भी संगठन ने भरोषा कर उसे भगवान का कार्य समझ कर हर दिन आगे बढ़ते है ..
.''नयाल सनातनी'' सर्वद्लीय गौरक्षा मंच परिवार

चलो सभी गौप्रेमी दिल्ली चलो गौमाता की रक्षा कराने के लिये दिल्ली चलो 07 नवम्बर 2014 को दिल्ली चलो गौमाता का खोया हक वापस दिलावने के लिये दिल्ली चलो भारत देश मेँ गौमाता की हत्या बन्द करवाने के लिये दिल्ली चलो गौमाता की सुरक्षा का कानुन तैयार करवाने के लिये दिल्ली चलो गौचर मेँ गौशाला का निर्माण करवाने के लिये दिल्ली चलो अपनी गौमाता को न्याय दिलावनेँ के लिये दिल्ली चलो सभी गौप्रेमी आपसे मेँ रामजी राम जय गौमाता करने के लिये दिल्ली चलो तो हमारी गौ माता राष्ट्र माता बनवानेँ के लिये दिल्ली चलो ???............ गौमाता की हत्या बन्द करवाने के लिये दिल्ली चलो पर एक जोर और लगा दो, हर दिल की आवाज बोले गौमाता की रक्षा करवाने के लिये दिल्ली चलो पुरे भारत देश तक पंहुचा दो .----निवेदक ;---नायल जी सी.राजेन्द्र गिरधारी प्रजापत''सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार''

Friday, October 10, 2014

सर्वदलीय गौरक्षा मंच द्वारा आयोजित विशाल गौ-कवि सम्मलेन बीना (मध्यप्रदेश के एक छोटे से गावँ में ) के पूर्ण होने पर जब हम वहां बैठे संतों के पास आये तो एक लाली नाम की गौ-माता ने जो आशीर्वाद प्रदान किया वह भूले ना भुलाया जा रहा है .देखिये इस गौ चरणों के दास पर कैसे कृपा की गौमाता ने एक नजर सिर्फ 1 मिनट का विडिओ ..''नयाल सनातनी''
https://www.youtube.com/watch?v=5OzVLWFOdqo&feature=youtu.be

Thursday, October 9, 2014

चलो इस तरह कुछ गौवंष बचायें .
इन बैलो को बचाने तुम-हम दौड लगायें .
7 नवम्बर इन बैलो के प्रचार का दिन होगा,
गौ वंश बचाने यह त्योहार का दिन होगा .
इनके लिए हम- तुम ही नहीं पूरा भारत दौड़ेगा
मनमोहन के साथ मोदी भी दौड़ेगा .....''नयाल सनातनी''

Wednesday, October 8, 2014

सनातनी अपील - गौ मैराथन !
7 नवम्बर को दिल्ली में गौ-माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने एक बहुत बड़ी दौड़ सिर्फ ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार'' की नहीं है प्रतेक हिन्दुस्तानी की है जो गौ-माता को अपनी माँ की तरह इज्जत देता है .जिसने गौ माता के दूध का कर्ज चुकाना है .
जो सिर्फ फेसबुक में ही गौरक्षा नहीं कर रहे बल्किन धरातल पर भी कर रहे है उनकी भी और फेसबुकियों की भी यह दौड़ है .
आइये इस बार हम सब मिलकर इस दौड़ में सामिल हो कर गौ माता को देश की सरकार और उनके प्रतेक प्रदेश के हुक्मरानों एवं करोडो हिन्दुस्तानियों के ह्रदय तक पंहुचा दें . एक सकारात्मक दौड़, एक सुन्दर पहल सिर्फ गौ माता के लिए . क्या आप तैयार है ??
तो दिजीये समर्थन आइये अपने गौरक्षा दल के झंडे के साथ यह आपका ही प्रोग्राम है .
नोट !
एक बात का ध्यान रखें यहाँ कोई रजिस्टेसन नहीं है ना ही कोई फीस है .क्या अपनी माँ को बचाने भी रजिस्टेसन करके जाता है बेटा ??.......जय गौ माँ हम सब दौडगे गौ माता के लिए ......''नयाल सनातनी''

Monday, September 29, 2014

सनातनी विचार !
प्रधान मंत्री महोदय को एक विनम्र निवेदन -----
P M महोदय आज देश की साधारण गौभक्त जनता भी यह जान चुकी है, कि भारत की अर्थव्यवस्था कृषि आधारित है और मवेशी (गोवंश) कृषि की रीढ़ है, पर केंद्र सरकार गोवंश हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाना चाहती !!!!!!! आखिर क्यों ?
जबकि देशी जैबिक - खाद ,गोबर खाद और बैलों द्वारा खेती, परिवहन से भारत एक समृद्ध राष्ट्र था और आगे भी हो सकता है। आज पेट्रोल का आयात/ उर्वरक का आयात- सब्सिडी का झमेला' क्या यही समृद्धि है???
कीटनाशकों और उर्वरक से फसलें ज़हरीली और भूमि बंजर हो रही है किसान ट्रैक्टर , फर्टिलाइज़र, जेनेटिक बीज के लिए कर्ज़ लेता है और आत्महत्या का आखरी रास्ता चुन लेता है ।
क्या खेती की दशा और दिशा ऐसी ही रहेगी ? क्या सरकार प्राचीन पद्धतियों को नष्ट नही कर रही है ?
विश्व में प्राचीनतम संस्कृति और ज्ञान का केन्द्र रहा है भारत इस अर्थ में कह सकते हैं कि भारत का दुनिया में एक विशिष्ट स्थान है। ऐसे भारत की आत्मा है. ग्राम, ग्राम का आधार है किसान, किसान का आधार है कृषि, कृषि का आधार है गोवंश और हमारी सरकारे नीव में बम रखने जैसी स्थिति को जन्म देते हुए नित नये - नये कत्लखानो को खोलने में सब्सीडी देकर गौ-हत्या को बढ़ावा नहीं दे रही है.
जरा गंभीरता से विचार कीजिये P M महोदय !
''सनातन धर्म'' जो सदा था सदा रहेगा जिसमे भगवान भी अवतार लेते है इसके अनुसार 33 करोड़ देवी - देवताओ के चलते-फिरते विगृह (गौवंश )को किस तरह नष्ट किया जा रहा है, इसे देख कर ''शैतान'' का भी मन पसीज जाये पर भारत सरकार का क्यों नहीं यह प्रश्न ह्रदय में ठोकर मरता है दिन में कई बार मेरा ???????
''नयाल सनातनी'' ;-सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार

Sunday, September 28, 2014

सनातनी विचार ! सत्य की राह चलना है तो !

कुछ काम कर रहे हो तो उसे छोड़ कर माता-पिता जी की आज्ञा पालन पहले करना चाहिए।
सौ काम छोड़ कर स्नान करना चाहिए, हजार काम छोड़ कर भोजन कर लेना चाहिए।

लाखों कार्य छोड़ कर अगर संकल्प ले लिया है, दान देने का तो दान दे देना चाहिए।
करोड़ों कार्य छोड़ कर सत पुरुषों, विद्वानों द्वारा दिया जा रहा ज्ञान ले लेना चाहिए।

अरबो काम छोड़ कर परमात्मा का नाम लेना चाहिए,सत्संग में सत्पुरुषो के साथ बैठना चाहिए।
इन सब कार्यों से भी अधिक जरूरी है, अगर गौ-माता संकट में है तो उसकी जान बचाना चाहियें।

तो समझों मानव जन्म सफल हुआ। ''नयाल सनातनी'' , सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार

Saturday, September 27, 2014

जियों-जियों-जियों-कविवरों लाखो साल जियों !
नोट ! मित्रो कविता की विधा से मैं अनजान हूँ ,मन के कुछ भाव सकुचाते हुए आज उतार दिए पन्नो पर गौ-माता कृपा करना दास पर और माँ के लाडले भी यथा शक्ति मुझे झेल लेना ; ---

दूर कही जब देश के किसी गावँ में जब गौमाता की महिमा पर कोई कवि गा रहा होता हो।
पता नहीं मन मयूर मेरा हजारो किलोमीटर दूर यहाँ हैदराबाद में क्यों नाच रहा होता है ?

कहता है सदियों से उपेक्षित गौ-माता की महिमा आज हजारो की भीड़ में गाई जा रही है।
लोग जो गौ-महिमा से अनजान थे आज उनको उस सर्वदेवमयी गौ की महिमा सुनाई जा रही है।

देखो अर्ध-रात्रि हो गई वह उस कोने में उंगता एक सक्स बार-बार गौ-महिमा को सिर्फ इस लिए मन लगा रहा है।
आज पहली बार उसे गलियों में कचड़ा खाने वाली गाय के ये सद-गुण कवि मुख से सुन अचरज ही लग रहा है।

यह देखों यह रिक्शा वाला ग्राहक छोड़ आज गौ-महिमा सुन रहा है,क्योकि यहाँ सफ़ेद पोस नेता ही नहीं रिक्शा वाला भी बैतरणी पार लग रहा है।
कल जिनको लगता था गौ-कवि सम्मलेन कर ये क्या तमाशा कर रहा है नयाल, आज उनपर भी गौ-कृपा हो गई वह गौ-कवियों को ढूड रहा है।

कहते थे युग पुरुष आचार्य श्रीराम शर्मा हम बदलेंगे युग बदलेगा, आज सच हो रही उस महापुरुष की बाते ''गाय'' के लिए तो यह युग बदल रहा है।
एक समय स्वामी करपात्रीजी ने जो सीख देश को दी थी, तुम समझे नहीं शिष्य रह कर भी,हम चल चुके उस राह पर अकेले अब युग बदल रहा है।

देश अगर बचाना है बचाओं गौ-माँ एक कदम तुम भी आगे बढाओं मेरी-माँ, आज इस रण समर में देश की मात्रु-शक्ति भी आगे आओं मेरी माँ।
माँ का दर्द एक माँ समझती है एक लाल अगर मारा गया कितना भारी दुख होता, बताओं गौमाता के लाखों लाल आज काटे जा रहे बचाओं मेरी माँ।

देखो वह सक्स कितना सुन्दर गुणगान गौ-माता का कर रहा है,अरे यह तो देश का सबसे बड़ा ''कवि अब्दुल गफ्फार'' गौ महिमा गाते हुए कितना सुन्दर लग रहा है।
जो तालिया सफ़ेद पोशों की गुलामी की कविता में बजने मजबूर थी। आज तो यह नवजवान ''प्रभात परवाना'' द्वारा गाया गौ-माता पर छंद ले जा रहा है।

आज मुझे उस दिन पर गर्व सा हो रहा है, जिस दिन गौ कविता की बात मन में आई ही थी, तभी एक नवजवान गुरु जी कहते हुए ''संदीप वशिष्ठ'' टकराया।
लोग चाहें जो कहें लोगो का काम है कहना,''नयाल सनातनी'' तुझे तेरी गौ-माता की महिमा को जन-जन तक है पहुचाना तो बना इसे ''अर्जुन'' गौ-गीता का ज्ञान इसे ही प्रथम हमने सुनाया ।

तब यह सनातनी विचार आया !

तो कुछ नया सोच, कुछ येसा कर की हर कवि लिखे तो एक गीत गाय पर लिखे,और गौवंश बचे तो देश बचे यह संसार बचे, इस देश का किसान बचे।
कल गौ-माँ को उसके बच्चो के निरपराध हत्या का इंसाफ जरूर मिलेगा, अब्ध्या गाय होगी तो ''अमर ग्रन्थ'' के पन्नो में मोदी का नहीं तो कोई और सक्स का नाम दर्ज जरूर होगा।

इस रण भूमि में जो-जो सक्स मेरा साथ दे रहे है गौ महिमा जन-जन तक पहुचाने में निश्चित ही वे साधू-संत है मेरी नजर में .
इस कल्युग में भी गौ-माता को इंसाफ दिलाने किसी ना किसी रूप में गोपाल जरूर आयेगा,मेरा क्या मैं तब तक गोवर्धन पर्वत उठाने के भ्रम में जियेगा !!!!

''नयाल सनातनी'' संस्थपक अध्यक्ष सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार

Friday, September 26, 2014

सनातनी विचार !
नन्दीश्वर भगवान यानि धर्म ! भगवान शंकर के मंदिर में उनके सामने उनकी सवारी नंदी को इसलिए स्थापित करते हैं, क्योंकि शिवजी का वाहन नंदी पुरुषार्थ यानी मेहनत का प्रतीक है। अब सवाल यह बनता है कि नंदी शिवलिंग की ओर ही मुख करके क्यों बैठा होता है? जानते हैं दरअसल नंदी का संदेश है कि जिस तरह वह भगवान शिव का वाहन है। ठीक उसी तरह हमारा शरीर आत्मा का वाहन है।
 

जिस प्रकार नंदी की नज़र भगवान शंकर की तरफ होती हैं, उसी तरह हमारी नजर भी आत्मा की ओर होनी चाहिए | इस प्रकार हर मनुष्य को अपने दोषों को देखना चाहिए। हमेशा दूसरों के लिए अच्छी भावना रखना चाहिए । आपको बता दें कि भगवान शंकर की सवारी नंदी का इशारा यही होता है कि शरीर का ध्यान आत्मा की ओर होने पर ही हर व्यक्ति चरित्र, आचरण और व्यवहार से पवित्र हो सकता है। 
 ''नयाल सनातनी'' ;-- अध्यक्ष --सर्वद्लीय गौरक्षा मंच
सनातनी विचार ! ---- 
आज-कल लोग दुनिया को वैसे नहीं देखते, जैसी वो वास्तव में है। अपितु वैसे देखते है जैसे वो खुद है । एक पापी को सब संसार पापी नजर आता है, एक भले व्यक्ति को सबमे कुछ न कुछ भलाई दिखती है। असल में ये जीवन का नियम है कि सज्जन को सज्जन और पापी को पापी ही सही तरह से समझ पाता है। पर एक गुरु मन्त्र आज बताते है आप गौ -सेवा, गौ - रक्षण, गौ - कार्य में लगे लोग संत की श्रेणी में आ जाते है। क्योकि गौमाता को भगवान राम ने संत कहा है । संत की सेवा तो कोई संत ह्रदय ही करेगा ना। आइये आप और हम सब संत यानि गौ - प्रेमी बनकर जिनको लोग पापी कहते है उनको भी गौ - सेवा की प्रेरणा देकर, गौ - सेवा में लगा दें और संत बना दें।-------- जय गौमाता की--------- ''नयाल सनातनी'' ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच''

Wednesday, September 24, 2014

शारदीय नवरात्र 2014 की ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार'' की और से सभी ''माता रानी'' के भक्तों को कोटि -कोटि शुभ कामनायें ----
वन्दे वांच्छितलाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम्‌ ।
वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्‌ ॥
ॐ शैलपुत्रीं देवी रक्षा करो।
ॐ जगजननि देवी रक्षा करो |
ॐ नव दुर्गा नमः |
ॐ जगजननी नमः |
मां दुर्गा को सर्वप्रथम शैलपुत्री के रूप में पूजा जाता है। हिमालय के वहां पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण उनका नामकरण हुआ शैलपुत्री।
इनका वाहन वृषभ ( बैल ) है, इसलिए यह देवी वृषारूढ़ा के नाम से भी जानी जाती हैं।यही माँ अन्नपूर्णा के रूप में काशी में भगवान शिव को भी अन्ना की भिक्षा देती है। और यही जगत का भरण पोषण के लिए श्रष्टि संचालन के लिए ''बैल'' से हल चलकर खेती कर अन्न धन के भंडार भरने की सीख देती हुई मानव मात्र को सन्देश दे रही है। अब भी मानव नहीं समझा तो यह उसकी बुद्दी की हीनता है। …
''नयाल सनातनी'' अध्यक्ष ;-सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार

Tuesday, September 23, 2014

सनातनी विचार !
हिंदी संस्कृत की छोटी बहन है .यह विश्व की प्रथम भाषा संस्कृत की बेटी भी मानी जाती रही है . और संस्कृत को देव भाषा येसे ही नहीं कहते . अगर संस्कृत देव भाषा है तो उनकी बेटी भी तो देवताओं को समझ आती ही है ..और संस्कृति की अधिष्ठात्री देवी माँ सारदे की आश्रय स्थल गौ माता ही है . गौ माता की महिमा अगर संस्कृत ,हिंदी या भारतीय भाषाओँ में जिनमे संस्कृत के शब्दों का मेल जोल है . में नहीं गा कर अगर कोई अंग्रेजी आदि विदेशी भाषाओँ में गाता या लिखता है तो समझो बिना जोते खेत में धान बो रहा है ......जय गौ माता की .सनातन सत्य --
''नयाल सनातनी''संस्थापक अध्यक्ष ;----सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार
सनातनी विचार !
बेटी स्वयंग जगदम्बा है बहु- बेटी को जलाने वाले ,या बहन-बेटियों पर तेजाब फैकने वाले रौरव नरक में तब तक पकाए जाते है जब तक 14 इन्द्रो की सत्ता ख़त्म नहीं हो जाती .उसके बाद भी उस नारकीय मनुष्य को कदापि मनुष्य योनी नहीं देता परमात्मा .गौ और बेटी जीतनी सीधी और नारायण की प्रिय है .नारायण उनके साथ किये अपराध का उतना बड़ा दण्ड विधान भी निशचित किये हुए है .यह सनातन सत्य --
''नयाल सनातनी''संस्थापक अध्यक्ष ;----सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार

Monday, September 22, 2014

सनातनी विचार !
श्रीमन नारायण भगवान मानव मात्र के सत-कर्मो पर तभी तक आनन्द की अनुभूति करते है,जब तक मानव अहंकार में कोई सत-कर्म ना करे।
रावन को अहंकार आया मिटा दिए , कंस को आया मिटा दिए। अनेक भगवान के अनन्य भक्तों को अहंकार आया अहंकार को मिटा दिए।
यह कहना कदापि अतिशयोक्ति नहीं होगा की भगवान का भोजन ही अहंकार है।
 ''नयाल सनातनी''- राष्ट्रिय अध्यक्ष;- सर्वदलीय गौरक्षा मंच 

Sunday, September 21, 2014

सनातनी विचार !
शंकर का रूप तो कोई भी रख सकता है पर शंकर जैसे सदा सबका कल्याण हो येसी भावना भी आ जाने चाहिए . विष पीकर अमृत बाटने की कोशिश तब भी हो !गाय तो सब पालते है दूध के लिए बैल पालना आना चाहियें ताकि धरती का सीना चिर हजारों टन अन्न उगाकर लाखों मानव जाति का पेट भर सकों .
''नयाल सनातनी'';-- संस्थापक अध्यक्ष ;-- सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार

Saturday, September 20, 2014

सनातनी विचार !
जो महर्षि मनु की संतान मानव दुसरो मनुष्य से जीतनी घृणा करता है। समझ लो की वह महर्षि मनु के इष्ट ईश्वर कृपा से उतनी ही दूर है।
मानव से घृणा नहीं जाति या सम्प्रदाय से घृणा नहीं ! बल्किन मनुष्य की दुष्कृत्यो से घृणा करो जो मानव जाति के अहित में है। ''नयाल सनातनी''

Friday, September 19, 2014

सनातनी विचार !
जो काम रुमाल से निपट सकता है, उसके लिए रिवाल्वर मत चलाइये। गुस्सा तो कमजोरी का वाहक है,गुस्सा तभ भी ना करें जब आपकी निस्वार्थ प्रेम और शांति की बातों को सामने वाला आपकी कमजोरी समझ बैठा हो। जबकि कमजोर सदा रिबाल्वर वाला होता है उसे अपने पर भरोषा कम गोली पर ज्यादा होता है। आपके लाख समझनें पर भी अगर आपको सामने वाला स्वार्थ बस नहीं समझ रहा है,तो आप अपना रास्ता बदल दो। ना की सामने वाले को समझाने में समय बर्बाद करें।  ''नयाल सनातनी''

Wednesday, September 17, 2014

कोटि कल्प काशी बसे मथुरा कल्प हजार। एक निमिष सरयू बसे तुले न तुलसी दास।।???
अब जबाब देना लाजमी हो गया जब किसी का सकारत्मक जबाब नहीं आया दो दिन बाद भी ------गोस्वामी बाबा तुलसी दास जी ने इस लिए शरयु को इतना महत्व दिया क्योकि शरयु की उत्तपति सिर्फ भगवान के अयोध्या में अवतार लेने के कारण महर्षि वशिष्ठ के घोर तपश्या के फल स्वरुप हुआ .साथ ही जब वशिष्ठ महामुनि शरयु नदी को भगवान शिव की घोर तपश्या के फलस्वरूप हिमालय पर्वत के सहायता से धरती पर ले आये तो बागेश्वर नामक उत्तर की काशी के पास एक शीला पर महर्षि मारकंडे की घोर तपश्या के कारण शरयु का मार्ग अवरूद्द हो गया .शरयु ने महर्षि वशिष्ठ को कहाँ आगे महर्षि मारकंडे तपश्या रत है अगर मेरा बेग उनको छू भी गया उनकी तपश्या भंग हुई तो महर्षि मारकंडे मेरा सारा जल का आचमन कर सुखा देंगे पहले उनको राह से हटाने की कोई तरकीब सोचो तब इस शरयु कुंड से मैं आगे प्रस्थान करुँगी . यह सुन वशिष्ठ महामुनि धर्म संकट में पड गए फिर से भगवान शिव की घोर तपश्या की भगवान शिव प्रकट हुए और सारी समस्या सुन महर्षि वशिष्ठ को कहा जाओं आपकी सबही मनोकामना पूर्ण होगी महर्षि मारकंडे को हम रास्ते से हटा देंगे . अब भगवान शिव ने भगवती पारवती से कहाँ प्रिये तुम गाय का रूप धरो और मैं बाघ का मैं आपके पीछे भागूँगा और तुम जोर जोर से राम्हाना पहले के संत ऋषि गौ की करुण पुकार सुन अपनी बड़ी से बड़ी तपस्या छोड़ गौ रक्षा को तत्पर रहते थे आज की तरह नहीं है की लाखो गौवंश नित्य कट रहा संतो को गहरी नीद का स्वाद लगा है .खैर जैसे ही गौमाता रंभाने लगी महर्षि मारकंडे ने गाय की करुण पुकार सुन तपस्या छोड़ अपने कमंडल का जल से कुछ छीटे गाय और बाघ के ऊपर डाले तो साक्षात् भगवान शिव और जगत जननी पारवती प्रकट हो गए .संत ने कहाँ भगवान यह क्या कौतुहल है आप और मेरी माँ इस रूप में क्यों ?भगवान शिव ने कहाँ पहले तुम बताओं तुम क्यों इतनी घोर तपस्या में हो की सदियों से वशिष्ठ के द्वारा अपने तप बल से लायी शरयु का रास्ता रोके खड़े हो . महर्षि मारकंडे बोले भगवन मेरा तपश्या का फल तो आपने दे दिया मेरा उद्देश्य जगत माता-पिता के एक साथ दर्शन करना था . भगवान शिव ने कहाँ अब आपका उद्देश्य पूर्ण हुआ अब शरयु को रास्ता दे दो तब महर्षि मारकंडे बोले भगवन एक और वरदान दे दीजिये की आप अब हमेशा के लिए इस स्थान पर बाघ और माता पारवती गाय के रूप में विराजमान हो जाईये .और कल्युग प्रयन्त जो भी गौ भक्त एक बार आपका इस रूप में दर्शन नहीं करेगा उसकी गौभक्ति पूर्ण नहीं मानी जाएगी .भगवान शिव ने कहाँ तथास्तु . जय शरयु को अयोध्या तक पहुचाने के लिए भगवानशिव को बाघ बनना पड़ा , भगवती पारवती को गाय बनना पड़ा, मारकंडे मुनि को घोर तपस्या छोड़नी पड़ी , वशिष्ठ महामुनि को घोर तपस्या के बल पर भगवान शिव की प्रसन्ता से हिमालय के माध्यम से धरती पर लाने का सौभाग्य प्राप्त हुवा भगवान श्री राम का कुल गुरु बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ . भगवान शिव के अपने अराध्य विष्णु के अवतार श्री राम के रूप में दर्शन प्राप्त हुआ .जिस शरयु के कारण पूरा अयोध्या क्षेत्र हरित क्रांति से लहलहा उठा जी कारण करोडो भगवान की प्रिय गायो को भरपेट हरा चारा मिला,जिस चारे के कारण गौ वंश इतना बड़ा की भगवान श्री राजा राम प्रति दिन लाखो गौ का दान किये . जिसके तट पर भगवान राम के एक से एक बलवान, ज्ञान वान पूर्वज पैदा हुए . जिस शरयु के तट पर परम तपस्वी मनु और सतरूपा , कश्यप और आदित्य को दसरथ और कौसल्या के रूप में जन्म लेना पड़ा . वह शरयु जिसके तट पर अयोध्या बसा और करोडो जीवो का उद्धार हुआ आज भी परम तपश्वी संत जन जहाँ तप रत है. जहाँ पर हनुमान जी आज भी मेरे गुरुदेव नृत्य गोपाल दास जी के रूप में हजारो-लाखो संत-महंत और तीर्थ यात्रियों की सेवा में लगे हुए है . भला उस शरयु के तट पर एक निमिष में कल्याण क्यों ना हो जीव का .इसीलिए गोस्वामी जिनका नाम गोस्वामी गाय की सेवा करने के कारण ही पड़ा यह क्यों ना कहे भला की .-----------------------------------कोटि कल्प काशी बसे मथुरा कल्प हजार। एक निमिष सरयू बसे तुले न तुलसी दास।। ''नयाल सनातनी'' गौ-चरणों का दास

Tuesday, September 16, 2014

सनातनी विचार !
पूजनीय है हरियाली युक्त धरती, गौमाता और नारी का स्थान  .
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः।। (मनु स्मृति 3-56)
जिस कुल में स्त्रीयाँ पूजित होती हैं, उस कुल से देवता प्रसन्न होते हैं। जहाँ स्त्रीयों का अपमान होता है, वहाँ सभी ज्ञानदि कर्म निष्फल होते हैं।
मनुष्य जीवन तब तक अपूर्ण है जब तक अर्धांगिनी साथ ना हो आपके सुभ कर्मो के साथ ना हो !
 इस ब्रहमाण्ड में ये तीनो को सबसे ज्यादा धैर्यवान और माँ का दर्जा दिया गया है .पहली है धरती माता, दूसरी है गौ माता, तीसरी है नारी .इसलिए इनको पूजनीय कहाँ गया है।  जो व्यक्ति लाखो वर्ष तक तप करे और इन तीनो का अपमान करे उसको उसकी तपश्या का फल नहीं मिलता यह सनातन सत्य है।
 ब्रह्मा, विष्णु, महेश को भी जब नारी बालक बना कर अपने ''स्तन पान'' करा सकती है तो तुच्छ मानव की हस्ती क्या ?
याद रहे आप कर्म-काण्ड,तंत्र-मन्त्र  में कितने ही माहिर क्यों ना हो और कवि-विद्वान कितने ही बड़े हो गए हो पर धरती माता, गौ-माता और मानव जाती को जन्म देने वाली नारी का अपमान करते है तो आप का जीवन सुखदायी नहीं।
 ''नयाल सनातनी''

Monday, September 15, 2014

!! गौ कथा गुरु गोरखनाथ की जन्म कथा !!

एक फक्कड़ साधू अलख निरंजन करता - करता गावँ - गावँ फिर रहा था। वो भिक्षा मागने के लिए एक माता के पास आया। माता ने तुरंत भिक्षा दी। पर वो साधू ने देखा की यह माता उदास है । साधू ने माता से पूछा की माँ उदास क्यों हो ? माता ने बताया की मेरा कोई पुत्र नहीं है , इसीलिए उदास हूँ । साधू सिद्ध महात्मा थे उसने माता को झोली में से एक मुठ्ठी राख दी और कहा इसे खा ले पुत्र हो जायेगा। साधू चला गया। माता ने बहुत सोचा और फिर वो राख को नहीं खाया। १२ साल बाद वो साधू फिर से उसी माता के पास आया और कहा की माता आपका बेटा नहीं दिखाई दे रहा माता ने कहा की मैंने वो राख नहीं खाई साधू ने पूछा की माता तूने वो राख कहा फेंकी वो माता साधू को गोबर के गढढे के पास ले गयी मैंने राख यहाँ फेंकी थी। उस साधू ने उस गोबर के गढढे मै से १२ साल का बालक पैदा कर दिया। वो ही थे गुरु गोरखनाथ। जिन्होंने गावं - गावं , शहर - शहर फिर कर एक ही मन्त्र दिया गोरख यानि गाय रख तभी तेरा कल्याण होगा। पूर्व में इस देस के गुरूओं का एक ही मंत्र था गोरख- गोरख मतलब गौ माता को घर में रख। आज के गुरुओं का मन्त्र गाय मेरे आश्रम में रख मेरी गौशाला में रख है ताकि वे एक गाय के लिए 50 लोगो से चंदा ले सके गाय एक भी ना पाले ..
सबहि नचावत राम गुसाई।गुरु गोरखनाथ महाराज की जय।

1 - जिस घर मैं गौ के घी का दीपक जलता हैं वहां पर १० मीटर तक सात्विक तरंगे निकलती हैं, ये तो वैज्ञानिको की रिपोर्ट हैं। अगर आपके पडोसी का घर १० मीटर के अन्दर आता होंगा तो उसका भी कल्याण हो जायेगा।

2 - गोली मतलब जिसने गौ माता को लिया,घर मैं रखा उसको ज़िन्दगी मैं कभी गोली नहीं खानी पड़ेगी।

3 - तुम्हारे यहाँ एक शब्द हैं "गो-रख-धंधा " मतलब गौ को घर मैं रख तो तेरा धंधा अच्छा चलेगा। बरना गोरखधंधा --

4 - घर मैं आप गौ माता का घी तो ला ही सकते हो। उस घी को अपने नाक मैं जरुर डालना क्योंकि १०१ बिमारिओ सिर्फ नाक मैं गाय का घी डालने से ख़तम हो जाती हैं जैसे की चश्मे का नंबर , पित्त , उलटी , फेफड़ो की कमजोरी , सर दर्द आदि बहुत सी बीमारिया चुटकी मैं ख़तम हो जाएगी। बोलो गौ माता की जय।
नयाल सनातनी संस्थापक ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच''

Sunday, September 14, 2014


सनातनी विचार !
विध्या की अधिष्ठात्री देवी जो माँ शारदे है वह अपनी शरणागत गौमाता के कल्याण में लगे लोगो को अपनी विध्या की अनेक कलाओं से तभी तक नवाजती है . जब तक जीव गौवंश के कल्याण के काम करता है .माँ शारदे का मन सिर्फ बातो से नहीं कर्म करने वालो के व्योहार से भरता है और प्रसन्न रहता है . अतः प्रतेक उच्च शिक्षा - दीक्षा के आकांक्षी मानव को गौसेवा, गौवंश के सुरक्षार्थ प्रचार- प्रसार जरूर करना चाहिए .और अधिक से अधिक लोगो को गौ-दीक्षा देनी चाहिए . ना जाने आपके द्वारा गौ-दीक्षित मानव कितना बड़ा गौ-भक्त निकल जाय . उसके द्वारा किया गया शुभ कर्म का कुछ अंस अपने आप आपके खाते में भी आने ही वाला है .
जिस तरह किसी जीव को गलत राह में फ़साने से आपको पाप कर्म का दोषी होने से दण्ड भुगता पड़ता है .उसी प्रकार जीव को सत कर्म की राह पर भेजने पर पुण्य लाभ का भागी भी अनायास मानव हो जाता है यह सनातन सत्य है .अतः गौ भक्ति के राह में आने वालो को सहयोगी बने रोड़े अटकने से आपके पुण्य नष्ट होने ही वाले है ..........
''नयाल सनातनी'' - संस्थापक अध्यक्ष ;-- सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार
सनातनी विचार !
आज हिंदी दिवस मनाया जा रहा है सबही हिंदी प्रेमियों को बधाई . पर शुद्द हिंदी और हिन्दुस्तान की बात वही कर सकता है सही माने में जिसने भारत का धर्म बैल द्वारा जोती गई खेती का अनाज खाया हो और धरती माता की ही प्रतिमूर्ति भारती गाय का दूध-दही-घी खाया हो .क्योकि हिंदी की जननी संस्कृत है . संस्कृत बिना गौ घृत खाये बगैर आती नहीं . कुछ लोगो को तो 14 सितम्बर को हिंदी की याद आती है साल भर अंग्रेजी में फेस बुक चलाते है ........गौ घृत खाओ हिंदी और हिंदुस्तान बचाओं .. जय हिंदी जय हिन्दुस्तान .''नयाल सनातनी'';-- गौ चरणों का दास

Wednesday, September 10, 2014

सनातनी विचार !
जब मनुष्य का जन्म होता है वह किसी भी धर्म, जाति,वर्ण या संप्रदाय में नहीं बल्कि परमात्मा का पुत्र-पुत्री के रूप में जन्म लेता है। फिर स्वार्थी मनुष्य उसे धर्म,जाति,वर्ण और संप्रदाय में बाटता है।  क्योकि उसे राजनीती करनी थी, राजनीती का मतलब जिस ओर ज्यादा संख्या उसका राजा। अब बताओं जो परमात्मा की सबसे बुद्दिमान कृति मानव- मानव में ही भेद करें वह श्री कृष्ण की सबसे ममतामयी और प्यारी कृति गाय का रक्षक सेवक कैसे हो सकता है ??? जिस गाय ने सिर्फ ममता लुटाना सिखाया है, अपने वंश के विनाशक कसाई को भी दूध देकर प्यार करने का सन्देश दिया है। उसके भक्त अपनी ही माँ, बहन, बेटी, ब्राहमण,असहाय, बुद्दी से हीन,दुर्बल और कमजोर से ईर्ष्या करे यह उसकी माँ शारदा द्वारा प्रदत बुद्दी और बल का कौशल नहीं हो सकता यह तो सिर्फ अपने कमजोर बुद्दी में लोगो को भ्रमित करने का एक मात्र सडयन्त्र ही हो सकता है ।  
                                        ''नयाल सनातनी;; ;-- सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार

Tuesday, September 9, 2014

सनातनी विचार !

सधर्मो यो दयायुक्त

स धर्मो यो दयायुक्तः सर्वप्राणिहितप्रदः ।
स एवोत्तारेण शक्तो भवाम्भोधेः सुदुस्तरात् ॥

जो दयायुक्त और सब प्राणियों का हित करने वाला हो वही धर्म है । वैसा धर्म ही सु-दुस्तर भवसागर से पार ले जाने में शक्तिमान है। सनातन शास्त्रों में धर्म यानि गौमाता का पुत्र, भगवान शंकर का बाहन नन्दी बैल को कहाँ गया है. जो आज के समय में नष्ट किया जा रहा है यानि अपने को नष्ट करने की प्रक्रिया मानव ने खुद सुरु कर दी है . यह बहुत सोचनीय एवं गंभीर विषय है . .

      ’’नयाल सनातनी’’ ;-सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार

Saturday, September 6, 2014

सनातनी विचार ! सनातन शास्त्र अनुसार ---
जो मानव बोले कम और कर्म ज्यदा करे वह श्रेष्ठो की श्रेणी में आता है . और जो बके अधिक कर्म कम करें वह अधम की श्रेणी में आता है .इसलिए कहने से पहले एक बार सोचो क्या आप वह कर्म कर सकते हो जिसको पहले ही बक चुके हो ? नयाल सनातनी'';-- सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार
सनातनी विचार !
समय सब का आता है . पूर्व जन्म में किये अच्छे कर्मो से वर्तमान में सच्चे और अच्छे लोग परोपकार करते है. गौ सेवा कर अपना परलोक सुधारते है . शौतान गौ-हत्या कराते है अपने पितरों को नरक पहुचाते है .

        ''नयाल सनातनी'' ;-- सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार

Friday, September 5, 2014

सनातनी विचार !
झूट की उम्र ज्यादा लम्बी नहीं होती .अपने आस-पास झूठ का गुब्बार बना लेने वाले को एक दिन जब गुब्बारा फूटता है . तो बहुत बड़ा शर्म-नाक हादसे का शिकार होना पड़ता है .
इस लिए सावधान झूठे की गति नहीं वह लाखों वर्ष तक प्रेत बन कर इसी माया के जाल में फंसा रह जाता है .और अपनों को भी शर्म सार कर देता है अपनी गलत आदतों के कारण . इस लिए सावधान वही बोलो जो कर सकते हो .

                                ''नयाल सनातनी''

Thursday, September 4, 2014

7 नवम्बर को प्रतेक व्यक्ति के हाथ में एक स्लोगन वाला बैनर -पोस्टर होना चाहिए .जो गाय और बैल को बचाने के सन्देश के आलावा चारागाह, गौशालाओं, आदि समस्या को उजागर करेगा .सभी गौ प्रेमी आयें इस दौड़ में . साथ ही अपने -अपने स्वरचित स्लोगन के साथ दौड़ में सामिल होकर अपने कर्तव्य का निर्वाह करे . ये स्लोगन प्रतेक गौ-भक्त की बुद्दिमता का परिचय भी देगा .जिसे विश्व की मिडिया के माध्यम से सरकार को एवं विश्व को एक पवित्र सन्देश जायेगा .''नयाल सनातनी''

Wednesday, September 3, 2014

जिस-जिस ने गौ माता का दूध पिया है। भारत वर्ष में ही नहीं विदेश में भी वे आ जाये ७ नवम्बर को गौ-शहीद दिवस पर ''गय्या दौड़'' में।इस दौड़ का नेत्रुक्त स्वयंग गौ माता करेगी और देश के सभी गौ भक्त संतो के सानिध्य में होगी। और सारा देश दौड़ेगा मुख्य दौड़ दिल्ली में होगी बाकि सारा देश के गौ-भक्त अपने - अपने शहर में भी दौड़ेंगे। इस दौड़ का प्रचारक ;-- नयाल सनातनी

Wednesday, August 27, 2014

सनातनी विचार !
सनातन  शास्त्रों के अनुसार गाय के एक आँख में सूर्य, एक में चंद्रमा , शरीर में सबही शनि- राहु-केतु आदि ग्रहों का वास है .अब इन ग्रहों को मनाने गाय को तो 10 -20 रुपये का घास खिलाया नहीं .ग्रह भूख से तड़फ रहे है . लगे शनि आदि ग्रहों की शांति में लाखों का अनुष्ठान करने ! नवों ग्रहों, पितर देवो को मनाने का सबसे आसन और कम खर्चीला और सटीक तरीका कोई है तो गौग्रास का दान,गौ हित में कार्य ..........
''नयाल सनातनी'';--- सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार
सनातनी विचार !
आलोचनाओं को अपना हथियार ना बना कर प्रोत्साहन को स्वरचित परमाणु बम बनाइये .क्योकि प्रोत्साहन का बम सच में बम-बम भोले और श्रीमननारायण के आशीर्वाद जैसा अमृत है . वह अपाहिज को भी पर्वत के शिखर पर ले जाकर पर्वत विजयी बना सकता है .
॥ यत्कृपा तमहं वन्दे परमानन्द माधवम् ॥

                              ''नयाल सनातनी''
एक कसाई किसी मुर्ख स्वार्थी के घर से ढाई लीटर दूध देने वाली गाय ले आया . कसाई को मांस से मतलब था वह दूध से भरे थनों के तरफ ध्यान ही नहीं दे रहा .तब गौ माँ अपने संत स्वाभाव बस राम्हाने लगी यह देख पडोसी ने कहाँ इसके थन दूध से भरे हुए है दूध निकल ले. उस कसाई को आराम से ढाई लीटर दूध दिया मेरी गौ माँ ने फिर उस कसाई ने काट कर मांस बेच दिया .गौ माँ तो सबको गले लगाती है कसाई काटने से पहले दूध निकाल लेता है .वह यह नहीं कहती की तू काट रहा है मुझे पहले दूध क्यों दू .इतनी सरल कोई होगा संसार में ? फिर भी हम उसकी ममता को नहीं समझ पाते अपने सुख के जतन में लगे है ............धिक्कार हमारे स्वाभाव को .नमन उस देवी के स्वाभाव को .

Saturday, August 23, 2014

सनातनी विचार !
  सनातन हिन्दू धर्म में शास्त्रनुसार
5 संप्रदाय प्रायः माने गए है।
१- वैष्णव संप्रदाय,
२- शैव संप्रदाय
३ - शाक्त संप्रदाय,
४- सौर संप्रदाय,
५- गाणपत्य संप्रदाय।-
गाणपत्य संप्रदाय में छः उप संप्रदाय है। १- महागणपति संप्रदाय २- हरिद्रागणपति संप्रदाय ३- उच्छिष्टगणपति संप्रदाय,४- नवनीतगणपति संप्रदाय,
५- स्वर्ण गणपति संप्रदाय,६- संतान-गणपति संप्रदाय। गणेश की उत्पति माँ पार्वती अपने रक्षा हेतु अपने शरीर के मैल से की थी है।
कालांतर में पार्वती देवी ने गाय के रूप में महर्षि मार्कण्डेय को उत्तराखंड के बागेश्वर धाम में दर्शन दिये थे । अब इस गुड रहस्य से भी पर्दा उठा जाना चाहिए की श्री गणेश जब गाय के गोबर से जन्म लिए होंगे जब माँ पारवती गौ रूप में धरती पर विचर रही थी। इसलिए ही गोबर के गणेश बनाने की परम्परा पड़ी। और गोबर से गणेश की प्रतिमा बनाने से भगवान गणेश अति प्रसन्न होते है सभी मनोकाना पूर्ण करते है।
                                  ''नयाल सनातनी'';--''सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार''

Friday, August 22, 2014

विज्ञान की दृष्टी में गौवंश।
1.जर्सी नस्ल की गाय का दूध पीने से 30 प्रतिशत कैन्सर बढने की संभावना हैं। -----  नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट आॅफ अमेरिका
2.गाय अपने सींग के माध्यम से काॅस्मिक पाॅवर ग्रहण करती हैं। ------ रूडल स्टेनर,जर्मन वैज्ञाानिक
3.गोबर की खाद की जगह रासायनिक खाद का उपयोग करने के कारण महिलाओं का दूध दिन प्रतिदिन विषैला होता जा रहा हैं। ----- डाॅ. विजयलक्ष्मी सेन्टर फाॅर इण्डियन नोलिज सिस्टम
4.गौमूत्र के उपयोग से हदय रोग दूर होता है तथा पेशाब खुलकर होता है कुछ दिन तक गौमूत्र सेवन से धमनियों में रक्त का दबाव स्वाभाविक होने लगता हैं, गौमूत्र सेवन से भूख बढती है, यह पुराने चर्म रोग की उत्तम औषधि है। ----- डाॅ. काफोड हैमिल्टन, ब्रिटेन
5.गौमूत्र रक्त में बहने वाले दूषित कीटाणुओं का नाश करता है। ---- डाॅ.सिमर्स, ब्रिटेन
6.विश्व में केवल गौवंश ही ऐसा दिव्य जीव है जो अपनी निश्वास में आॅक्सीजन छोडती हैं। ----- कृषि वैज्ञानिक डाॅ. जूलिशस एवं डाॅ. बुक जर्मन
7.शहरों से निकलने वाले कचरे पर गोबर के घोले को डालने से दुर्घन्ध पैदा नहीं होती है व कचरा खाद के रूप में परिवर्तित हो जाता हैं। --- डाॅ.कान्ति सेन सर्राफ मुम्बई
8.गौ दूध में विद्यमान सेरिब्रासाइय मस्तिक और स्मरण शक्ति के विकास में सहायक होती हैं साथ ही एम.डी.जी.आई. प्रोटीन के कारण रक्तर्कोँणकाओं में कैंसर प्रवेश नहीं कर सकता हैं। ----- प्रो. रानाल्ड गौ रायटे कारनेल विश्व विद्यालय
9.समस्त दुधारू प्राणियों में गाय ही एक ऐसा प्राणी हे जिसकी बडी आंत 180 फीट लम्बी होती है इसकी विशेषता यह है कि जो चारा ग्रहण करती है उससे दुग्ध में केरोटीन नामक पदार्थ बनता है यह मानव शरीर में पॅंहूचकर विटामीन ए तैयार करता है तो नेत्र त्योति के लिए आवश्यक है। -----डॉ अनाम
10.गौमाता के गोबर में हैजे के कीटाणुओं को समाप्त करने की अद्भूत क्षमता होती है। ----- प्रसिद्ध डाॅ. किंग मद्रास
11.जिन घरों में गौमाता के गोबर से लिपाई-पुताई होती है वह घर रेडियों विकिरण से सुरक्षित रहते है। ---- प्रसिद्ध वैज्ञानिक शिरोवीच, रूस
                                     देसी गाय के घी के वैज्ञानिक लाभ-
1- देसी गाय का घी हृदय रोगियों के लिए भी लाभदायक है व मोटापा कम करता है l
2- देसी गाय का 10 ग्राम घी का दीपक जलने से वातावरण शुद्ध होता है l
3- देसी गाय का घी आसानी से पच जाता है तथा मानव शरीर में (Lubricant) का कार्य करता है l
4- देसी गाय का घी बच्चो, गर्भवती महिलाओ व युवाओं के लिए आवश्यक व लाभदायक है l
5- देसी गाय के घी में (Butyric) एसिड होता है, जो कैंसर और वाइरल जेसे रोगों की रोकथाम करता है l
6- देसी गाय का घी सुक्ष्म कण का होता है, जो दिमाग की प्रत्येक नस नाडी तक पहुंचकर स्मरण शक्ति बढाता है l
7- देसी गाय का घी त्रिदोष (कफ ,वात ,पित्त) नासक है l
                         देश एवं सर्वजन हित में जारी --सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार द्वारा
वेद -शास्त्रो, संतो और विद्वानों ने गौ-माता के बारे मे इस तरह कहा :
१- गौवंश की रक्षा मे देश की रक्षा समाई हुई है। --  पण्डित मदन मोहन मालवीय जी |
२- गौवंश की रक्षा इश्वर की सारी मूक सृष्टी की रक्षा करना है,भारत की सुख समृधि गौ के साथ जुडी है। ----- महात्मा गाँधी जी
३- समस्त गौ वंश की हत्या कानूनन बंद होनी चाहिए.अब भारत आजाद है |--गौ प्राण करपात्रीजी महाराज
४- गौ का समस्त जीवन देश हितार्थ समर्पित है,अतः भारत मे गौ वध नहीं होना चाहिए |----माता आनंदमयी जी माँ
५- यही आस पूरण करो तुम हमारी, मिटे कष्ट गौअन, छूटे खेद भारी |----गुरु गोविन्द सिंहजी |
६- भारत मे गौवंश के प्रति करोडो लोगो की आस्था है, उनकी उपेक्षा नहीं की जानी चाहिए |---लाल बहादुर शास्त्री
७-  सम्पूर्ण गौवंश परम उपकारी है | सबका कर्तव्य है तन, मन, धन लगाकर गौ हत्या पूर्ण रूप से बन्द करा----सेठ जुगल किशोर बिडला जी
८- जब तक भारत की भूमि पर गौ रक्त गिरेगा तब तक देश सुख-शांति ,धन-धान्य, से वंचित रहेगा|----गौ प्राण हनुमान प्रसाद पोद्दारजी |
९- सम्पूर्ण गौ वंश हत्या बंद कर के राष्ट्र की उन्नति के लिए गौ को राष्ट्र पशु घोषित कर भारत सरकार यशजीवी बने |--गौ रक्षा हेतु ७३ दिन तक अन्न-जल त्याग देने वाले पूरी के शंकराचार्य स्वामी निरंजन देव तीर्थ जी महाराज |
१० - जब तक भारत भूमि पर गौमाता के रक्त की एक भी बूंद गिरेगी तब तक कोई धार्मिक अनुष्ठान सफल नहीं होगा। ----- पूज्य देवराहा बाबा
११ - धेनु. सदनम् रयीणम्-गाय सम्पतियों का घर है। --------- अथर्ववेद
१२ - -गौमात्रा न विधते-यानी गौ अनुपमेय है। ---------- यजुर्वेद
१३  -गाय निरपराध जीव है, उसे नहीं मारना चाहिये।  ------- ऋग्वेद
१४  -गौहत्या जैसा घृणित दुष्कृत्य करने वाले का सिर धड से अलग कर देना चाहिये। ------ ऋग्वेद   .
१५ - श्रीकृष्ण ने बृजमण्डल में गौ चारण नंगे पाॅंव किया। ------ श्रीमद्भागवत महापुराण
१५  - गौ द्विज-धैनु देव हितकारी, कृपा सिन्धू मानस तनूधारी। ------- रामचरितमानस
१७  -  जो सवेरे शयन से उठकर भक्ति पूर्वक गौ की परिक्रमा करता है उसके द्वारा समूची पृथ्वी की परिक्रमा हो जाती है इसमें कोई संशय नहीं हैं। ---- महाभारत श्रीकृष्ण-युधिष्ठर संवाद्
१८ - गौहत्या की अनुमति देने वाला काटनेवाला-पकाने वाला, खरीदनेवाला, बेचने वाला परोसने वाला खाने वाला सभी गौहत्या के दोषी है, इनको मत्यु दण्ड मिलना चाहिये। ---- महर्षि मनु
१९ - गौरक्षा से ही मानव मात्र सुरक्षित हो सकता है। --------- भगवान महावीर स्वामी
२० - एक बैल को मारना-एक मनुष्य को मारने के समान है। ---- --- ईसा मसीह
२१ - गाय का दूध रसायन, गाय का घी अमृत और गाय का माॅंस बीमारी हैं। ------- पैंगंबर मोहम्मद साहब
२२ - गाय की कुर्बानी इस्लामी धर्म का नियम नहीं हैं। ----- फतबे हुमायुनी
२३  -गौ हत्या हेतु मुस्लिम आग्रह मूर्खता की पराकाष्ठा हैं। ----सुलतान अहमद खाॅं
२४-  ना कुरान, ना ही अरब प्रथा-गौ कुर्बानी की इजाजत देती हैं। -------- हकीम अजमल खाॅं
२५  - राम मंदिर, राम सेतु, आदि मुद्दो से भी पहला मुद्दा गौ हत्या बंद कानून बनाने के लिए सरकार को बाध्य करना होना चाहिए |-----राजर्षि धर्मवीर ठाकुर जयपाल सिंह ''नयाल सनातनी''  ---संस्थापक अध्यक्ष ;--''सर्वदलीय गौरक्षा मंच''
सनातनी विचार !
हमारे एक मित्र है जो पिछले एक साल से हर महीने गोवर्धन की परिक्रमा में लगातार जा रहे है। अब तक उनके 12 यात्रा हो चुकी है जिसे वे अपने मित्रो के साथ गाज़ियाबाद से गोवर्धन तक की यात्रा कार से करते है। साल भर की गोवर्धन यात्रा में उनका लगभग 20 से 24 हजार का यात्रा खर्चा आया ही होगा ।
गोवर्धन का मतलब है ! गायों का संवर्धन करना या सरल भाषा में गाय के गोबर का पहाड़ बनाना । अब गाय के गोबर का पहाड़ तो तभी बनेगा ना जब गाय पालोगे ! गोवर्धन ''गोबर + धन'' यानि गोबर से धन कमा ,खेतो में डाल सोना उगा। कंडे बना, धुप बना,कैचुवा खाद बना ,गैस तैयार कर जलावन में ला रोटी पका आदि कई सारे उपयोग है।  गोबर के तो जो लिखने बैठंगें तो कई पन्ने भर जायेंगे । आधिक उपयोग जानने के लिए ''नयाल सनातनी'' के पुराने लेखो से ढूड लें इंटर-नेट से। पर कुछ लोग नासमझी में गोवर्धन पहाड़ की नंगे पाँव परिक्रमा करते है। वे भगवान श्री कृष्ण की सांकेति शब्दावली का मतलब आज तक नहीं निकाल पाए ना ही उनकी गूढ़ बातों अर्थ ही नहीं समझ पाये। पण्डे-पुजारियों के जाल में फ़सं कर मन -धन- जन शक्ति का ह्रास किये है। वह भी येसे पंडो की बातो में आके जिन्होंने गलत ईतिहास पढाया जिन्होंने कहाँ की भगवान परशुराम ने 21 बार धरती को क्षत्रियविहीन कर दिया था। जो परशुराम क्षत्रिय कुल में जन्मे श्री राम को नमन करते थे। गहराई से सोचिए एक ही बार क्षत्रियों से विहीन धरती पर दूसरी बार कैसे क्षत्रियों का जन्म हुआ ? कभी हिन्दू- मुस्लिम के नाम पर कभी ब्राह्मण - क्षत्रिय के नाम पर कभी छोटे बड़े के नाम पर हमें सिर्फ बाटा गया।  क्या आप बाटने वाला अगर अपना खास सगा भी हो तो उसको पुजोगे ? या जोड़ने वाले को ! आपस में लड़ा कर कुछ लोगो ने अपना उल्लू सीधा किया आज भी कर रहे है पहाड़ पुजा कर। पत्थर पूजा कर। क्या गोवर्धन में जो लाखों लीटर दूध चडाया जाता है उससे हजारो लोगो को बलवान नहीं बनाया जा सकता ? क्या अब जो कैमिकल वाला दूध गोवर्धन पर्वत पर डाला जा रहा है उससे पर्वत नष्ट नहीं हो रहा इस ओर किसी गोवर्धन में रहने वाले का ध्यान है ? या गोवर्धन को भी कमाई का साधन बना दिया है।
 वे निंदा करे हमारी हमें फर्क नहीं पड़ता पर सत्य के मार्ग को छोड़ अगर नर्क भी मिले तो स्वीकार है हमें। हमने देखा है जो निंदा करते है वे हमारे ही शब्दों को तोड़ - मरोड़ कर पेस कर देते  हुए वाह-वाही लुट लेते है और खूब निंदा भी करते है। धन्य है उनकी कुटील चाल। इस चाल को भी नमन है हमारा।  
कास आज भी लोग सही मार्ग का दर्शन कर उस पर चलते तो भारत फिर सोना उगलता,लोगो को समझ आ जाता गोवर्धन का सही अर्थ तो आज तक लाखो गौवंश की जान बच गई होती ! मानव गाय को सिर्फ कुछ रुपियों का हरा चारा ही खिला दे और भारतीय गौवंश की सेवा कर अपने घर पर ही गाय की सात परिक्रमा कर ले तो हजारो-लाखों रुपये खर्च कर जो यात्रायें की जाती है उससे होने वाले पुण्य से कई गुणा अधिक पुण्य उनको गौमाता की कृपा प्रसाद से प्राप्त होता है ! बोनस में कई गौवंश को बचाने का पुण्य अलग से प्राप्त होता जो देवताओं को भी दुर्लभ है। अथर्ववेद में गाय को 'धेनु: सदनम् रमीणाम' कहा गया है और इसे धन-संपत्ति का भंडार कहा गया है।
कबीर दास कहते रहे लोग समझे नहीं। पाहन पूजे हरि मिले तो मैं पूजूँ पहार । ताते यह चाकी भली पीस खाय संसार।।
संत कवि रविदास जो कबीर दास के गुरुभाई थे। गुरु भाई अर्थात दोनों के गुरु ब्रह्म तत्व को जानने वाले स्वामी रामानंद थे। उन्होंने भी सांकेतिक भाषा में यही समझाने की कोशिश की -- मन चंगा तो कठौती में गंगा। येसे ही अनेक संतो ने जो किसी भी कक्षा तक नहीं पड़ें जिनको नीच जाती का कह कर दुत्कार मिली उन्होंने बहुत कुछ संसार को दिया जैसे छातिसीगढ़ के संत घासीदास, काशी के चंडाल जिन्होंने शंकराचार्य को सत्य का दर्शन कराया। नवधा भक्ति से परिपूर्ण शबरी,पशु योनी में जन्मा गिद्ध राज आदि।  समझो तो काम का, बरना हराम का।  मेरा क्या ? 
''नयाल सनातनी'' गौ-चरणों का दास ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार''
सनातनी विचार !
हमारे एक मित्र है जो पिछले एक साल से हर महीने गोवर्धन की परिक्रमा में लगातार जा रहे है। अब तक उनके 12 यात्रा हो चुकी है जिसे वे गाज़ियाबाद से गोवर्धन तक की यात्रा कार से करते है। साल भर की गोवर्धन यात्रा में उनका लगभग 24 हजार का खर्चा आया है।
गोवर्धन का मतलब है ! गायों का संवर्धन करना या सरल भाषा में गाय के गोबर का पहाड़ बनाना । अब गाय के गोबर का पहाड़ तो तभी बनेगा न जब गाय पालोगे !
पर कुछ लोग नासमझी में गोवर्धन पहाड़ की नंगे पाँव परिक्रमा करते है। वे श्री कृष्ण की गूढ़ बातों का अर्थ ही नहीं समझ पाये। कास ऐसे लोग गाय को सिर्फ हरा चारा ही खिला देते तो हजारो रुपये खर्च कर जो उनको प्राप्त होता है उससे कई ज्यादा गुणा पुण्य उनको भारतीय गौ की सात परिक्रमा से प्राप्त हो जाता
जो गोवर्धन की यात्रा से मिलता है। बोनस में कई गौवंश को बचाने का पुण्य अलग .
 ''नयाल सनातनी'' सर्वदलीय गौरक्षा मंच

Thursday, August 21, 2014

सनातनी विचार !
श्रीराम मंदिर, राम सेतु, आदि मुद्दो से भी पहला मुद्दा गौ हत्या बंद कानून बनाने के लिए सरकार को बाध्य करना होना चाहिए.जब नित्य सूर्य उदय होने से पहले लाखों 33 करोड़ देवी-देवताओं के मंदीर ढहा दिए जा रहे है तो फिर एक राम मंदीर की बात ही क्यों ? 
पहले इन 33 करोड़ देवी -देवतों के सजीव मंदिरो को बचाओं फिर कुछ और बात करो .....

गौ भक्त जिस-जिस वस्तु की इच्छा करता है वह सब उसे प्राप्त होती है | स्त्रियों मे भी जो गौओं की भक्त है, वे मनोवांछित कामनाएं प्राप्त कर लेती है | पुत्रार्थी पुत्र पाता है, कन्यार्थी कन्या, धनार्थी धन, धर्मार्थी धर्म, विद्यार्थी विद्या और सुखार्थी सुख पा जाता है | विश्व भर मे कही भी गौभक्त को कुछ भी दुर्लभ नहीं है | यहाँ तक की मोक्ष भी बिना गाय के पूंछ पकडे संभव नहीं | वैतरणी पर यमराज एवं उसके गण भयभीत होकर गाय के पूंछ पकडे जीव को प्रणाम करते है | 
''नयाल सनातनी'' ;--सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार
काशी अगर मोक्ष नगरी है तो वृन्दावन गौलोक -धाम है...---
सनातनी विचार ----
आज हम कुछ खास बात बताएँगे जो शायद बहुत कम लोगो को मालूम हो !
सनातन शास्त्रों के गहन अध्यन से मालूम पड़ता है, की भगवान श्री कृष्ण हर कल्प में अवतार लेते है।
इस कल्प के इसबार के द्वापर युग में भगवान विष्णु ही 16 कलाओं से सज्जित होकर श्री कृष्ण के रूप में अवतरित हुए थे। अब तक गाय के शरीर पर जितने रोयें है, उतने कल्प बीत चुके है। और परमात्मा के प्रतिनिधि उतने बार द्वापर युग में कृष्ण के रूप में अवतार लिए है।
ब्रह्म वैवर्त पुराण के अनुसार एक कल्प में तो भगवान शंकर ने राधा और देवी पार्वती ने कृष्ण के रूप में अवतार लिया है। इसलिए कुछ परम सत्य को जानने वाले तपस्वी संत यह पूर्ण रूप से मानते है की काली और कृष्ण में कोई अंतर नहीं।
सनातन शास्त्रों के अनुसार जिस प्रकार काशी नगरी इस ब्रह्माण्ड में नहीं बल्किन भगवान शंकर के त्रिशूल पर बसा है। इस लिए संत कहते है कि काशी में कोई पाप ना हो जाय इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए क्योकि तीर्थो में किया पाप बज्रलेप हो जाते है। यानि इन पापो के प्रायश्चित ही नहीं।
वैसे ही भगवान का नित्य धाम वृन्दावन इस ब्रह्माण्ड में नहीं बल्कीन गाय के सिंघो में विराजमान है। इसलिए ही श्री कृष्ण को वृन्दावन अपने प्राणों से भी अधिक प्रिय है.
वृन्दावन में भी भूल से भी पाप नहीं होना चाहिए बरना किया गया पाप ब्रजलेप होना ही है।
यह बात गौर करने वाली बात है जिस प्रकार तीर्थो में जाने से तीर्थ के प्रभाव से पुण्य की प्राप्ति होती ही है। और पुण्य की मात्रानुसार इस लोक तथा पर लोक में भोग और मोक्ष की प्राप्ति होती है। उसी प्रकार तीर्थो में जाकर पाप करने से वहां के सतोगुण को दूषित करने के पाप के कारण मनुष्य का पाप प्रायश्चित योग्य नहीं रहता उसको मृत्य पश्चयात भारी यातनाएं भुगतनी ही पड़ती है।

सनातन सिद्दांतो के अनुसार - यतो शुभ कर्म ततो पुण्यः यतो पाप कर्मो ततो दण्डः
''नयाल सनातनी''--सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार
सनातनी विचार !
सनातन शास्त्रनुसार तीर्थो में एवं तीर्थो में रहने वालो को दान देने से दानी को अक्षय पुण्य प्राप्त होता ही है . वह हर जन्म में दानी बनकर ही जन्म लेता है .यानि कभी दरिद्र नहीं पैदा होता .
वैसे ही तीर्थों के नाम पर दान लेने वालो को भी ध्यान रखना चाहिए की दान जिस मकसद से लिया गया है वह उसी कार्य में लगे अगर गाय के नाम पर लिया गया है तो गाय को भर पेट खिलाएं , ब्राह्मण भोजन को लिया गया है तो ब्राहमणों को ही भोजन करायें,साधू - संतो के भंडारे हेतु दिया गया धन से भण्डारा ही हो, अगर तालाब -पोखरा - कुवाँ आदि खोदने सुधारने लिया गया है तो उसी में लगे, धर्मशाला हेतु दिया धन धर्मशाला ही बने ना की होटल की तरह कमाने का साधन .
ऐसा नहीं होने पर दान लेने वाला अंतिम क्षणों में बड़ी विपदा से प्राण त्यागता है और अगले जन्म में महा दरिद्र पैदा होकर दर-दर भीख मांगता है .
''नयाल सनातनी'' ;-- सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार

Wednesday, August 20, 2014

यस त्वं कृष्णे गते दूरम सः गाण्डीव धनवाना ,
सोचियोसी असोचयान रहसी प्रहाराण वधम अर्हसि ।।

हे दुष्ट अधर्मी गौ-विरोधी !
क्या तुम भगवान श्री कृष्ण और गाण्डीव धारी अर्जुन को अद्रश्य जान निर्दोष गाय को पीटने- मारने की हिम्मत करता है ।
तुम निर्दोष गाय को एकान्त में पीट रहे हो, इसलिए तुम अपराधी हो और तुम मृत्यु दण्ड देने के लायक हो। जिस सभ्यता में भगवान को भुला दिया जाता है, और अर्जुन की तरह गौ - भक्त योद्धा नहीं होता तब काले- कलयुग के साथी अधर्म का लाभ उठाके निर्दोष गाय-गौवंश को एकांत के बूचड़खानों में काटते है।
महाराज परीक्षित के आदेश अनुसार ऐसे हत्यारों को मार देना चाहिए। धर्मपरायण राजा के अनुसार जो मुजरिम गाय को काटता है उसे मौत की सजा दे देनी चाहिए। बिलकुल वैसे ही जैसे किसी दुष्ट हत्यारे को दी जाती है जिसने मासूम बच्चे की हत्या एकान्त में की हो।
''नयाल सनातनी'' संस्थापक;-- ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार''

Tuesday, August 19, 2014

सनातनी विचार !
प्रत्येक गौ- भक्ति से जुड़ा गौ-प्रेमी, गौरक्षक अपने महान लक्षय ( गौ माता को राष्ट्रिय प्राणी बनाने ) की प्राप्ति करें। जीस महान उद्देश्य के लिए हजारों संतो ने अपना बलिदान दिया है अब तक। 

Monday, August 18, 2014

सनातनी विचार !
कही आपका प्रारब्ध भी सतकर्म, गौसेवा, गौरक्षा, गौ- कार्यों  में जाने से रोकता तो नहीं ? आप अपने संकल्प शक्ति से उसे तोडिये बरना गौलोक धाम तो सपना है बाकी संसार ही अपना है वाली कहावत आपके साथ भी हो सकती है !
हमने देखा है। 
हमारे कई मित्रों का जब वे किसी सत-कर्म की ओर कदम बढ़ाते है, उनको प्रारब्ध रोक देता है । जैसे नौकरी से छूटी नहीं मिली, व्यापर से समय नहीं मिला,शादी में जाना है, दोस्त के बेटे का जन्म दिन पार्टी है, पत्नी को आज बहुत खाँसी है,मेरा सर दुःख रहा है। आदि अनेक छोट कारण ही सत कर्म से मनुष्य को रोकते है। पर मजबूत इरादो और भाग्यशाली मानव इन सब छोटे कारणों को अनदेखा कर आगे बढ़ जाता है।  और अपने खाते में सतकर्मो की लम्बी लिष्ट जमा कर लेता है।
                      ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार''

Saturday, August 16, 2014

सनातनी विचार !
जन्माष्ठमी पर विशेष ! श्री कृष्ण का असली साथी अन्न दाता किसान और गौ-गौवंश ये सुखी तो सब सुखी, ये दुखी तो संसार दुखी .......

एक शहर की बड़े घर की बेटी एक पड़ें लिखे गावँ के गौ-भक्त किसान माँ- बाप के नवजवान बेटे से शादी कर लेती है। खूब दहेज़ साथ में आता है। और साथ में दहेज़ के साथ बहुत बड़ा अहंकार भी आ जाता है।
एक दिन बहु सीधे-साधे ससुर जो बहुत धार्मिक और गौ- प्रेमी किसान थे। उनके सामने आती है और बार-बार अपने नाख की बहुत सुन्दर और बहुत बड़ी नथ दिखाती है। जब ससुर ने ध्यान नहीं दिया तो बोल पड़ी यह मेरे पिता जी ने 1लाख 90 हजार में बनाया है। ससुर साधारण सा जबाब देते हुए बोले बेटी तुम्हारे पिता जी का धन्यबाद जरुर करना, साथ ही उस परमात्मा का शुक्र भी कर लेना जिसने नाख दी अगर नाख ही नहीं होती तो इस नथ का अहंकार कैसे दिखा पाती ???

गौ-भक्त,गौ सेवक किसान पर किसी का अहंकार टिकता नहीं, गौ-कृपा से गौ-भक्तों के साथ के कारण अन्य साधारण व्यक्ति का अहंकार भी जल्द नष्ठ हो जाता है । अहंकार नष्ट होते ही कार्यों में और दिल में शांति का पथ प्रसस्त हो ही जायेगा तब कृष्ण कृपा को तो आना ही है जीवन में .
''आज श्री कृष्ण की हर्द्दिक बधाई सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार की ओर से'' ------
सनातनी विचार ! 
एक शहर की बड़े घर की बेटी एक पड़ें लिखे गावँ के गौ-भक्त किसान माँ- बाप के नवजवान बेटे से शादी कर लेती है। खूब दहेज़ साथ में आता है। और साथ में दहेज़ के साथ बहुत बड़ा अहंकार भी आ जाता है। एक दिन बहु सीधे-साधे ससुर जो बहुत धार्मिक और गौ- प्रेमी थे। उनके सामने आती है और बार-बार अपने नाख की बहुत सुन्दर और बहुत बड़ी नथ दिखाती है। जब ससुर ने ध्यान नहीं दिया तो बोल पड़ी यह मेरे पिता जी ने 1लाख 90 हजार में बनाया है। ससुर साधारण सा जबाब देते हुए बोले बेटी तुम्हारे पिता जी का धन्यबाद जरुर करना साथ ही उस परमात्मा का शुक्र भी कर लेना जिसने नाख दी अगर नाख ही नहीं होती तो इस नथ का अहंकार कैसे दिखा पाती ??? गौ-भक्त पर किसी का अहंकार टिकता नहीं, गौ कृपा से गौभक्त के साथ के लोगो का भी अहंकार भी जल्द नष्ठ हो जाता है । ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार''

Thursday, August 14, 2014

सनातनी विचार ! स्वतंत्रता दिवस विशेष - 15 अगस्त ,स्वतंत्रता दिवस की हर्द्दिक बधाई ---
देश के 15 वे प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र दामोदर दास मोदी जी आज भारतीय मानव जाति के लिए आजादी का दिन है, खुशियों का दिन है,15 अगस्त का दिन है, हम सबकी स्वतंत्रता का दिन है, गुलामी से मुक्ति का दिन है। हम सब भारत वासी आजाद है। खुली हवा में साँस भी ले रहे है, पर इस देश की अर्थ व्यवस्था की रीड ''गौमाता'' -''गौवंश'' जिसने हमेशा अपने वंश का बलिदान ( आजादी के बाद 200 करोड़ से भी अधिक ज्यदा गौवंश का बलिदान ) देकर हमारे रगो में भारत को आजाद करने की शक्ति ( खून-दूध ) भरा था आज भी गुलाम है। जिसने आपको प्रधान मंत्री की कुर्सी तक पहुचाने की शक्ति वाला अनाज पैदा कर दिया। हमें कलम से आप जैसे देश भक्तों को जगाने की शक्ति प्रदान की, उनके वंश के साथ आज भी खौलते पानी से खाल खीचने वाला वह अंग्रेजी दण्ड का सिलसिला जारी है।
महोदय, क्या आपको पिलाये गये गौ - माँ के दूध में वह शक्ति है, जो आज से पहले वाले प्रधान-मंत्रियों को पिलाये गए दूध में नहीं दिखी माँ के कष्ट हरने की शक्ति ? अगर नहीं तो धिक्कार है हमारी आजादी पर माँ आज भी गुलाम है, गौ-माँ को अपने वंश को बचाने जान के लाले आज भी पड़े है , माँ अपने वंश को मिटते देख खून के आँसू आज भी बहा रही है, और बेटा 68 वा स्वतंत्रता दिवस लाल किले से झण्डा फहरा कर मना रहा है, मना रहा है।
फिर भी मैं माँ का नालायक बेटा यही कहूँगा स्वतंत्रता दिवस बधाई,स्वतंत्रता दिवस बधाई । लाल किले को फतह करने वाले मोदी जी स्वतंत्रता दिवस की बधाई...................'' सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार'' भारत देश

Wednesday, August 13, 2014

सनातनी विचार !
किसी से कुछ पाने के प्रलोभन से मनुष्य पराधीन हो जाता है । और अधिक जीने के इच्छा से ही मृत्यु का भय बना रहता है।
अगर हम यह सोच ले की हमें अब किसी वस्तु की आवश्यकता नहीं ( लालच को त्याग दें ) तो फिर कितना ही धनवान हो हमें उसके बड़ेपन से कोई फर्क नहीं पड़ेगा।बड़े से बड़ा राजनेता, व्यापारी या विद्द्वान के सामने हम सहज होंगे सामान्य स्तिथि में।
और मृत्यु तो अटल है, अभी भी आ सकती है। कभी भी आ सकती है, यह समझ में आजाये तो, फिर मृत्यु का भय भी चला जायेगा। 
फिर जो स्थिति होगी वह परमहंस की स्तिथि होगी। और इस परमहंस की स्थिति में मनुष्य केवल ''गौमाता'' की कृपा से पहुच सकता है। शुद्द गव्य पदार्थो का सेवन करके जैसे पूर्व में हमारे संतो, ऋषि- मुनियों ने यह स्तिथि पाई थी,परमहंस की स्तिथि। ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार''

Tuesday, August 12, 2014

सनातनी विचार ! 
भारत में जन्म ले या विदेश में अगर हिन्दू-सनातन धर्मावलम्बी का धन गौ-सेवा के काम में नहीं आता समझो वह धन नहीं मिटटी है।
सनातनी विचार !
 भारत में जन्म ले या विदेश में अगर हिन्दू-सनातन धर्मावलम्बी का धन गौ-सेवा के काम में नहीं आता समझो वह धन नहीं मिटटी है। ''नयाल सनातनी ''
सनातनी विचार !
ईर्ष्या ही सत मार्ग की सबसे बड़ी बाधक है। जो व्यक्ति दूसरे का यस,धन-दौलत, सुख-सौंदर्य, बल- बुद्दी और प्रतिष्ठा से ईर्ष्या करता है उसकी व्याधि की कोई औषधि नहीं है, बल्किन उसका रोग लाइलाज होते जाता है। ईर्ष्या उनको अधिक होती है जो कुछ कर नहीं पाते या करना नहीं चाहते सिर्फ निन्दा के आलावा ! इसलिए ईर्ष्या को निन्दा की बड़ी बहन कहा गया है। हो सके तो इन दोनों बहनों को अलक्ष्मी की तरह अपने से दूर रखें। इसलिए अपने मन को गौ-सेवा में लगायें गौ-भक्ति, गौ-सेवा जीवन में आ जायेगी तो इर्ष्या भाग जाएगी। अगर गौ- सेवा के बाद भी इर्ष्या मन से नहीं जाती तो समझो अभी गौ- भक्ति जीवन में आई ही नहीं अभी आप अपिपक्क है गौ-सेवा में ।  ''नयाल सनातनी''

Monday, August 11, 2014


सनातनी कार्य !
आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद नए बने राज्य ''तिलंगाना'' के मेदक जिल्ला के कोंडापाका विलेज में पहला गोकुल गौ-मंदीरम का निर्माण पूर्ण हुआ . इस अवसर पर पञ्च देव पूजन ,प्रधान देवी गौमाता की पूजा कर उद्घाटन करते हुए तिलंगाना के सिंचाई एवं संसदीय कार्य मंत्री एवं मुख्यमंत्री श्री के० चन्द्र शेखर राव के भतीजे श्री टी० हरीश राव जी , तिलंगाना राज्य के मुख्य सचेतक IAS श्री के० वी० रमणाचारी जी एवं चेयर मैंन श्री वनिसेत्टी राजमौल जी , गौशाला मुख्य प्रबंधक श्री डी० गुरुवै जी , श्री इ०अनज्या जी , श्री पी० वैकुण्ठं जी ,तिलंगाना प्रदेश में ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच'' की मुख्य प्रचारक श्रीमती बी ० पदमा जी जिन्होंने पुरे तिलंगाना में लोगो को गौमाता की ओर प्रेरित कर 108 इस तरह के गौ-मंदिरों के निर्माण करवाने का संकल्प लिया है .साथ में गोकुल गौमंदीरम गौशाला के मुख्य सलाहकार एवं ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच'' के राष्ट्रिय अध्यक्ष जयपाल ''नयाल सनातनी'' तथा अनेक सिद्दिपेट करीमनगर जिल्ला के गौ प्रेमी .

Saturday, August 9, 2014

सनातनी विचार !
आज राखी पर बहनों की रक्षा के साथ-साथ भाइयों को एक और संकल्प लेना होगा। संसार की पहली माँ, बहन, बेटी गाय की रक्षा का संकल्प। क्योकि आदित्यों की बहन, रुद्रों की माता, वसुओं की दुहिता है गौमाता। राखी (रक्षा संकल्प ) के इस महा पर्व पर देश की सभी भाई-बहनों को हर्द्दिक शुभ कामना निवेदक ;-- ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार''

Friday, August 8, 2014

राखी की सबही भाई-बहनों को हर्द्दिक शुभ कमाना....
येन बद्धो बलि: राजा दानवेन्द्रो महाबल:।
तेन त्वामभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥
जिस रक्षासूत्र से महान शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बाँधा गया था, उसी सूत्र से मैं आज तुझे बाँधती हूँ। हे मेरे प्यारे भाई यह बात बोलते हुए रक्षा बाधनी चाहिए प्रतेक बहन को राखी पर अपने भाई को और साथ में यह कहना चाहियें भाई तू मेरी रक्षा के संकल्प से कभी भी विचलित न होना।

देश की सभी मातायें-बहनों से एक निवेदन ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार '' एवं ''प्रखर साहित्यकार मंच परिवार '' के भाई भी करना चाहते है एक संकल्प अपने भाइयों को यह भी दिला दें की प्रतेक भाई को बहन-बेटियों और माता की रक्षा के साथ-साथ गौवंश की रक्षा का, गौमाता की रक्षा का भी संकल्प लेना जरूरी है क्योकि इस धरा की सबसे पहली बेटी - बहन - माता गाय है। ''नयाल सनातनी'' संस्थापक अध्यक्ष ;-सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार
सनातनी विचार !
जिस प्रकार राजनैतिक पार्टी के कुछ सच्चे प्रचारक चाहते है कि सभी लोग उनकी पार्टी के सदस्य बन जाय और उनकी पार्टी देश में सबसे बड़ी पार्टी हो .उसी प्रकार मित्रो हम गौ माता के चरणों के दास है हम भी यही चाहते है सब गौ माता के प्रचारक या सदस्य बन जाय क्या गलत है ? चाहे वे किसी भी पार्टी - मत संप्रदाय से क्यों ना जुड़े हो .''नयाल सनातनी''

Thursday, August 7, 2014

''सर्वदलीय गौरक्षा मंच'' के अनुरोध पर इस बार बहुत सारे गणेश प्रतिमा बनाने वालो ने गाय और बैल के साथ गणेश की मुर्तिया मुम्बई में बनाई है .जो गौवंश के प्रचार में मुख्य भूमिका निभाएंगे यह बात आज सर्वदलीय गौरक्षा मंच के संस्थापक अध्यक्ष जयपाल नयाल ने बताई .आगे उन्होंने बताया की इस बार दुर्गा पूजा से पहले वे पश्चिम बंगाल के दौरे पर जा के यही अनुरोध कोल्कता के कारीगरों से भी करेंगे .
जन-जन को भेजो सन्देश, घर लायें इस बार गाय-बैल वाले गणेश.
जो भक्त इस बार गाय-बैल वाले गणेश घर लायेंगे उनके सबही मनोकाना पूर्ण होंगे .''
गौ भक्त मित्रो खुशिया मनाओं इस बार गणेश जी गाय के साथ आ रहे है . इसका मतलब है अब गौमाता के अच्छे दिन आने वाले है ...जय गौ माता की .
नयाल सनातनी'

सनातनी विचार !
आखिर अच्छे दिन किसके ? आलू 30 रूपया प्याज 32 रूपया टमाटर 60 रूपया, अरहर दाल 117 रुपिया, चावल 47 रूपया आदि हर वस्तू के दाम 3 गुना बढे है .

गरीबो के अच्छे दिन कब आयेंगे ? व्यापारियों को तो उनकी सेवा का मेवा मिल रहा है . गरीब को अपने वोट की कीमत भी मिलेगी क्या ?

और सबसे बुरी निकृष्ठ और पाप की बात तो यह है गाय को दिया जाने वाला कुट्टी चारा भी जो 2 महीने पहले हैदराबाद में 4 रूपया था अब 6 रूपया से निचे नहीं दे रहे है व्यापारी कहते है मिल ही नहीं रहा इस रेट में .
गौ माता तेरे भी अच्छे दिन आयेंगे क्या ? ''नयाल सनातनी''

Wednesday, August 6, 2014

सनातनी विचार !
मन इधर - उधर भटकाने वाला जीवात्मा है .मन को बस में करो,उस पर अंकुश रखो .मन सुधरेगा तो जीवन सुधरेगा .मन को विवेक रूपी लकड़ी से रोज पीटो . भोग से जीव तृप्त हो ही नहीं सकता .त्याग में ही तृप्ति समायी है .

Tuesday, August 5, 2014

सनातनी विचार !
जब कोई आपके गलत कार्य का भी समर्थन कर रहा हो, तो समझो यह स्लो-पोइजन या चाटुकार है उसका कोई छुपा स्वार्थ है आपसे . मित्र भटक रहा हो उसपर भी उसको पोत्साहन सत्य आत्मा नहीं दे सकती . आपको आपकी अंतर आत्मा बता देती है की आप का मार्ग सत्य का है या असत्य का .जब सही सलाहकार या गुरु ना हो तो अपने आत्मा से ही जबाब मांगना चाहिए .आत्मा परमात्मा का ही रूप है .
१-- सनातनी विचार ! भगवान के तीन ही मुख है प्रसाद ग्रहण करने के। पहला गाय को दिया तृण सीधे भगवान को प्राप्त होता है और स्वाद की चर्चा तक गौमाता के यहाँ नहीं होती बस आशीर्वाद की प्राप्ति अवश्य होती है यह सनातन सत्य है।

२- सनातनी विचार ! भगवान का दूसरा मुख है ब्राह्मण का मुख जहां स्वादिष्ट भोजन से आशीर्वाद प्राप्त होता है और आपका दिया भोग नारायण तक पहुचता है।अंत में दक्षिणा आवश्यक है !!

३ - सनातनी विचार ! भगवान का तीसरा मुख है अग्नि जहाँ हवन द्वारा जड़ी- बूटी,जौ -तिल,ड्राय-फ़ूड और गौ घृत से भगवान को भोग लगाया जाता है जिसे साधारण मनुष्य अपनी गरीबी के कारण बहुत कम कर पाते है। जो कर पाते है उनका कल्याण और लोक कल्याण निश्चित है यह भी सनातन सत्य है।

मनुष्य को इन तीनो में से जो सरल उपाय हो उसको अपना कर भगवान को नित्य भोग जरूर लगाना चाहिए जिससे परमात्मा द्वारा प्राप्त मानव शरीर, जल, अग्नि, वायु, पृथवी और आकाश के उपभोग का कर्ज कुछ कम हो। वैसे तो माता- पिता और भगवान का कर्ज कोई चूका नहीं पाया पर स्वार्थी नहीं परमार्थी बनने की कोशिश मानव को जरूर करनी चाहिए यह शास्त्र मत है ।
''नयाल सनातनी'' संस्थापक अध्यक्ष ;--''सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार''