Saturday, November 12, 2016

एकमात्र वर्ड लीडर ( विश्व समुदाय ) के नेता घोषित होंगे मोदी जी !
भारत वासियों का ही नहीं एशिया का सौभाग्य है बहुत अर्से के बाद इस महाद्वीप में विश्व को सही मार्गदर्शन देने वाला नेता के रूप में उभर कर आये है भारत के प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी जी ।
जनवरी में ओबामा के कार्यकाल पूरा होते ही वर्ड लीडर के रूप में पूरा विश्व श्री मोदी जी को अपना लीडर के रूप में देखने लगेगा । क्योकि अमेरिका के अगले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुद अमेरिका वाले अपना नेता नहीं मान रहे उनके चुने जाने के बाद भी उनको अपना राष्ट्रपति मानने से इंकार कर रहे हैं तो पूरा विश्व कैसे स्वीकार करेगा अपना नेता ! वैसे भी ट्रम्प ने हमारे पीएम मोदी जी के नाम पर उनके इटायल पर चुनाव जीता है अमेरिका में । अबकी बार ट्रम्प सरकार !----
रही बात एक और माहशक्ति चीन और उनके राष्टपति वे सदा से माह स्वार्थी रहे है और वे हमेशा ही लकीर के फ़क़ीर ही रहेंगे । वे अपने ही देश के हित में सोचते है विश्व समुदाय की उनको कभी चिंता नहीं रही ! स्वार्थी मनुष्य को कोई भी अपना नेता क्यों मानेगा ? वह चाहे भारत का हो या विश्व में कही का भी वह कभी अच्छा लीडर नहीं हो ही नहीं सकता !
मोदी जी ने आज भारत में अनेको लोक-कल्याणकारी योजनाओं और सुधार वादि नीतियों , आधुनिक विश्व के साथ कदम-ताल करती योजनाओं से भारतीयों को तो अपना मुरीद बना ही दिया है उसके साथ पूरा विश्व को एक परिवार की तरह देख रहे मोदी की हर बात में हमारे सनातन संस्कारों की झलक से विश्व मोहित सा हो रहा है ( वसुधैवकुटम्बकं ) जो श्री राम का सपना था , जो श्री कृष्ण का सपना था , जो भरत की नीति थी , अशोक सम्राट का सपना था, जिस सपने से चाणक्य ने एक गडरिये को राजा बना कर विश्व कल्याण की ओर कदम बढ़ाया था । हमें गर्व होना चाहिए उसी नीति पर विश्व एक परिवार की नीति पर आज हमारे प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी चल रहे है ।
मोदी जी हर उस बात को विश्व मंच पर पूरे जोर-सोर से उठाते है जिनसे विश्व में शांति हो ! आतंकवाद ग्लोबल वर्मिंक आदि जिन मुद्दों को उठाने से विश्व के नेता पीछे भागते है ।
मोदी जी भारतियों के अलावा विश्व को भी अपना नाम भूलने नहीं देते ! जैसे ही लोगो का ध्यान उनसे हटता है वे कुछ ऐसा करते है कि विश्व उनकी ओर देखने लगता है । जैसे सर्जिकल स्ट्राइक, 1000 के नोट बंदी, रूस से लड़ाकू विमान खरीद सौदा, अफगानिस्तान को बड़ी मदद , नेपाल को मदद फिर चीन की ओर अधिक झुकाव होने पर पडोशी धर्म को समझाना, जापान से परमाणु समझौता , अमेरिका से बराबरी में आँखों में आँखें डाल कर बड़े-बड़े डील आदि ।
आने वाला कल भारत का बड़ा सुनहरा होगा यह अभी से लगने लगा है पूरा भारत ही नहीं विश्व समुदाय मान रहा है इसलिए विश्व के पूंजीपति भारत में अपना धन लगाने में सुरक्षित महसूस कर रहे है यह बहुत बड़ी उपलब्धि है भारत वासियों के लिए ।
मोदी जी हर मोर्चे पर सफल है पर एक मोर्चे पर उन्होंने देश के करोडो गौ भक्तों और गाय को माँ मानने वालों का दिल भी दुखाया है ! जो लोग गाय में अपने इष्ट की परिछाई देख गौवंश को बचाने में लगे है उनको ही किसी नीच व्यक्ति की सलाह पर गुंडा और नकली गौ भक्त का तमगा देकर अपने लिया प्रार्थना करने वाले हाथों में कमी करा गए ।
तिलक लगा कर सबसे पहले हम गौ भक्तों ने तुमको मोदी जी गौरक्षा हेतु भेजा था भूल न जाना भक्त अपने इष्ट के बल पर जो राजगद्दी देता है वह अपने इष्ट के बल पर छीन भी लेता है ! भक्त की भक्ति के आगे भगवान भी नत मस्तक हो जाते है ---
भगवान मोदी जी को यह सद बुद्दी जल्द से जल्द देंगे गाय का कत्लेआम इस देश में हमेशा के लिए बंद होगा यह हमें पूर्ण विश्वास है । गाय की रक्षा के बिना वर्ड लीडर तो बना जा सकता है ! पर श्री राम-श्री कृष्ण जैसा सदा में ह्रदय में बसने वाला, मंदिरों में पूजा जाने वाला देव नहीं बना जा सकता यह बात मोदी जी को समझ जानी चाहिए ।
जिस दिन मोदी जी ने गाय को अबध्या घोषित कर दिया, जिस दिन गौ माँ का कत्लेआम बंद हो गया इस देश से तो ।। मैं "नयाल सनातनी" गौ चरणों का दास ।। वह पहला व्यक्ति हूँगा जो मोदी जी को श्री राम-श्री कृष्ण की तरह पूजने लगूंगा ।
मोदी जी अधिक देर न करें गौरक्षा में हर रोज आपके और हमारे सिरों से 1 लाख माँ से भी बड़ी गौ माँऊ का साया उठ रहा है । ऐसा न हो आपका वह नारा सिर्फ सगुफा रह जाय जो चुनाओं में आपकी पार्टी ने वोट लेने के लिए लगाया था भोले -भाले गौभक्तों से ---
।। मोदी को मत दान-गाय को जीवन दान ।।
और भारत से सदा के लिए भारत की प्राण देशी गौवंश समाप्त हो जाय !!
"नयाल सनातनी" 9849702915
संस्थापक अध्यक्ष :- सर्वदलीय गौरक्षा मंच- हैदराबाद

Friday, November 11, 2016

AINA INDIA: गाय रक्षा के लिए सरकार पर धावा बोला- Report by S.Z...

AINA INDIA: गाय रक्षा के लिए सरकार पर धावा बोला- Report by S.Z...: सर्वदली य गौ रक्षा मंच एवं  गौरक्षा महा संघ गोपाष्टमी पर गाय की रक्षा के लिए केंद्र सरकार पर धावा बोला।  सर्वदलिये गौ रक्षा मंच एव...

Sunday, October 23, 2016

जन्तर-मन्तर पर घटित सच्ची घटना !
सनातन शास्त्रों का मत है भगवान भोले नाथ को भजने वाले शिव लोक में , देवी के उपासक मणिद्वीप में , गणेश को आराध्य मानने वाले गणेश के लोक में , सूर्य और विष्णु के सच्चे भक्तों का स्थान वैकुण्ठ में सुनिश्चित होता है ।
आध्यत्म के शिखर पर अपना स्थान बनाये आदि शंकर के नये अवतार संसार के अब तक के एक मात्र धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज किस मत किस देव के अनुयायी थे आखिरी दिनों में ही यह भेद खुला !
जब बिरला जी और बहुत बड़े-बड़े महाराज जी के अनुयायी उनसे एक बार जिद कर पूछे की आपके इष्ट कोन है ? आप नित्य बाबा विश्वनाथ शिव का अभिषेक करते है , जय राम श्री राम जय जय राम से अपना कोई भी प्रवचन आदि शुरू करते है और सबको गाय की भक्ति का उपदेश देते है और आजीवन गाय की लड़ाई लड़ते रहे है । तब बहुत भक्तों के प्रयास के बाद स्वामी जी ने बताया कि शिव-राम में अंतर नहीं मेरे इष्ट शिव के भी जो इष्ट है वही है "इष्ट देव मम बालक रामु" और गाय की भक्ति का उपदेश एवं गाय की सेवा रक्षा का उपदेश मैं इसलिए देता हूँ "गाय परम सत्य" है इस पृथ्वी लोक में । भगवान कृष्ण को आप भजन करों पर गाय की तरह भगवन कृष्ण प्रत्यक्ष नहीं दिखते और आपकी सेवा वे प्रत्यक्ष स्वीकार कर रहे है या नहीं वह आपको मालूम नही पड़ती ! पर गाय उस अनंत ब्रह्माण्ड नायक कृष्ण की वह कृति है जो उनके बामांग से प्रकट हुई है वह आपकी सब सेवा - पूजा प्रत्यक्ष स्वीकार करती है और साथ ही साथ अमूत भी देती है । यह भी श्री कृष्ण का वचन है कि जो गाय की सेवा करेगा उसको अन्य किसी देवता की पूजा-सेवा करने की आवश्यकता नहीं क्योकि एक समय 33 करोड़ देवो ने गाय के शरीर में ही निवास बनाया था । और जो भी गाय या गौवंश की सेवा करता है उससे वचन वद्द होने के कारण सभी देवी-देवता सदा प्रसन्न रहते है । अतः देवताओं की पूजा सेवा में भूल चुके होने से जो पूजा कर्म में अपूर्णता आ जाती है उसे गाय की सेवा- पूजा पूर्ण कर देती है । यानि गाय गौवंश की सेवा पूजा के बिना कुछ आपकी देवो की पूजा भी पूर्ण नहीं । बड़ा से बड़ा यज्ञ कर लो देवताओं को भोग पहुचाने जिससे देवता पुष्ट होते है । अगर गौ घृत से नहीं किया तो देवता स्वीकार नही करते । देवता बलहीन होना पसंद करते है पर गाय के घी से हुए बिना यज्ञ का भाग स्वीकार नहीं करते । आज जितने यज्ञ हो रहे हैं उनमें से वही यज्ञ पूर्णहुति को प्राप्त होते है जो गाय के बिना मिलावटी घी के सहयोग से होते है बर्ना सब आग में डाल कर बर्बाद किया राशन के सामान है ।
स्वामी करपात्री जी महाराज की बातों को ब्रह्म लेख मानने वाला उनका कट्टर अनुयायी मैं "नयाल सनातनी" जब पिछले साल 7 नवम्बर को अपनी बीमारी की वजह से गौ भक्त शहीद संतो को श्रद्धांजलि देने दिल्ली नहीं पहुच पाया जो की में कई वर्षो से लगातार जाता रहा हूँ तो बड़ा आत्म ग्लानि से भर गया बिस्तर में लेट-लेट संकल्प कर लिया 7 को 3 से गुणा करने से जो योग आएगा उतने दिनों तक जन्तर-मन्तर पर बैठ कर उन संतो को श्रधानजली देते हुए ब्रह्म वैवर्त पुराण में जो सबसे बड़ा मन्त्र मुक्ति हेतु बताया गया उसका जप करूँगा और उन संतों को अर्पित कर दूंगा जो वहां शहीद हुए थे । मैंने किया भी वही 1 दिसंबर से 21 दिसंबर तक मैं जन्तर-मन्तर में बैठा रहा वही नारायण क्षेत्र में जपा जाने वाला महामंत्र जप करता रहा । मेरे लिए जन्तर-मन्तर भी नारायण क्षेत्र इसलिए बन गया कि आधुनिक स्वामी करपात्री के ही रूप संत गोपाल दास जी को जब पता चला मैं जन्तर-मन्तर पर तप कर रहा हूँ तो उन्होंने मेरे लिए दूध देने वाली दो गाये एक नंदी भेज दिया और उन गायो की सेवा के लिए दो सेवक भेज दिए एक नाम था दयालु दूसरे का नाम फौजी । जहाँ नारायण की गाय वहां नारायण क्षेत्र । जब 7 दिन बीत गए भारी ठण्ड थी रोज सुबह और रात में नाख लाल हो जाती थी । मच्छरों का आतंक ऐसे जैसे दुश्मन मुल्क से आतंकी भेजे हो ! 7वे दिन एक साधरण से कपडे में एक महात्मा आये और मेरे आसान के पास बैठ गए मैंने कोई खास ध्यान नहीं दिया वहां नित्य ही अनेक लोग-और महात्मा भेष में लोग आते रहते है और अपना सुझाव देते रहते थे । वे बोले कब से बैठे हो हमने कहाँ आज 7वा दिन है 21 तक बैठेंगे सांसदों से सत्याग्रह कर रहे है और नारायण नाम जप रहे है और मन बड़ा विचलित है क्योंकि आज सातवे दिन तक कुछ गिने- चुने लोग ही यहाँ आये है जबकि सबको मालूम है कि गौ रक्षा हेतु सांसदों से सत्याग्रह चल रहा है ।
तो वे बोले मैं यहाँ से वहां इस जन्तर-मन्तर पर 4 बार घुमा हूँ प्रत्येक पंडाल पर देखा सब अपने हक़ की लड़ाई लड़ रहे है कोई पैन्सिन के लिए लड़ रहे है, कोई जमींन जर जोरू और जमींन के लिए और राजनैतिक लड़ाई के लिए अनेक लोग यहाँ बैठे है । पर तुम और तुम्हारा यह पांडाल गाय को सामने करके गौवंश की लड़ाई लड़ रहे हो इससे बड़ा पूण्य का काम मुझे और कोई नहीं दिखता ।
मन लगाकर जिस काम के लिए घर-परिवार त्याग कर हैदराबाद से यहाँ आये हो, जितने दिन का संकल्प करके बैठे हो वह काम पूरा करके ही यहाँ से जाना । तुम्हारी सफलता -असफलता यहाँ कोई माने नहीं रखती पर तुम्हारी दृण प्रतिज्ञा की कही न कही सुनवाई जरूर होगी । वह जो पल- पल का हिसाब रखता है क्या उसे मालूम नहीं एक बालक उसकी भी आराध्या गायों के हित में भूखे प्यासे यहाँ लड़ाई लड़ रहा है । इस कलिकाल में जब मानव एक घंटा गाय जैसे विषय पर जीवन भर बात नहीं करता तुम 21 अमूल्य दिन दे रहे हो । पीछे मत हटाना मिलेगा कुछ नहीं पर मिलेगा सबकुछ !
कह कर चले गए । उनकी अटपटी बात सुन मुझे कुछ समझ में नहीं आया ! तो मैं अपने जप माला में जप करने लगा और उनकी ओर से ध्यान हटा दिया जैसे ही माला पूरी हुई उस तरफ देखा वे महात्मा नहीं दिखे । मैंने बाद में सबको बताया एक महात्मा ने ऐसा कहाँ पर किसी ने अधिक ध्यान नहीं दिया । तभी उसी दिन पांडेय जी आये और ऐसा लगा जैसे जन्मो के साथी है और हमेशा के लिए जुड़ गए अनेको लोगो का आना तब से प्रारम्भ हो गया । भारत के अलावा इटली और जर्मनी आदि की मीडिया भी आके गई अनेक लोगो ने इंटरव्यू लिए कैसे 21 दिन बीत गए पता ही नहीं चला !
18 तारीख से हम ठाकुर रामपाल सिंह और संत गोपाल दास जी के साथ अनेक सांसदों से मिले । पालियामेन्ट चल रहा आप कृपया गाय का प्रसन्न संसद में उठाइये सबने कहा हाँ । पर कोंग्रेश संसद चलने दे तब न ! माननीय शिव सेना सांसद चंद्र कान्त खैरे जी से भी मिले उन्होंने कहाँ हम कल आपका प्रसन्न उठाएंगे । हम सभी संसद भवन में उस दिन की कार्यवाही देखने अंदर पहुच गए पर कोंग्रेश के सांसदों ने एक मिनट के लिए भी संसद नहीं चलने दी किसी को कोई प्रसन्न करने का मौका ही नहीं था ।
हम चले आये 21 तारीख को माननीय सांसद श्री खैरे जी ने संसद में गाय को राष्ट्र माता राष्ट्रिय प्राणी की मांग की और संत जी को फोन करके बताया आज संसद में आपका प्रसन्न उठाया गया । अगले दिन सभी अखबारों में वह खबर थी शिव सेना के मुख पत्र में बड़ा सा समाचार था । 21 को भाजपा के राष्ट्रीय कार्यालय में हमारे मित्र डॉ मित्तल साहब की गौ शास्त्र नामक किताब का लोकार्पण था । जहाँ उनकी कृपा से हमें 10 मिनट का सभी उपस्तिथ सांसदों और मंत्रियो के साथ गौ भक्तो को संबोधित करने का मौका मिला और सभी ने हमारा सम्मान भी किया जिसकी कल्पना हमने कभी नहीं की थी ।
इसलिए गाय साधारण नहीं असाधरण है । गाय माँ नहीं माँ से बढ़कर कर है , गाय देवता नहीं देवताओं की देवता है । गाय दिव्य नहीं दिव्यतम है । बस आपका संकल्प सत्य हो आपकी भक्ति और सेवा में खोट न हो । संसार के लोगो को निचा दिखाना और अपने को ऊँचा उठाना ही आपका मकसद न हो । तो गाय बहुत कुछ यहाँ और सबकुछ वहां देती है ।
यही "पुनरपि जननं पुनरपि मरणं, पुनरपि जननी जठरे सहनं" से कोई मुक्ति दे सकती है तो वह ही गाय । क्योकि वैतरणी पर राम-कृष्ण, शिव,सूर्य या गणेश को भी वह अधिकार नहीं की किसी भक्त का हाथ पकड़ कर पार लगा दे । वहां तो सिर्फ गाय का ही पूछ पकड़ कर ही वैतरणी पार हो सकती है यह सभी देवताओं का एक मत में लिया गया निर्णय है ।
उसी गौ भक्ति से लबरेज इस बार फिर 1 से 8 नवम्बर तक मैं अपने कुछ साथियों के साथ शून्य होकर उसी स्थान पर गोपाल नाम का जप करने और अपने उन वीर गौ भक्त शहीद संतों को श्रधानजली देने जा रहा हूँ । अगर आपके पास थोड़ा समय हो तो जरूर मेरा साहस बढ़ाने उन महात्मा की तरह जरूर आना ! ताकि मैं और मेरे साथी आराम से अपनी 8 दिन की तपस्या पूरी कर सकें ।
"नयाल सनातनी" गौ चरणों का दास, स्वामी करपात्री जी महाराज का कट्टर अनुयायी, राम राज्य वादि चिंतक- विचारक । हैदराबाद
जय गौ माता जय गोपाल , जय नंदीश्वर जय महाकाल ।
जन्तर-मन्तर पर घटित सच्ची घटना !
सनातन शास्त्रों का मत है भगवान भोले नाथ को भजने वाले शिव लोक में , देवी के उपासक मणिद्वीप में , गणेश को आराध्य मानने वाले गणेश के लोक में , सूर्य और विष्णु के सच्चे भक्तों का स्थान वैकुण्ठ में सुनिश्चित होता है ।
आध्यत्म के शिखर पर अपना स्थान बनाये आदि शंकर के नये अवतार संसार के अब तक के एक मात्र धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज किस मत किस देव के अनुयायी थे आखिरी दिनों में ही यह भेद खुला !
जब बिरला जी और बहुत बड़े-बड़े महाराज जी के अनुयायी उनसे एक बार जिद कर पूछे की आपके इष्ट कोन है ? आप नित्य बाबा विश्वनाथ शिव का अभिषेक करते है , जय राम श्री राम जय जय राम से अपना कोई भी प्रवचन आदि शुरू करते है और सबको गाय की भक्ति का उपदेश देते है और आजीवन गाय की लड़ाई लड़ते रहे है । तब बहुत भक्तों के प्रयास के बाद स्वामी जी ने बताया कि शिव-राम में अंतर नहीं मेरे इष्ट शिव के भी जो इष्ट है वही है "इष्ट देव मम बालक रामु" और गाय की भक्ति का उपदेश एवं गाय की सेवा रक्षा का उपदेश मैं इसलिए देता हूँ "गाय परम सत्य" है इस पृथ्वी लोक में । भगवान कृष्ण को आप भजन करों पर गाय की तरह भगवन कृष्ण प्रत्यक्ष नहीं दिखते और आपकी सेवा वे प्रत्यक्ष स्वीकार कर रहे है या नहीं वह आपको मालूम नही पड़ती ! पर गाय उस अनंत ब्रह्माण्ड नायक कृष्ण की वह कृति है जो उनके बामांग से प्रकट हुई है वह आपकी सब सेवा - पूजा प्रत्यक्ष स्वीकार करती है और साथ ही साथ अमूत भी देती है । यह भी श्री कृष्ण का वचन है कि जो गाय की सेवा करेगा उसको अन्य किसी देवता की पूजा-सेवा करने की आवश्यकता नहीं क्योकि एक समय 33 करोड़ देवो ने गाय के शरीर में ही निवास बनाया था । और जो भी गाय या गौवंश की सेवा करता है उससे वचन वद्द होने के कारण सभी देवी-देवता सदा प्रसन्न रहते है । अतः देवताओं की पूजा सेवा में भूल चुके होने से जो पूजा कर्म में अपूर्णता आ जाती है उसे गाय की सेवा- पूजा पूर्ण कर देती है । यानि गाय गौवंश की सेवा पूजा के बिना कुछ आपकी देवो की पूजा भी पूर्ण नहीं । बड़ा से बड़ा यज्ञ कर लो देवताओं को भोग पहुचाने जिससे देवता पुष्ट होते है । अगर गौ घृत से नहीं किया तो देवता स्वीकार नही करते । देवता बलहीन होना पसंद करते है पर गाय के घी से हुए बिना यज्ञ का भाग स्वीकार नहीं करते । आज जितने यज्ञ हो रहे हैं उनमें से वही यज्ञ पूर्णहुति को प्राप्त होते है जो गाय के बिना मिलावटी घी के सहयोग से होते है बर्ना सब आग में डाल कर बर्बाद किया राशन के सामान है ।
स्वामी करपात्री जी महाराज की बातों को ब्रह्म लेख मानने वाला उनका कट्टर अनुयायी मैं "नयाल सनातनी" जब पिछले साल 7 नवम्बर को अपनी बीमारी की वजह से गौ भक्त शहीद संतो को श्रद्धांजलि देने दिल्ली नहीं पहुच पाया जो की में कई वर्षो से लगातार जाता रहा हूँ तो बड़ा आत्म ग्लानि से भर गया बिस्तर में लेट-लेट संकल्प कर लिया 7 को 3 से गुणा करने से जो योग आएगा उतने दिनों तक जन्तर-मन्तर पर बैठ कर उन संतो को श्रधानजली देते हुए ब्रह्म वैवर्त पुराण में जो सबसे बड़ा मन्त्र मुक्ति हेतु बताया गया उसका जप करूँगा और उन संतों को अर्पित कर दूंगा जो वहां शहीद हुए थे । मैंने किया भी वही 1 दिसंबर से 21 दिसंबर तक मैं जन्तर-मन्तर में बैठा रहा वही नारायण क्षेत्र में जपा जाने वाला महामंत्र जप करता रहा । मेरे लिए जन्तर-मन्तर भी नारायण क्षेत्र इसलिए बन गया कि आधुनिक स्वामी करपात्री के ही रूप संत गोपाल दास जी को जब पता चला मैं जन्तर-मन्तर पर तप कर रहा हूँ तो उन्होंने मेरे लिए दूध देने वाली दो गाये एक नंदी भेज दिया और उन गायो की सेवा के लिए दो सेवक भेज दिए एक नाम था दयालु दूसरे का नाम फौजी । जहाँ नारायण की गाय वहां नारायण क्षेत्र । जब 7 दिन बीत गए भारी ठण्ड थी रोज सुबह और रात में नाख लाल हो जाती थी । मच्छरों का आतंक ऐसे जैसे दुश्मन मुल्क से आतंकी भेजे हो ! 7वे दिन एक साधरण से कपडे में एक महात्मा आये और मेरे आसान के पास बैठ गए मैंने कोई खास ध्यान नहीं दिया वहां नित्य ही अनेक लोग-और महात्मा भेष में लोग आते रहते है और अपना सुझाव देते रहते थे । वे बोले कब से बैठे हो हमने कहाँ आज 7वा दिन है 21 तक बैठेंगे सांसदों से सत्याग्रह कर रहे है और नारायण नाम जप रहे है और मन बड़ा विचलित है क्योंकि आज सातवे दिन तक कुछ गिने- चुने लोग ही यहाँ आये है जबकि सबको मालूम है कि गौ रक्षा हेतु सांसदों से सत्याग्रह चल रहा है ।
तो वे बोले मैं यहाँ से वहां इस जन्तर-मन्तर पर 4 बार घुमा हूँ प्रत्येक पंडाल पर देखा सब अपने हक़ की लड़ाई लड़ रहे है कोई पैन्सिन के लिए लड़ रहे है, कोई जमींन जर जोरू और जमींन के लिए और राजनैतिक लड़ाई के लिए अनेक लोग यहाँ बैठे है । पर तुम और तुम्हारा यह पांडाल गाय को सामने करके गौवंश की लड़ाई लड़ रहे हो इससे बड़ा पूण्य का काम मुझे और कोई नहीं दिखता ।
मन लगाकर जिस काम के लिए घर-परिवार त्याग कर हैदराबाद से यहाँ आये हो, जितने दिन का संकल्प करके बैठे हो वह काम पूरा करके ही यहाँ से जाना । तुम्हारी सफलता -असफलता यहाँ कोई माने नहीं रखती पर तुम्हारी दृण प्रतिज्ञा की कही न कही सुनवाई जरूर होगी । वह जो पल- पल का हिसाब रखता है क्या उसे मालूम नहीं एक बालक उसकी भी आराध्या गायों के हित में भूखे प्यासे यहाँ लड़ाई लड़ रहा है । इस कलिकाल में जब मानव एक घंटा गाय जैसे विषय पर जीवन भर बात नहीं करता तुम 21 अमूल्य दिन दे रहे हो । पीछे मत हटाना मिलेगा कुछ नहीं पर मिलेगा सबकुछ !
कह कर चले गए । उनकी अटपटी बात सुन मुझे कुछ समझ में नहीं आया ! तो मैं अपने जप माला में जप करने लगा और उनकी ओर से ध्यान हटा दिया जैसे ही माला पूरी हुई उस तरफ देखा वे महात्मा नहीं दिखे । मैंने बाद में सबको बताया एक महात्मा ने ऐसा कहाँ पर किसी ने अधिक ध्यान नहीं दिया । तभी उसी दिन पांडेय जी आये और ऐसा लगा जैसे जन्मो के साथी है और हमेशा के लिए जुड़ गए अनेको लोगो का आना तब से प्रारम्भ हो गया । भारत के अलावा इटली और जर्मनी आदि की मीडिया भी आके गई अनेक लोगो ने इंटरव्यू लिए कैसे 21 दिन बीत गए पता ही नहीं चला !
18 तारीख से हम ठाकुर रामपाल सिंह और संत गोपाल दास जी के साथ अनेक सांसदों से मिले । पालियामेन्ट चल रहा आप कृपया गाय का प्रसन्न संसद में उठाइये सबने कहा हाँ । पर कोंग्रेश संसद चलने दे तब न ! माननीय शिव सेना सांसद चंद्र कान्त खैरे जी से भी मिले उन्होंने कहाँ हम कल आपका प्रसन्न उठाएंगे । हम सभी संसद भवन में उस दिन की कार्यवाही देखने अंदर पहुच गए पर कोंग्रेश के सांसदों ने एक मिनट के लिए भी संसद नहीं चलने दी किसी को कोई प्रसन्न करने का मौका ही नहीं था ।
हम चले आये 21 तारीख को माननीय सांसद श्री खैरे जी ने संसद में गाय को राष्ट्र माता राष्ट्रिय प्राणी की मांग की और संत जी को फोन करके बताया आज संसद में आपका प्रसन्न उठाया गया । अगले दिन सभी अखबारों में वह खबर थी शिव सेना के मुख पत्र में बड़ा सा समाचार था । 21 को भाजपा के राष्ट्रीय कार्यालय में हमारे मित्र डॉ मित्तल साहब की गौ शास्त्र नामक किताब का लोकार्पण था । जहाँ उनकी कृपा से हमें 10 मिनट का सभी उपस्तिथ सांसदों और मंत्रियो के साथ गौ भक्तो को संबोधित करने का मौका मिला और सभी ने हमारा सम्मान भी किया जिसकी कल्पना हमने कभी नहीं की थी ।
इसलिए गाय साधारण नहीं असाधरण है । गाय माँ नहीं माँ से बढ़कर कर है , गाय देवता नहीं देवताओं की देवता है । गाय दिव्य नहीं दिव्यतम है । बस आपका संकल्प सत्य हो आपकी भक्ति और सेवा में खोट न हो । संसार के लोगो को निचा दिखाना और अपने को ऊँचा उठाना ही आपका मकसद न हो । तो गाय बहुत कुछ यहाँ और सबकुछ वहां देती है ।
यही "पुनरपि जननं पुनरपि मरणं, पुनरपि जननी जठरे सहनं" से कोई मुक्ति दे सकती है तो वह ही गाय । क्योकि वैतरणी पर राम-कृष्ण, शिव,सूर्य या गणेश को भी वह अधिकार नहीं की किसी भक्त का हाथ पकड़ कर पार लगा दे । वहां तो सिर्फ गाय का ही पूछ पकड़ कर ही वैतरणी पार हो सकती है यह सभी देवताओं का एक मत में लिया गया निर्णय है ।
उसी गौ भक्ति से लबरेज इस बार फिर 1 से 8 नवम्बर तक मैं अपने कुछ साथियों के साथ शून्य होकर उसी स्थान पर गोपाल नाम का जप करने और अपने उन वीर गौ भक्त शहीद संतों को श्रधानजली देने जा रहा हूँ । अगर आपके पास थोड़ा समय हो तो जरूर मेरा साहस बढ़ाने उन महात्मा की तरह जरूर आना ! ताकि मैं और मेरे साथी आराम से अपनी 8 दिन की तपस्या पूरी कर सकें ।
"नयाल सनातनी" गौ चरणों का दास, स्वामी करपात्री जी महाराज का कट्टर अनुयायी, राम राज्य वादि चिंतक- विचारक । हैदराबाद
जय गौ माता जय गोपाल , जय नंदीश्वर जय महाकाल ।

Friday, October 21, 2016

भारतीय आदर्श संत समाज के नाम एक पत्र ! समस्त संत समाज को दास का कोटि-कोटि नमन । दास स्वामी करपात्री जी महाराज का अनुयायी है । और अयोध्या राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष गुरुदेव स्वामी नृत्य गोपाल दास जी महाराज का शिष्य है । साथ में "सर्वदलीय गौरक्षा मंच" हैदराबाद से पंजीकृत संस्था का वर्तमान में अध्यक्ष हूँ । और पिछले 17 वर्षों से स्वामी करपात्री जी महाराज के गौरक्षा आंदोलन से जुड़ा हुआ हूँ । संत भगवान हम अपने गौ भक्त साथियों के साथ स्वामी करपात्री जी महाराज एवं देश के 10 लाख साधु-संतों और गौभक्तों के ऐतिहासिक 1966 के गौरक्षा आंदोलन की 50वी वर्षगाठ पर 1 से 8 नवम्बर 2016 तक जन्तर - मंतर दिल्ली में 9 सूत्रीय मांगों के साथ केंद्र सरकार एवं समस्त पक्ष-विपक्ष के सांसदों से सत्याग्रह ( सत्य का आग्रह * गाय ही परम सत्य है ) करने जा रहे हैं । हमने पिछले वर्ष भी ऐसा ही 21 दिवासित सत्याग्रह 1 से 21 दिसंबर तक जन्तर-मन्तर पर किया था । जिसके परिणाम स्वरुप शिव सेना के माननीय सांसद श्री चंद्र कान्त खैरे जी ने संसद में यह संपूर्ण गौ रक्षा का यक्ष प्रश्न उठाया था । जिसे सभी मिडिया घरानों ने खुल कर छापा । उसी का नतीजा था कि तब से राष्ट्रिय चैनल आज तक,ज़ी न्यूज़, सुदर्शन चैनल आदि अनेक और लगभग सारे मिडिया घराने गाय पर पिछले एक साल में टीवी के माध्यम से एक बड़ा आंदोलन खड़ा कर दिए है । और गाय की उपयोगिता को जग जाहिर किये । माननीय सांसद खैरे जी के साथ-साथ उन सभी चैनलो को भी हम धन्यबाद देते है । इस वर्ष हमने सभी पक्ष -विपक्ष के सांसदों को भी निवेदन पत्र देते हुए अभी तक 240 सांसदों तक अपनी बात पहुचाई है । और बाकी के सांसदों को हम 1 से 8 नवम्बर तक होने वाले सत्याग्रह में पत्र लिख कर भेज रहे है । कई सांसदों मंत्रियों से हम मिले भी है जिनका कहना है इस बार शीतकालीन सत्र में वे इसपर जरूर संसद में चर्चा कराएँगे । अब आगे के आंदोलन हेतु आप सभी संतों के पवित्र आशीर्वाद का दास आकांक्षी है । अगर संभव हो तो एक दिन 7 नवम्बर ऐतिहासिक गौरक्षा आंदोलन की 50वीं वर्षगाठ पर दिल्ली आने की कृपा करें ! अगर किसी कारण वस दिल्ली आना संभव नहीं हो पाए तो आप इस आंदोलन में अपने समर्थन देते हुए अपने व्यान को स्थानीय मिडिया में जरूर देने की कृपा करें । क्योकि जब गौरक्षा हेतु शहीद हुए संतों की 100 वी पूण्य तिथि आएगी आप और हम होंगे की नहीं यह राम जी को ही पता होगा ! इसलिए यह मत्वपूर्ण दिन न भूले ।। हमने सरकार एवं सभी सांसदों से जो मुख्य 9 मांग रखी है वे नीचे बैनर में प्रदर्शित है । अगर अज्ञान वस कोई मत्वपूर्ण मांग रह गई हो तो आप संत इस दास को आदेशित करें । उसे भी शामिल किया जा सकता है । किसी भी प्रकार की अधिक जानकारी हेतु आप दास को कभी भी फोन कर सकते है । "नयाल सनातनी" - 9849702915 जय गौ माता-जय गोपाल, जय नंदीश्वर-जय महाकाल ।
सृष्टि चक्र में कीट से लेकर हाथी तक सब सहायक ।
उत्तराखंड के प्रत्येक गाँव में पहले नंदी अलमस्त घुमते दिख जाते थे ! इन नन्दियों को शिव गण कहाँ जाता था ।लोग इनको पूजते इनको गौ ग्रास देते और कभी कभार खेत -खलिहान से ये थोड़ा बहुत खेती या अनाज खा लेते भी तो उनको हाँक कर भगा देते ! डंडा उठाकर कभी नहीं मारते थे । यह सब आँखों देखि बता रहा हूँ ।
पर ---
समय का चक्र बदला,लोगो की भावना भी बदली, आधुनिकता ने गाँवों को भी अपने आगोश में ले लिए ।पहले लोग अपने पितरों के नाम पर उनकी मुक्ति हेतु नंदी छोड़ देते थे ! अब नहीं के बराबर यह परमपरा रह गई । कुछ तो लोग आधुनिक हो गए कुछ स्वार्थी । स्वार्थी इसलिए की अगर कोई नन्दी छोड़ता है तो दूसरे लोग थोड़ा उनके खेतो में नंदी के चले जाने पर स्वर्ग गए नंदी छोड़ने वाले के पितरो को नरक में भेजने वाली गलियों की बौछार कर देते है । नंदी को डंडों से लहूलुहां कर देते है अलग । परिणाम जो नंदी के भय से रात में उसकी शेर की तरह चमकती आँखों से और शेर जैसी हुंकार से जंगली शुवर, आदमखोर बाघ , लकड़बग्गा दिन में बन्दर आदि जंगली जानवर गाँव की सरहद से दूर रहते थे आज प्रत्येक ग्रामीण के घर के आंगन में तांडव कर रहे है ।
जंगली शुवर तो दिन में बोये बीजो को रात होते होते सफाचट कर दे रहे है । बन्दर घर में घुस कर गुड़ की भेली ले भाग रहे है । आँगन में भोजन करना दुर्भर हो गया है आदमी के एक निवाला खाने से पहले बन्दर झपटा मार सब ले भाग रहे है । बाघ और लक्डबघों की डर से पहाड़ी लोग 7 बजे बाद घर से बहार निकलने में डरते है । नंदी शिव का वाहन है इसलिए जहाँ नंदी हो वहां से भूत-प्रेत बाधा दूर भाग जाते थे क्योंकि जहाँ भूत नाथ शिव का मुख्य गण हो वहां छोटे-मोटे भूत-प्रेतों की क्या औकात है !
पर ग्रामीणों ने नंदी के साथ-साथ गायों को भी गाँव से बहार का रास्ता दिखा कर अपने लिए ही बड़ा भारी गड्ढा खोद लिया । गाय लक्ष्मी का प्रत्यक्ष रूप है पर जब आप लक्ष्मी को गावँ की सरहद में घुसने नहीं देंगे तो कल्याण कैसे होगा !
जिस गाय के गौमूत्र में पितरों को मुक्ति देने वाली "गंगा माँ" निवास कर छुवा-छूत, भूत-प्रेत, अला-बला आदि अनेक ग्रामीण बिमारियों का इलाज सहज ही करती थी । उसी परोपकारी गाय को लोगो ने घर से ही नहीं गावँ की परिधि से दूर भेज दिया और कुछ कलयुग के एजेंट इसका फायदा उठाकर धन के लालच में उनको एक जगह इकट्ठा कर कसाई की गाडी में चढ़ा दिए ।
अब भला जब मनुष्य अपने लिए खुद गड्ढा खोद कर बैठा हुआ हो तो उसको कौन बचाये ।!
अब भी देरी नहीं हुई अगर प्रत्येक ग्रामीण हर गाँव में 2-4 उत्तम नस्ल के नंदी छोड़े और गाय-बैल को फिर से अपने जीवन साथी की तरह अपने घर में स्थान दें तो सब फिर से सूखी हो जायेंगे । उत्तम नस्ल के नंदी सुंदर गौवंश को जन्म देकर अधिक दूध देने वाली गौ वत्सा को जन्म देंगे ।
पहले नंदी दिनभर गावँ के मंदिर में पड़े रहते थे हम बच्चे लोग उसको वही रोटियां खिला आते थे । कुछ माताएं उसको वही घास डाल देती थी । शाम होते ही नंदी अपनी मस्त चाल से गावँ की सरहद में घूमने निकल जाता था। । पर अब 100 गाँवों में घूमने पर भी एक-दो नंदी नहीं दिखते । क्योकि लोगो ने उसे चारा डालना बंद कर दिया है । कुछ नंदी यदा-कदा गाँवों के हाट- बाजारों में दिखते है क्योंकि वहां उनको कुछ दुकानदारों द्वारा फैंक सब्जियों के बचे डंठल आदि मिलता है । और बाकी पोलोथि खाकर जीवन यापन कर रहे है और असमय मृत्य के इंतजार में दिखते है ।
क्या कर दिया है न हमारी आधुनिकता ने ! बाजार बाद ने ! पश्चिम संस्कृति के अपनाने से !!
आ फिर लौट चलें ---
नयाल सनातनी" सर्वदलीय गौरक्षा मंच

Monday, October 17, 2016

सनातनी विचार !
परमात्मा की सबसे प्यारी रचना "गौवंश" के हित में कार्य करने वाले का कोई दुश्मन नहीं हो सकता ! अगर दुर्भाग्य बस विधि का मारा कोई दुश्मनी करें तो उसपर हमें विचार नहीं करना चाहिए गौ माता और उनके गोपाल कृष्ण उसका और आपका नियम अनुसार ध्यान रखने को काफी है ।
हमसे कोई दुश्मनी रखें तो कोई बात नहीं पर जब उस दुश्मन पर मुसीबत आये तो हमें जरूर याद करें हम भगवती की दी हुई शक्ति अनुसार सहायक जरूर हूँगें यह एक क्षत्रिय बालक की कसम है ।
"नयाल सनातनी"
सनातनी विचार !
सूर्य और क्षत्रिय वीरो को कभी आजमाना नहीं चाहिए !
अधिक देर तक प्रचंड सूर्य की किरणों का सेवन कैंसर जैसे घातक रोग का कारण हो सकता है पर प्रेम से सुबह की हलकी सेकन अनेक बीमारियों से निजात दिला देता है । उसी प्रकार क्षत्रिय कुमार प्रेम और अपने पन में जीता हुआ लंका का राज भी विभीषण जैसे विनम्र को समर्पित कर देते है और आंख दिखाने गौ वंश का अहित करने पर अपने कंस जैसे मामा का ही वध कर देते हैं ।
"नयाल सनातनी"
सनातनी विचार !
अपनों से दूर रहकर बड़ा बनने और अधिक कमाने की चाह में कभी जिंदगी के असली मजे न लुटा देना ! ईश्वर एकबार ही तो मानव जीवन देता है । कम खाके-गम खाके भी जीवो के दुःख बांटने में जो आनंद है वह स्वर्ण की थाली में परोशे 56 भोगो वाले भोजन से लाख गुणा बेहतर है । अरबो कमा लो पर जाएगा साथ कुछ नहीं क्योकि कफ़न में जेब नहीं होती !
मालूम है अधिक पैसे वाली जयललिता कभी नहीं सोती !
इसलिये उनकी बीमारी की चर्चा भी टीवी आजतक पर होती !😢
"नयाल सनातनी"
भगवान श्रीकृष्ण ने कहा :-
यया धर्ममधर्मम् च कार्यं चाकार्यमेव च। अयथावत् प्रजानाति, बुद्धिः सा पार्थ राजसी।
अधर्मम् धर्ममिति या मन्यते तमसावृता। सर्वार्थान् विपरीतांश्च बुद्धिः सा पार्थ तामसी।


हे अर्जुन !!
जो धर्म और अधर्म, कार्य और अकार्य को सही रूप से नहीं जानती, वह बुद्धि राजसी अर्थात् भौतिकवादी अर्थात् मोहग्रस्त है।

जो अधर्म को ही धर्म, और धर्म को ही अधर्म अर्थात् सबकुछ उल्टा ही समझती है, वह बुद्धि तामसी अर्थात् पतनकारिणी अर्थात् निम्नतम है।

आजकल ऐसी बुद्धि वर्तमान राजकारिणी यो में पायी जाती है।

नयाल सनातनी
याद रहे सूर्य मंडल का भेदन या तो योगी या वीर गति को प्राप्त सूरवीर ही कर सकता है इसके अलावा कोई सूर्य मंडल का भेदन कर सकता है तो वह गौ माता का कृपा प्राप्त सेवक । जो आप सडयंत्र कारी तो कतई नहीं है ! हां किसी सच्चे गौ सेवक से भूल कर भी ना टकराना नष्ट होने में अधिक देर नहीं लगेगी ! 
 "नयाल सनातनी"
सनातनी विचार !
लाखों की भीड़ इक्कठा कर ढोल- तासे बजाने से भालू नहीं पकडे जाते ! भालू पकड़ने के लिए चंद कुशल मदारी काफी होता है ।
वैसे ही साल भर उदासीन रहकर एक दिन लाखों की भीड़ इकठ्ठा कर गौरक्षा के नारे लगाने से गौवंश की रक्षा कदापि नहीं हो सकती । गौ रक्षा-गौसेवा तो वे 80%गुंडे ही करते थे । और करते रहेंगे ! जो आपके चाल-छल से वाकिफ न थे । इसलिए गौ प्रेम मे जेल चले गए , कुछ आपकी गन्दी चाल में बदनाम हो गए और कुछ हँसते हँसते जान दे गए । आप तो सरकारी खर्चे से जब भी जाम पिए आज भी और कल भी मैदान ही मारोगे । ऊपर वाले को न जाने आप अपना यह दागदार चेहरा कैसे दिखाएंगे ? ये आप जानो ये आप जानो उसके यहाँ सबका न्याय होता है यह बात का ध्यान रख कर चाल चलिए हुजूर ।
।। सत्ता विष भी और अमृत भी होती है ।।
"नयाल सनातनी" :-- सर्वदलीय गौरक्षा मंच
साक्षात देवी !
इंदौर की महारानी गौ माता की अनन्य भक्त देवी अहिल्या बाई होल्कर की मूर्ति आदरणीय लोकसभा अध्यक्षा श्रीमती सुमित्रा ताई महाजन के अथक प्रयास और सभी पक्ष -विपक्ष के माननीय सांसदों के पूर्ण समर्थन से अब संसद में विराजमान है ।
भगवान आसुतोष शिव की पुजारिन बद्रीनाथ से लेकर काशी , रामेश्वरम तक अनेक शिव मंदिरों का जीणोद्धार कराने वाली माता अहिल्या बाई होल्कर के इस मूर्ति के हाथ में भी शिव लिंग स्थापित है । ऐसी महान देवी के सामने ही संसद से पास कानून गौ-हत्या कर करोडो टन शिव के वाहन नंदी, गौ माता और उनके बछड़ो का मांस निर्यात कर रहा है ।
क्या यह संसद और देवी अहिल्या बाई का अपमान नहीं है ।? सोचो !!
"नयाल सनातनी" गौ चरणों का दास --
"सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार"
सनातनी विचार !
अहंकार इंद्र के पद से भी गिरा देता है । ब्रह्मा का सिर छेदन कर सकता है । सोने की चमकती लंका में कालिख पोत सकता ! इसलिए संसार में अहंकार से बड़ा सत्रु अपना कोई नहीं हो सकता । और इस रोग से प्रत्येक मानव किसी न किसी रूप में ग्रसित हो ही जाता है !
इससे मुक्ति का मार्ग सिर्फ भगवान के गुणवाद और परमात्मा की सुध जीव के मन में सदा बनी रहे एक मात्र मार्ग महापुरुषों ने सनातन शास्त्रो के माध्यम से हमें बताया है ।
"नयाल सनातनी"
सिर्फ अपने लिए अपने परिवार के लिए प्रार्थना करने वाले को सनातन धर्म में कैकई बुद्धि वाला कहते है और सबके कल्याण के लिए प्रार्थना करने वाले को गौ - बुद्धि या संत बुद्धि कहते है ।
"नयाल सनातनी"
सनातनी विचार !
माँ से मिलो तो सबका कल्याण मांगो आपका कल्याण अपने आप होगा । क्योंकि आप और आपका परिवार भी सबमे आ जाते है ।
"नयाल सनातनी"💐
सनातनी विचार !
थोड़ी सी रामायण,बहुत बड़ा ज्ञान !
सिर्फ अपने और अपने पुत्र के हित की बात कहने-सोचने के कारण ही आज भारत वर्ष में कोई अपने बेटी का नाम कैकई नहीं रखता या रख कर लज्जित नहीं होना चाहता !
और अपना हित छोड़ सब कुछ भगवान का समझ कर त्याग देने वाला कैकई के ही सुपुत्र के नाम से आज भारत है और लाखों भारतीय अपने बेटे का नाम भरत रख कर गौरान्वित होते है ।
"नयाल सनातनी"
सनातनी विचार !
थोड़ी सी भागवत बड़ा सा ज्ञान ।
श्रीमद भागवत कथा में कई विद्द्वान भागवताचार्य के मुख से आता है कि सुदामा गरीब ब्राह्मण थे !
भक्त को लगता है कि भगवान के अनन्य भक्त सुदामा से बड़ा अमीर संसार में कोई नहीं था । जिनके चरण धोने स्वयंग त्रिलोकी के नाथ राजाधिराज श्री कृष्ण चंद्र लालयत थे अपने अमृत तुल्य आशुओं से ही जिनके पाँव धो डालें वह ब्राह्मण गरीब कैसा !
गरीब तो कंस- जरासंघ आदि लक्ष्मी पुत्र राजा लोग थे जिनके अधर्मी प्राणों के प्यासे स्वयंग भगवान थे ।
"नयाल सनातनी"
हा हा हा आज विजयादशमी पर अनेकों अहंकारी और बलात्कारी आम और खास और बड़े -बडे नेता- अभिनेता भी किस अहंकारी रावण का वध करने ( जलाने निकले )है आज ! !
क्या रावण धन के अहंकार रूप-रंग, बल और महिलाओं के मान-मर्दन का प्रतीक भी नही था !
अगर हां तो आज भी प्रति दिन हजारों बहन-बेटियों का मान - मर्दन की आये-दिन खबर टीवी-अख़बार में आती ही नहीं रहती है ? क्या उनको पहले अपने अहंकार का पुतला नहीं फूंकना चाहिए । ? रावण का अहंकार ने तो सिर्फ सीता जी का अपहरण किया था ! जबकि आधुनिक रावण तो बलात्कार कर एसिड से तक बहन-बेटियों को जला देता है ।
आज भी कल भी और कल भी मानव को अपने अंदर के अहंकार रुपी रावण को जलाने की जरूरत है !राम के द्वारा मारा गया हजारों वर्ष पूर्व लंका पति रावण के पुतले को जलाने की कतई जरूरत नहीं !
मेरा मानना है रावण के पुतले को जलाकर हम ब्रह्म ज्ञानी रावण का अपमान ही करते है ।
जबकि अज्ञान रुपी आतंकवाद का पुतला फूंकना चाहिए !
मैं आज अपने अंदर के पहाड़ जैसे अहंकार को जला कर अपने सभी इष्ट-मित्रो और साथियों को अपने द्वारा जाने -अनजाने में हुए दुर्व्यवहार के लिए हाथ जोड़कर माफ़ी मांगता हूँ ।
"नयाल सनातनी" गौ चरणों का दास, रामराज्य वादी चिंतक-विचारक ।
मैंने रावण नहीं जलाया !
जब मैंने झाँका अपने अंतर मन में !
ना रावण सा में भगवान आशुतोष शिव का अनन्य भक्त बन पाया हूँ ! न रावण सा तपस्वी योद्धा । जिसने शिव को पाया अपनी तपस्या से श्री राम को पाया अपनी मुक्ति से ।
मेरी हैसियत नहीं की मैं रावण के पुतले को अग्नि देता मैं न ही रावण सा दानी जो अपना एक सिर भी नहीं चढ़ा सकता जबकि रावण 10 सिर चढ़ा कर भी अपने संकल्प से टस से मस नहीं हुआ !
ना ही रावण सा विद्द्वान जो भगवान श्री राम को भी मजबूर कर दें कि मंदिर बना कर पूजा को उसे ही बुलाना पड़ा !
रावण में एक ही अवगुण था उसे अहंकार बहुत था । होगा क्यों नहीं उस समय का सबसे बड़ा धनाढ्य रावण था जिसके घर के ईट- पत्थर और दरवाजे भी सोने हीरे मोती-जवाहरात के थे । क्या आज अगर इतना धन मेरे-आप के पास होता ! तो रावण से कम अहंकारी होते !
क्या आज किसी अमीर के घर पर कोई महिला कई महीने उसके रहमो कर्मो पर रहे वह याचना करेगा की मेरे से विवाह कर ले मैं समझता हूँ नहीं आज का रावण जबदस्ती शादी कर लेता और नहीं मानने पर अनेक अत्याचार कर देता ।
रावण से बलवान, बुद्धिवान,ज्ञानवान, सुन्दर सुडौल शरीर जिसे देख देव लोक की अप्सराएं भी मोहित हो जाती थी ।
ऐसे अनेक अवगुण है आज के प्रत्येक मानव में है । पर फिर भी वह अपने अंदर के रावण को जलाने के बजाय उस महान विद्द्वान रावण के पुतले को जलाते है जिसने सिर्फ मुक्ति पाने के लिए भगवान राम से बैर लिया ।
विधि द्वारा मानव योनि मिलती ही इसलिए है इस संसार में की "पुनरिपी जननंम पुनरिपी मरणं" से मुक्ति मिल सके । पर क्या आज कोई भी मानव अपनी मुक्ति के लिए भगवान् से वैर ले सकता है ! या इतनी भक्ति भगवान की कर सकता है वह चाहे कितना भी बड़ा साधु- संत वर्त्तमान में हो !
उसकी मुक्ति हो सके ! उसकी भक्ति से भगवान वरदान दे दें ।
जब सीता जी अवतार भी नहीं ली थी तब वेदवती रूप में महान तप कर रही थी तब से जो श्राप रावण को मिला वेदवती द्वारा वह उसका प्राश्चित सिर्फ सीता जी के हरण और श्री राम के हाथों मरण से ही मुक्ति का मार्ग एक मात्र था । इतना ज्ञानी और तीनों लोकों की बातों को जानने वाला रावण सब जानता था कि भीभीषण ने तपश्या रत होकर अपने लिए वरदान स्वरुप शिव से अखंड राज माँगा है कुंभकर्ण-रावण ने राम के हाथों मुक्ति । भीभीषण आज भी मुक्त नहीं हो पाए जबकि रावण ने अपने पूरे कुल को लाखों वर्ष पूर्व "श्री हरि" के लोक में पंहुचा दिया । हम अपने परिवार के एक सदस्य की मौत पर भयंकर दुःख से दीवाने हो जाते है दहाड़े मार-मार के रोते है जबकि रावण ने अपने समस्त परिवार के वीरो को भी मरवा दिता ताकि वे भी रावण की तरह मुक्त हो कर "श्री हरि" के धाम में स्थान पा जाएं !
हमारे महान पीएम साहब ने कल लखनऊ में रावण का पुतला न जलाकर यह शिद्द किया कि वे सच में ज्ञानी है और सही लोगों से अब मार्गदर्शित है ।
फिर आप ही बताओं क्या मैं रावण का पुतला जलाने का अधिकारी हूँ ।
मैंने रावण का पुतला नहीं जला कर ठीक किया ना !
आपकी आप जानो पर मैंने अपने जीवन काल में आज तक कभी रावण का पुतला न जलाया न ही इस काम में कभी सहयोगी बना आगे बुद्दि में बैठ का माँ शारदे क्या खेल- खेलती है यह नहीं जानता !
मेरा दावा है ! राम तो हम कभी बन नहीं सकते पर रावण भी बन जाय आज का मानव तो वह कभी अपने स्वरुप का पुतला नहीं जलायेगा !
मेरा मानना है कि हर वर्ष विजयदशमी के दिन जगह- जगह सामूहिक रूप से अपने अहंकार को जलाने की परंपरा डालनी चाहिए !
जिसमें हम सभी को एक, दूसरे-तीसरे को हाथ जोड़ कर अपने किये अब तक के अपराधों के लिए माफ़ी मांगना चाहिए । ताकि हम दूसरे ही दिन से फूल की तरह हलके होकर भगवान को चढ़ने लायक हो जाये । बर्ना भगावन जिस सुगन्ध की तलाश में भारत भूमि में आते है वह सुगन्ध उनको कभी नहीं मिलेगी !
भगवान तो फूलो की तरह ही अभिमान रहित मानव के माथे को चूमते है और सुगन्ध लेते है । उसी तरह जिस तरह सच्ची मेहनत करके घर आये बेटे के माथे को माँ चूम लेती है ।
बर्ना सोना- हीरे आदि लाख कीमती हो खुशबु नहीं देते खुशबु तो भगवान एक पैसे के फूल का ही लेते है । समझदार को इसारा काफी ।
किसी के मन में यह बात न जचे तो उससे भी क्षमा !
"नयाल सनातनी" गौ चरणों का दास
राम राज्य वादी चिंतक-विचारक
What is Karam? How it works?
मैंने रावण को नहीं जलाया शीर्षक से आगे की कहानी !
रावण पाप करके भी मुक्त हो गया !
राम उस ब्राह्मण को मार कर भी अपने शुध्द धर्म रक्षा के कर्म के कारण पाप से मुक्त हो गए !
बाल्मीकि रामायण लिख कर मुक्त हो गए !
बाबा तुलसीदास राम चरित लिख कर मुक्त हो गए ।
!
रावण के सारे पाप कर्मों को लिखा पर उसका पुतला नहीं जलाया !
पर आधुनिक मानव जरूर रावण के पाप को चटकारे लेकर बखान करता है । और उसे सबसे बड़ा पापी जान उसके पुतले को जलाता है । अपने आचरण को नहीं देखता इसलिए रावण के पाप कर्मों का फल भुगत रहा है । सावधान !
: अनजाने कर्म का फल
VERY INTRESTING
एक राजा ब्राह्मणों को लंगर में महल के आँगन में भोजन करा रहा था ।
राजा का रसोईया खुले आँगन में भोजन पका रहा था ।
उसी समय एक चील अपने पंजे में एक जिंदा साँप को लेकर राजा के महल के उपर से गुजरी ।
तब पँजों में दबे साँप ने अपनी आत्म-रक्षा में चील से बचने के लिए अपने फन से ज़हर निकाला ।
तब रसोईया जो लंगर ब्राह्मणो के लिए पका रहा था, उस लंगर में साँप के मुख से निकली जहर की कुछ बूँदें खाने में गिर गई ।
किसी को कुछ पता नहीं चला ।
फल-स्वरूप वह ब्राह्मण जो भोजन करने आये थे उन सब की जहरीला खाना खाते ही मौत हो गयी ।
अब जब राजा को सारे ब्राह्मणों की मृत्यु का पता चला तो ब्रह्म-हत्या होने से उसे बहुत दुख हुआ ।
ऐसे में अब ऊपर बैठे यमराज के लिए भी यह फैसला लेना मुश्किल हो गया कि इस पाप-कर्म का फल किसके खाते में जायेगा .... ???
(1) राजा .... जिसको पता ही नहीं था कि खाना जहरीला हो गया है ....
या
(2 ) रसोईया .... जिसको पता ही नहीं था कि खाना बनाते समय वह जहरीला हो गया है ....
या
(3) वह चील .... जो जहरीला साँप लिए राजा के उपर से गुजरी ....
या
(4) वह साँप .... जिसने अपनी आत्म-रक्षा में ज़हर निकाला ....
बहुत दिनों तक यह मामला यमराज की फाईल में अटका (Pending) रहा ....
फिर कुछ समय बाद कुछ ब्राह्मण राजा से मिलने उस राज्य मे आए और उन्होंने किसी महिला से महल का रास्ता पूछा ।
उस महिला ने महल का रास्ता तो बता दिया पर रास्ता बताने के साथ-साथ ब्राह्मणों से ये भी कह दिया कि "देखो भाई ....जरा ध्यान रखना .... वह राजा आप जैसे ब्राह्मणों को खाने में जहर देकर मार देता है ।"
बस जैसे ही उस महिला ने ये शब्द कहे, उसी समय यमराज ने फैसला (decision) ले लिया कि उन मृत ब्राह्मणों की मृत्यु के पाप का फल इस महिला के खाते में जाएगा और इसे उस पाप का फल भुगतना होगा ।
यमराज के दूतों ने पूछा - प्रभु ऐसा क्यों ??
जब कि उन मृत ब्राह्मणों की हत्या में उस महिला की कोई भूमिका (role) भी नहीं थी ।
तब यमराज ने कहा - कि भाई देखो, जब कोई व्यक्ति पाप करता हैं तब उसे बड़ा आनन्द मिलता हैं । पर उन मृत ब्राह्मणों की हत्या से ना तो राजा को आनंद मिला .... ना ही उस रसोइया को आनंद मिला .... ना ही उस साँप को आनंद मिला .... और ना ही उस चील को आनंद मिला ।
पर उस पाप-कर्म की घटना का बुराई करने के भाव से बखान कर उस महिला को जरूर आनन्द मिला । इसलिये राजा के उस अनजाने पाप-कर्म का फल अब इस महिला के खाते में जायेगा ।
बस इसी घटना के तहत आज तक जब भी कोई व्यक्ति जब किसी दूसरे के पाप-कर्म का बखान बुरे भाव से (बुराई) करता हैं तब उस व्यक्ति के पापों का हिस्सा उस बुराई करने वाले के खाते में भी डाल दिया जाता हैं ।
अक्सर हम जीवन में सोचते हैं कि हमने जीवन में ऐसा कोई पाप नहीं किया, फिर भी हमारे जीवन में इतना कष्ट क्यों आया .... ??
ये कष्ट और कहीं से नहीं, बल्कि लोगों की बुराई करने के कारण उनके पाप-कर्मो से आया होता हैं जो बुराई करते ही हमारे खाते में ट्रांसफर हो जाता हैं ....
: A very deep philosophy of Karma example
संतो की वाणी समझे कोई कम बुद्दिमान !
नयाल सनातनी
संत के विचार !
कभी मेरा अहंकार मुझे दुसरो की सच्ची बात भी मानने से रोकता था और हर किसी को गलत साबित करने में ही मैं अपनी विद्द्वत्ता समझता था । मुझसे बड़ा ज्ञानी कोई नहीं यह अहंकार मेरे अंदर घर बना कर रहता था । पर प्रभु कृपा से एक दिन ऐसा आया मैं इस महां दोष से मुक्त हुआ । आज में सबकी बात सुनता हूँ, सोचता हूँ फिर अपने अहंकार रुपी रावण को दूर रख कर राम रुपी आदर्श सोच से विचार कर आखिर मे सबका मंगल चाहता हूँ । सायद यही मेरे पूर्व के पाप कर्म रुपी दोषों को पूण्य में बदलने का मार्ग हो ।
नयाल सनातनी
बलिदानी संतों एवं स्वामी करपात्री महाराज के नेतृक्त में हुए 1966 के गौ-रक्षा आंदोलन के वे 8 दिन !
1 नवम्बर से 8 नवम्बर 1916 तक फिर उसी तरह दुहराये जायेंगे दिल्ली जन्तर- मंतर पर तब 7 नवम्बर 1966 को गोपाष्ठामि थी अब 50 वर्ष बाद इस बार 8 नवम्बर 2016 को गोपाष्ठामि है ।
8 नवम्बर 1966 को तत्कालीन सरकार ने स्वामी करपात्री जी महाराज को जेल में डाल कर लोहे के राडो से पिटवाया,उनका सर फोड़ दिया था जिससे उनकी आँखों की रौशनी जाती रही । बाद में उस महान तपस्वी स्वामी करपात्री महाराज ने काशी में तप-योग और ''सूर्य चाक्षुषी विध्या'' के बल पर फिर से अपने आँखों की रौशनी पाई और अनेक ग्रंथो की रचना की ।
इसलिए स्वामी करपात्री जी और उनके साथी हजारों संतों के उन ऐतिहासिक 8 महान ''गौ-क्रांति'' के दिनों को उसी तरह तप करके, सुरभि महा मन्त्र और गोपाल मन्त्र का जप करके हम सभी गौ-प्रेमी दिल्ली जन्तर-मन्तर पर ही मनाएंगे ।

आप सभी गौप्रेमी 1966 के बलिदानी संतों-स्वामी करपात्री जी और 10 लाख उन गौ-भक्तो के संतान इस महायज्ञं में जरूर अपनी-अपनी जुम्मेवारी समझकर अपनी उपस्थिति दर्ज करें ।
!! जो सहीद हुए गौ संस्कृति के लिए, उनकी याद करें क़ुरबानी !!
निवेदक --- "सर्वदलीय गौरक्षा मंच" एवं सहयोगी समस्त गौ-भक्त समाज ।
ध्यान रहे ! मैं नहीं हम सब सनातन गौ - संस्कृति के अनुयाई
एक संत की वाणी !
प्राचीन समय में जंगल में अपने परिवार और शिष्यों के साथ रहते हुए विष्णु का काम कर रहे एक संत के पास भूखा-प्यासा-हलकान एक राजा पंहुचा जो शिकार खेलने जंगल आया राजा रास्ता भटक गया । घोड़े की दुर्घटना में मौत के बाद वह चलते -चलते थक कर चूर था आते ही संत से बोला मेरी रक्षा करों और बेहोश होगया । संत और शिष्यों ने उसके कपडे और उसके पास लटकी तलवार देख कर समझ लिया की या तो यह राजा है या राजा कोई बड़ा सैनिक अधिकारी उन्होंने उसकी खूब सेवा की कपडे जो कही -कही से फट चुके थे सी दिए । शरीर के घावों में जड़ी-बूटी की दवा लगाई और जगाने के बाद जो भोजन उपलब्ध था वह खिलाया। राजा तृप्त होगया । जाते वक्त राजा बोला मेरे पास इस वक्त दो ही वस्तु है जिसमे से एक आप को भेंट करना चाहता हूँ महात्मा । एक मेरे पास यह सोने की मुठ और हीरे जड़ित सावा करोड़ की तलवार है एक सावा आने की सुई जो मेरी पत्नी ने दी है जिसका मैं खुद कोई मूल्य नहीं मानता ।आप जो चाहे ले सकते है ।
संत ने कहाँ तलवार की हमें आवश्यकता नहीं हम जंगल में रहते है यहाँ जिव-जंतुओं के साथ । वे भी निहत्थे और हम भी निहत्थे रहेंगे तो ही सुरक्षित रहंगे यही जंगल का कानून है जो परमात्मा ने बनाया है । जंगल का नियम है जब तक हम उनको दुःख नहीं देंगे वे हमें दुखी नहीं करते हमारी नित्य संख और घंटे की ध्वनि से ही हिंसक जीव हमारे अहाते से दूर रहते है ।
हां आप सुई दे सकते हैं हमारे पास एक ही सुई है जो अनेक विद्यार्थियों के कपडे सिलने के लिए पर्याप्त नहीं हो पाती । अब दो सुई होगी तो हम अधीक कपडे सीलकर शर्दी में इन बच्चों को ठण्ड से बचा पाएंगे । वैसे भी संतो के पास श्रजन की वस्तु का रहना ही उचित है । तलवार कभी न कभी विनाश ही कराती है ।
राजा ने कहाँ आपको ठण्ड कैसा !
जंगल में इतनी सारी लकड़ियाँ पड़ी है उनको रात-दिन खूब जलाओ मैं राजा हूँ अपने हकीम को हुक्म दूंगा की आप पूरा जंगल भी जला दें तो आपको कुछ न कहाँ जाय ।
संत बोले हमारी आवश्यकता सिर्फ भोजन बनाने के लिए जलावन की है वह हम अपने गायो के गोबर के कंडे से पूर्ति करते है क्योंकि भगवान के भोग हम गाय की कृपा से ही करा पाते है । हम जंगल में रहते जरूर है कभी जंगल की लकड़ी को नहीं जलाते अधिक ठण्ड होने पर गौशाला में गायों के बीच ही सोते और विद्यर्थियों को पढ़ाते है । जो एक साधरण गृहस्थ एक महीने में अपने परिवार के लिए लकड़ी जलाता है । उतना हम एक साल में भी नहीं जलाते । साधु होने की जुम्मेवारी के कारण भी हम संसार को विनाश नहीं श्रजन सिखाने के लिए नारायण की आज्ञा से बाध्य है । हम ही संसार को और अपने विद्यार्थियों को विनाश सीखा देंगे तो ये कभी श्रजन नहीं करंगे और विष्णु का काम श्रजन करना है साधु भी विष्णु का स्वरुप है ।
ॐ नमो नारायण ।
तब राजा ने कहाँ संत जी मैं अपने राज्य में जाकर आपके परिवार और आपके शिष्यों के लिए खूब सारा अन्न भेजता हूँ ताकि आप आराम से बिना मेहनत के भोजन करें और अधिक शिष्यों को पढ़ाएं ।
सद्गृहस्थ संत ने कहाँ जब तक मैं मेरे साथी ऋषि इन विद्यार्थियों को शिक्षित करते रहते है उतने समय में मेरी पत्नी और मेरे साथी ऋषियों की पत्नियां इस जंगल में ही गौ माता की कृपा से इतना अन्न उपजा लेती है कि हमें साल भर अपनी आवश्यकताओं के लिए किसी के दर पर नहीं जाना पड़ता ।
संत समाज को देने आया है इस जगत में लेने नहीं ।
हम अपने परमात्मा को भिक्षा में मिला अन्न का भोग कभी नहीं लगा सकते यही शिक्षा हमारे पूज्य गुरुदेव ने दी थी ।
राजा ने कहाँ आप संत है आपको काम करने की क्या आवश्यकता है आपको देने वाले तो हजारों तैयार हो जायेंगे आप और अधिक वेदपाठी तैयार कीजिये ताकि मेरे राज्य का कल्याण हो ।
संत ने कहाँ सबसे पहले तो जंगल में रहने वाले सद्गृहस्थ संत हो या गृहस्थ में रहने वाले मेहनत कर परिवार पालने वाले असली संत बिना मेहनत की रोटी खाने वाला, बिना अपनी मेहनत के कमाये अन्न का भोग जो परमात्मा को देता है उसका भोग चाहे 656 प्रकार के ही क्यों न हो ! नारायण स्वीकार नहीं करते ।
इसलिए राजा जी आपके राज्य में भी कभी अन्न की आवश्यकता हो तो हम अधिक मेहनत करके आपकी मेहनत न करने वाली गरीब जनता के लिए अन्न जरूर भेजेंगे । पर आप कोशिश करना की आपकी सारी जनता मेहनत कर भोजन करें ।
निठल्लों के पुण्य ततकाल नष्ट हो जाते है चाहे वह साधु-संत या देवता ही क्यों न हो ।
और आप भी सुई से अधिक काम लीजिये आपकी पत्नी ने आपको सुई इसलिए भेट की थी उनको मालूम था एक दिन यह सुई आपको संसार का सबसे कीमती ज्ञान प्राप्त करा देगी । उस ज्ञान का नाम है ।
हक़ हलाल की कमाई ।
नयाल सनातनी
अभी नहीं तो कभी नहीं !
एक दिन ऐसा आएगा जब लालची हिन्दू अपनी संपूर्ण गौवंश को बेच कर ख़त्म कर देंगे तब लालची सरकारें धन के मद में अंधी-बहरी होकर आपके गौशाला के गायों को मांस के लिए बेच देंगी । तब से पहले जागों 7 नवम्बर को गौवंश रक्षा के महाआंदोलन में अपनी जुम्मेवारी समझ भाग लीजिये ।
चलो जन्तर-मंतर दिल्ली 7 नवम्बर संपूर्ण गौरक्षा मिशन पर ।
निवेदक :-- सर्वदलीय गौरक्षा मंच
समस्त देश वासियों से एक पवित्र अपील ।
गाय को भारत के प्राण मानने वाला एवं स्वामी करपात्री जी महाराज का कट्टर अनुयायी होने के नाते !
मैं देश की समस्त मत- संप्रदायों की जनता-जनार्दन से एक अपील करता हूँ की इसबार 1 से 8 नवम्बर तक भारत ही नहीं विश्व जननी "गाय माता" के लिए 1966 में शहीद हो गए हजारों संतो की 50 वी वर्षगाठ पर जरूर जन्तर-मंतर दिल्ली पहुचे ।
सामूहिक रूप से अपनी सरकार और विपक्ष के सभी सांसदों से भारत की एकता-अखंडता और भाई चारे के लिए देश में संपूर्ण गौरक्षा का कड़क क़ानून मांगे ।
मैं समस्त भारतीय मुस्लिम और इसाई संप्रदाय के अनुयायियों से भी आग्रह करता हूँ आप अगर मुहमद साहब एवं इसामशीह जी के सच्चे अनुयायी हो तो उनकी कुरान और बाइबिल में कही बात गाय का दूध, दही, घी मानव के लिए अत्यंत लाभकारी और गौ मांस शरीर के लिए हानिकारक और धर्म को नष्ट करने वाला है उसे भी माने । मुस्लिम भाइयों क्या आप बाबर, हुमायु,अकबर से भी बड़े इस्लाम धर्म के रक्षक है । या उनसे अधिक मानवतावादी है जिन्होंने भारत में लंबे समय तक राज ही नहीं किया भारत की जनता के ह्रदयों पर भी राज किया । इसका कारण एकमात्र यह था कि वे अल्ला के आलावा अन्य धर्म के लोगो की भावनाओं को भी इबादत समझते थे । देश के राष्ट्रपति डॉ अब्दुल कलाम को भारत का जनमानस धर्म-जाती से ऊपर उठकर देवता की तरह सम्मान देता है । क्योंकि वे सभी धर्मों के लोगो के पूजनीय प्रतीकों को आदर करते थे । गाय और बैल आदि को चुनाव चिन्ह की तरह इस्तेमाल कर भारत पर एक क्षत्र राज करने वाली कोंग्रेस के शासन काल में अहंकार बस एक समय संतों और गौरक्षको पर बड़े जुल्म हुए परिणाम स्वरुप उनके शासन करने वाले शासको एवं पार्टी का लगभग सूर्य अस्त हुआ सा प्रतीत होता है । जिसकी शायद ही कोई कल्पना कर सकता था !
वही जिस पार्टी के मुखिया अटल बिहारी बाजपेई जी ने 1966 में गौरक्षा के आंदोलन में संतों का साथ दिया लाठिया खाई गोली लगते- लगते बचे !
जिस पार्टिय का आजादी के बाद आज तक नारा रहा गौ हत्या बंद करो उस पार्टी को पहली बार देश के सभी गौभक्तों ने बहुमत से जिताया तो अहंकार बस वह पार्टी के मुखिया भी वही गलती दुहराते से दिखे !
पर उस पार्टी के मार्गदर्शक एक सत्य की राह पर देश हित में सब सुख कुर्बान कर देने वाला संगठन भी है जिसे संघ कहते है वे सजग पहरी की तरह उस पार्टी को कभी कोंग्रेश की तरह अहंकार के गटर में नही उतरने देगी यह विश्वास भी देश की जनता को हो गया । जब संघ प्रमुख ने कहाँ गौरक्षक और गौ सेवक भले मानव होते है । उनका उद्देश्य देश को बर्बाद करना नहीं बल्किन देश को आवाद करना है ।
वर्तमान में एवम पूर्व में सर्ववोच्च पदों पर बैठे देश के हुक्मरानों अभी अधिक देर नहीं हुई है हम देश की सत्ता पक्ष और विपक्ष के सभी सांसदों से कर वद्द निवेदन करते है कि गाय भारत माता की आत्मा और भारतीयों की जीवन में बसी साँस की तरह सुख देने वाली है ममता मई माँ के सामान हितकारी है । या यों कहें तो अतिशयोक्ति नहीं होगी भारत माता ही गाय माता है । गाय की हत्या भारत की हत्या के सामान जघन्य अपराध है ।वह अपने हत्यारे को भी हत्या से पूर्व दूध देकर गर्दन देने वाली परोपकारी प्राणी है ।
जब कोई बहुत ही अच्छा और सीधा व्यक्ति होता है तो मुस्लिम भाई कहते है यह तो अल्ला मिया की गाय है यानि जो सिर्फ देती ही देती है उसको काट कर खाना कहाँ का न्याय है ? सनातन धर्म में गाय को संत की उपाधि से नवाज गया है । संत जो समाज को देता है लेता नहीं ।
गौ चरणों का दास मैं "नयाल सनातनी" आप सभी देश वासियों से फिर एक बार मन में बैठे परमात्मा की ओर से अपील करता हूँ गाय और उसके वंश को नष्ट होने से बचाने सरकार को और विपक्ष को मनाने सभी देश के गौ- गोपाल प्रेमी 7 नवम्बर को सिर्फ एक दिन जंतर - मंतर आकर अपना निवेदन भारत की संसद जो भारतीय संविधान का रक्षक है उसके सामने रखें ।
क्या आज संचार के युग में भी हम एक दिन 20 लाख लोग अपनी माँ को भी जीवन दान देने वाली माँ से भी बढ़कर निस्वार्थ सेवा करने वाली गाय और उसके वंश की रक्षा के लिए सरकार से निवेदन करने दिल्ली नहीं पहुच सकते !
1966 में हमारे संतों से कैसे किया हूँगा प्रचार ? सोचो कैसे उस वक्त 20 लाख लोग दिल्ली आये होंगे ?
कितनी श्रद्धा होगी उनके मनो में अपनी गाय माता के लिए ? आज क्या होगया देश की जनता को कही हम स्वार्थी तो नहीं हो गए ! अगर हां तो यह बात याद रखिए स्वार्थी सिर्फ अपना नुकसान करता है लोगो का नहीं !
मैं अपने साथियों के साथ पूरे 8 दिन जंतर-मंतर पर लाखों मच्छरों के बीच डेंगू और चिकन गुनिया के भय के विपरीत जो मुझे हो चूका है पिछले साल 21 दिन जन्तर- मन्तर पर सत्याग्रह के बाद फिर वहां देश की कानून बनाने वाली संसद में बैठने वाले सभी पक्ष- विपक्ष के माननीय सांसदों से "सत्य का आग्रह" सत्याग्रह" करने एक झोपड़ी बना कर जन्तर-मंतर पर फिर आंदोलन करूँगा ।
आप में अगर गाय और उसके वंश के त्याग तपस्या के प्रति थोड़ी भी श्रद्धा है ! तो मेरा साथ देने आ पहुँचिये । मैं 1 तारीख नवम्बर से आपको 8 तरीख नवम्बर तक वही बैठा टकटकी लगाए आपके इंतजार में मिलूंगा ।
मेरा जन्म भले देव भूमि उत्तराखंड में हुआ हो पर मैंने अपनी कर्म भूमि हैदराबाद को बनाया है । अपने परिवार को उनके हाल पर इतने दूर छोड़ कर मैं दिल्ली में भूख़े- प्यासे अपनी या अपने परिवार की लड़ाई लड़ने नहीं आप सबके कल्याण की लड़ाई लड़ने जा रहा हूँ । मुझे आपका साथ चाहिए । क्योकि गौवंश के कटने से संसार पर बड़ी भारी विपदाएं आती है जिनको आप महामारी, भूकंप-सुनामी आदि नामो से जानते है । कुछ साल पहले केदार नाथ-बद्रीनाथ की घटना आपको याद हो तो समझ जाइये वह पहाड़ी गौवंश के नाश का ही बीज था ।
आपको याद होगा उज्जैन,ओंकारेश्वर, इंदौर आदि का वह प्रलय जिससे संत जन भी त्राहिमाम- त्राहिमाम करने लगा था । जब महाराष्ट्र हाय कोट ने हजारों बैल और गौहत्या पर बैन लगा दिया था तो चेन्नई में कुछ दुष्टो ने हाय कोट के सामने कुछ नंदी बैलो को खुलेआम क़त्ल कर विरोध किया । तब दुनिया ने देखा की चैन्नई के लोगो को अपनी जान बचाने आर्मी की मदद लेनी पड़ी और उनका सब कुछ तबाह हो गया । नेपाल में पहाड़ी गौवंश के अनादर के कारण ही पिछले साल क्या हुआ दुनिया को मालूम है । ये तो कुदरत के कानून को न मानने और कुदरत और पृकृति की सबसे हमदम गाय के कत्लेआम से होने वाले दुष्परिणाम की एक बानगी भर था । आगे जो होने वाला है उसकी कल्पना से ही विद्द्वानो की रूह कांप रही है ।
"नयाल सनातनी"स्वामी करपात्री जी महाराज का कट्टर अनुयायी रामराज्य वादी चिंतक विचारक ।

Tuesday, August 30, 2016

सनातनी विचार !
ज्ञान मुफ्त मिला है प्रभु कृपा से तो मुफ्त बाटों !
संतों का काम है बिना एक कौड़ी लिए विश्व के सभी ''सनातनियों'' को सच्चाई की राह दिखाना और साफ-सुथरे आईने का काम है कितना भी बड़ा व्यक्ति या संत तो उसे उसके मुहँ के दाग दिखाना ! विद्द्वान कहते है इनमे से जो अपने सच्चे कर्म से विचलित हुआ उसको संसारी लोग बाजु रख देते है ! .
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''नयाल सनातनी''

Friday, August 26, 2016

सनातनी विचार !
सडयंत्र कर किसी ने आपको गलत उद्देश्य से बदनाम कर दिया या किसी बदनामी में फंसा दिया है । तो आप भी उसी तरह सडयंत्र न करें,धीरज रखें । परमात्मा सब देख रहा है, आपकी पीड़ा से अधिक बड़ी पीड़ा सडयंत्रकारी को होने वाली है । यह पृकृति का नियम है,गेहू बोकर वह गेहू ही देता है धन -धान नहीं ! -----
उसके यहाँ देर तो है पर अंधेर नहीं ।
" नयाल सनातनी"
सनातनी विचार !
मेरी मृत्य कल-परषों कभी भी हो सकती है ! यह बात ह्रदय में स्वीकार करने वाला जीव व्यर्थ - अनर्थ कार्यों से बचकर सावधानी के साथ भगवान का स्मरण करते हुए भगवत्सेवा के भाव से भर जाता है । कल मारना ही है तो आज पाप सर पर रखके क्यों ले जाओं ? यह भाव प्रबल हो जाता है ।
अतः मनुष्य मात्र को मृत्य को सदा समीप समझना चाहिए ।
"नयाल सनातनी"
सनातनी विचार !
चाह मिटी चिंता गई , मनुवा बेपरवाह ।
जाको कुछ न चाहिये, सोई सहंशाह ।।
ह्रदयहीन हुए बिना , बेईमान हुए बिना , अपना मूल्य घटाये बिना और पराधीन हुए बिना कोई भी मनुष्य सांसारिक सुख नहीं भोग सकता ! पर यह भी सत्य है कि परालौकिक-आध्यत्मिक सुख भोगने की इच्छा वाले व्यक्ति को इन सब की जरूरत ही नहीं पड़ती है ।
"नयाल सनातनी"

Monday, August 22, 2016

सनातन सत्य !
कुत्ता, मुर्गा, शमशान में चांडाल, गधा और ऊँठ इनको छु-जाने पर बिना स्नान किये सीधे कभी मन्दिर नहीं जाना चाहिए ।
हाँ रास्ते में गौवंश मिले तो अहंकार शून्य होकर जरूर छूना और प्रणाम करना चाहिए ताकि आपको देव-दर्शन का पूरा फल मिल सके !
"नयाल सनातनी"
सनातनी विचार !
गायों और पेड़ो का है एक दूसरे से जन्मों का नाता । पेड़ होंगे धरा पर तभी खुशहाली से जी पाएगी हमारी गौमाता ।।
"नयाल सनातनी"
सनातनी विचार !
श्रम से थके हुए व्यक्ति को आराम देना, रोगी व्यक्ति की सेवा करना, देवताओं का पूजन करना, वैदिक-विद्द्वान ब्राह्मण के पैर धोना तथा जूठन साफ करना ये कार्य गौदान के सामान पुण्यप्रद हैं ---
''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
अन्याय से उपार्जित धन के द्वारा जो पुण्यकर्म किया जाता है, उसका परलोक में कोई फल नहीं मिलता --
''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
 जो मनुष्य अकारण इधर-उधर थूकता रहता है, पान-तम्बाकू-गुटका खाकर पीक सार्वजानिक स्थानों पर करता है . उसको अगले जन्म में शुकर होकर मानव जाति का थूका और मल खाना पड़ता है ---
   ''नयाल सनातनी''

Thursday, August 11, 2016

सनातनी विचार !
गौ-कृपा की पहली शर्त आप की विनम्रता एवम भेद - भाव रहित आचरण ---
सनातनी विचार !
गौ-कृपा की पहली शर्त आप की विनम्रता एवम भेद - भाव रहित आचरण ---
                         ''नयाल सनातनी''

Monday, May 30, 2016

सनातनी विचार !
गाय बचेगी - दूध मिलेगा, बैल बचेगा - अन्न मिलेगा, गाय और बैल कटेंगे - राक्षस प्रवृति बढ़ेगी - देश मिटेगा।
''सर्वदलीय गौरक्षा मंच''
सनातनी विचार !
गाय बचेगी - दूध मिलेगा, बैल बचेगा - अन्न मिलेगा, गाय और बैल कटेंगे - राक्षस प्रवृति बढ़ेगी - देश मिटेगा।
''सर्वदलीय गौरक्षा मंच''
सनातनी विचार !
''सनातन धर्म'' में सुपात्र को दान का बड़ा महत्व दिया गया है और संसार के सभी मत-संप्रदायों में भी सुपात्र को ही दान की बड़ी महिमा बताई गई है।''सनातन धर्म'' के अनुसार गाय-गौवंश से अधिक सुपात्र और कोई नहीं है जो देवो की भी देवी बताई गई है। और गाय को सिर्फ हरा-सूखा चारा ही दान में चाहिए। धिक्कार हम सनातनियों को हम वह भी नहीं दे पाते ! जिसके अभाव में लाखों गौवंश दम तोड़ देता है।
''सर्वदलीय गौरक्षा मंच''

Tuesday, February 23, 2016

देश द्रोह क्या-क्या है ! लुट गया हरियाणा का गरीब !
क्या देश के खिलाफ नारे लगाना ही देश द्रोह है, देश के टुकते -टुकड़े करने के नारे ही देश द्रोह है ? या सच में देश के लोगो के ह्रदय के टुकड़े -टुकड़े कर देना देश द्रोह है। देश की 34 हजार करोड़ की सम्पति को नष्ट कर देना आग के हवाले कर देना लूट लेना भी देश द्रोह की परिधि में आता होगा ? कल हरियाणा के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु रुधें गले से टीवी में बोल रहे थे मेरे परिवार के 9 सदस्यों को एक कमरे में बंद करके पुरे मकान को आग के हवाले कर दिया उप्रदवियों ने।
अगर पडोसी धुवे के गुब्बार में छुप के पिछले दरवाजे से मेरे परिवार को बाहर नहीं निकालते तो 9 जीवन दम तोड़ देते ! क्या ये देश द्रोह नहीं है ? जब एक पावरफुल वित्त मंत्री की यह गति है हरियाणा में तो बाकी आम लोगो की गति सब आसानी ले अनुमान लगा सकते साधारण बुद्दी वाले लोग भी !
एक गरीब ढाबे वाली महिला कह रही है मैं विधवा हूँ मेरे दो जवान बेटियां है, मेरे ढाबे को आग लगा दिया, अब कुछ नहीं बचा मेरा परिवार आज रोड पर है ? क्या मुगलों ने भी ऐसा किया हूँगा नहीं नहीं इतने निर्दयी मुग़ल भी नहीं होंगे !
ऐसा वाक्य आज तक सुनने को नहीं मिलता जो लुटने के बाद गरीबो की सम्पति सब आग के हवाले किये हूँ। हरियाणा के लोगो का विश्वास हरियाणा के पोलिश प्रशासन पर से भी उठ गया। अपने जीवन को अब भी असुरक्षित महसूस कर रहे आम नागरिक सब कुछ बेच के हरियाणा से जाना चाहते है। किसी को अपने देश- घर-बार सब छोड़ने पर मजबूर करना क्या यह देश द्रोह नहीं ?? इंद्रा गाँधी के हत्या के बाद जो सिक्खों के साथ अत्याचार हुआ उससे भी विकराल रूप इस बार आम हरियाणा के नागरिको के साथ हुआ। इस देश में जब आज तक सिक्खों को न्याय नहीं मिला तो हरियाणा के आम नागरिको को न्याय मिलेगा यह संभव ही नहीं ?
एक टीवी चैनल वाले कह रहे थे कुरुक्षेत्र के महाभारत युद्ध में हुए नुकसान से अधिक नुकसान है यह। फर्क सिर्फ इतना है तब हर तरफ लाशों के मुंड दिख रहे थे पर अब हर तरफ घरों दुकानों मॉलो के जले हालत में सर मुंड दिख रहे है। अब क्या यह हमेशा के लिए दिलो में आई दीवार को आरक्षण मिलने के बाद भी लोग पाट पाएंगे ? भय अपने दिलो से निकल पाएंगे ये लोग भगवान इनको शक्ति देना ! क्योकि मरे हुए आदमी को दुःख नहीं होता लुटा-पिटा आदमी पल-पल बददुवा देता है जिससे लुटेरा खुशहाल परिवार भी बर्बाद हो जाता है। सावधान अब जो लुटा है उसे पचा के दिखाओं ! जिन लोगो ने इंद्रा गाँधी की हत्या के समय सिक्खों से लूट-पाट की वे सब बर्बाद है। कईयों के तो वंश उजाड़ गया कोई तिलांजलि देने वाला नहीं बचा --- अगर थोड़ी भी शर्म बची है तो दुबारा हरियाणा के लोगो के आशु पोछो ! बाकी राम भली करें। जो लोग लुट चुके रो-रो कर अपनी किसमत और भगवान को कोष रहे है ! उनके साथ पूरा देश है अगर सरकार उनको सही मुवाजा नहीं दे पाती है तो ? पुरे देश के लोगो को एक ''हरियाणा सहायता कोष'' बनान चाहिए जिससे उन आहात लोगो की कुछ मदद हो सकें।
बेहद दुखी ह्रदय से लिखा गया है एक मानवतावादी की कलम में ---
''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
सनातन शास्त्रों के अनुसार दान के तीन भेद ! गृह, मंदिर या महल, विध्या, भूमि, गौ, कूप, प्राण और स्वर्ण – इन वस्तुओं का दान अन्य वस्तुओं की अपेक्षा उत्तम माना गया है । अन्न, बगीचा, वस्त्र तथा अश्व,वाहन आदि – इन द्रव्यों के दान को मध्यम  दान कहते हैं । जूता, छाता, बर्तन, दही, मधु, आसन, दीपक, काष्ठ  और पत्थर आदि वस्तुओं के दान को कनिष्ठ दान बताया है ।
''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
किसी भी प्रकार के दान का थोडा होना या बहुत होना अभ्युदय का कारण नहीं होता ! अपितु श्रद्धा और शक्ति ही दान की वृद्धि और क्षय का कारण होती है । यदि कोई बिना श्रद्धा के अपना सर्वस्व दे दे अथवा अपना जीवन ही निछावर कर दे तो भी यह उसका फल नहीं पाता !
इसलिए दानी को श्रद्धालु होना चाहिए । श्रद्धा से ही धर्म का साधन किया जाता है, धन की बहुत बड़ी राशि से नहीं । अन्न दान देने का मतलब यह नहीं हम रुखा-सुखा भोजन परोषे !
शक्तिनुसार श्रदा से उत्तम भोजन कराने वाला ही अंत में उत्तम फल का भागी होता है ...
 ''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
भगवान ( अल्ला, गॉड,वाहे गुरु ) तो सब जगह है, पर नजर होनी चाहियें ! भूख से बिलखते बच्चों में,कसाई की तलवार के नीचे कांपती गाय में, मछवारे के जाल में फंसी तड़फती मछलियों में, पिजरे में आजादी के लिए फडफाड़ते पंछी में !
''नयाल सनातनी''  
सनातनी विचार !
मूर्खों में साहस होता ही है। (यहाँ साहस का तात्पर्ये चोरी-चकारी, लूट-पाट, हत्या आदि से है ) मूर्खों से विवाद नहीं करना चाहिए।क्योकि वे अपाने हित के लिए किसी की भी जान ले लेने में भी नहीं चूकते। प्रस्तुति - ''नयाल सनातनी''
 विचार -- आचार्य चाणक्य
सनातनी विचार !
भगवान सबके लिए सुलभ है, बस हमें पात्र बनना है। क्योकि भगवान को सोने-चाँदी के पात्र में ही भोग लगाया जाता है पीतल में नहीं।
''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
जिस प्रकार कीमती रत्न-आभूषण खंडित होने पर भी फैका नहीं जा सकता ! उसे हिफाजत से सम्भाल कर रखा जाता है । उसी प्रकार विद्वान व्यक्ति में कोई साधारण दोष होने पर उस पर ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए।विद्द्वान भी एक अमूल्य रत्न है, संकट काल के समय विद्द्वान 'राजा' को सही मार्गदर्शन कर प्रजा के संकटों का हरण करता सिद्द होते है।
     ''नयाल सनातनी'' 
सनातनी विचार !
सम्पूर्ण राज्य पर अधिकार, मंत्रीगण कर्तव्य परायण, पदाधिकारी आज्ञाकारी,चतुरंगणी सेना (हाथी, घोड़े, रथ और पैदल) समस्त वीर सैनिक ( जल सेना, थल सेना, वायु सेना, ) सब अधिकार क्षेत्र में और सब पर नियंत्रण पर अपनी इन्द्रियों पर नियंत्रण नहीं ! तो राजा नष्ट हो सकता है। अपनी इन्द्रियों पर विजय पाकर देश हित ( प्रजा हित )  में कार्य करने वाला 'राजा' ही सदा विश्व विजेता बनता है।
''नयाल सनातनी''

Monday, February 22, 2016

सनातनी विचार !
इस पृथ्वी पर राज्य, स्वर्ण आभूषण-हीरे-मोती ,दास- दासीया, गाय-बैल, अश्व, हाथी और पृथ्वी तक का दान देने वाले राजा-महाराजा बहुत हुए आगे भी होंगे इसमें संसय नहीं ! लेकिन जीव मात्र को सदा अभयदान देने वाले मानव दुर्लभ हैं।
      ''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
मनुष्य आया ख़ाली हाथ था पर जब जायेगा उसके साथ उसके अच्छे और बुरे कर्म जरूर साथ जाते है। जो यह निश्चित करते है की 'जीव' भयंकर यातनाओं वाले यमराज के लोक जायेगा या पवित्र आत्मा वाले महाराज धर्मराज के धर्म-लोक !
         ''नयाल सनातनी''

Saturday, February 20, 2016

सनातनी विचार !
दुष्ट की संगति अर्थात कुसंगति से सावधान !
दुष्ट की संगति कीर्ति नष्ट कर देती है, कलेश उत्पन्न कराती है, अशुभ गति प्रदान करती है,मनुष्यों में उद्वेग और खिन्नता उत्पन्न कराती है। बुद्दी को भ्रम में डालती है।प्रतिष्ठा का नाश कराती है। प्राण शक्ति क्षीण करा देती है। जिस प्रकार अग्नि शीतल चन्दन की लकड़ी को भी जला देती है उसी प्रकार दुष्ट व्यक्ति किसी का भी अहित कर सकते है। कुसंगति सकल मंगलों को नष्ट करा देती है।
''नयाल सनातनी''

Thursday, February 11, 2016

सनातनी विचार !
नींद- इर्ष्या - काम चोरी आदि अनेक अपनी बुराइयों को स्वीकार करना बड़े साहस का काम है। पर उससे बड़ी हिम्मत की बात यह है कि उन्हें छोड़ने का दृण निश्चय किया जाय ! जीवन में आगे बढ़ा जाय,जब हम ये सब बुराइया छोड़कर आगे बढ़ते है तो अनेक 'शुभ मंजिलें' हमारा इंतजार करते हुए खड़ी मिलती है,जो सत मार्ग की ओर ले चलती है। और उस राह पर हमें परमात्मा के सच्चे बन्दे मिलते जाते है।
''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
साहस (मजबूत आत्म-बल ) ही एक मात्र ऐसा सच्चा साथी है। जो जिसे लेकर मनुष्य एकाकी भी दुर्गम दिखने वाले पथ पर चल पड़ने एवं लक्ष्य तक जा पहुँचने में समर्थ हो जाता  है। जैसे ही साहस टुटा रास्ता छूटा, मंजिल बहुत दूर होती जाती है। गहरे दरिया को लांघने का साहस दिखाने वाला 5 फुट का साहसी बालक एक दिन देश का प्रधान मंत्री बन जाता है। ( लाल बहादुर )
   ''नयाल सनातनी''
  
सनातनी विचार !
अहिंसा परमो धर्मः ! जो व्यक्ति हिंसा में प्रवृत्त होता है, उसका सारा धर्म नष्ट हो जाता है। हे मानव ! पुराणों में विद्द्वानो ने जीव-हिंसा छः प्रकार के बताये है। पहला हिंसक वह जो हिंसा का अनुमोदन करता है, यानि हिंसा करो कह कर लोगो को गलत राह की ओर भटकाता है। दूसरा हिंसक वह है जीव को मारता है। तीसरा हिंसक वह है जो विश्वास पैदा करके जीवो को फंसाता है। मारे गए जीव का मांस खाने वाला चौथा हिंसक है। उस मांस को पकाकर तैयार करने वाला पाँचवाँ हिंसक है। हे मानव ! जो उस मांस का बटवारा करता है वह छठा हिंसक है। क्रमशः ये एक के बाद एक बड़े हिंसक है, इन हिंसक प्रवृत्ति से बचकर ही श्रीमन-नारायण की शरणागति प्राप्त होती है बर्ना लाखों जन्म लेने पर भी भगवत भक्ति दुर्लभ ही मानना चाहिए जीव को ।
''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
सनातन सत्य !
शंकराचार्य ज्योतिष पीठ बद्रिकाश्रम के अनुसार आज से 1 करोड़ 62 लाख 84 हजार वर्ष पूर्व श्री राम जो राम राज्य की स्थापना किये। उनकी सत्ता इस धरा धाम पर थी।
तब भगवान श्री राम ने एक दिन अपने कुलगुरु वशिष्ठ महामुनि से एक प्रसन्न पूछा !
हे महामुनि ! हे कुलगुरु ! सनातन धर्म की व्याख्या कीजिये ? तब सम्पूर्ण वेद-शास्त्रों के जानकार वशिष्ठ महामुनि ने कहाँ।
हे राम आप सर्वग्य है, सब जानते है पर शायद अपने कुल गुरु को ईतिहास में सम्मान दिलाने ही यह प्रसन्न किये है। पर जब प्रसन्न पूछा है तो जबाब सुनो।
हे सर्वग्य श्री राजा राम ! हे मर्यादा पुरुषोत्तम ! सनातन धर्म की व्याख्या करने की मेरी सामर्थ नहीं है। ना ही मेरे पूर्वजों की थी। यह सनातन धर्म स्वयम्भू है ना इसे किसी ने बनाया, ना ही कोई बना सकता था। सनातन का मतलब ही है जो सदा था सदा रहेगा।
हे राम ! आप और हम रहे या ना रहें पर यह सनातन धर्म हमेशा रहेगा। वेद भी नेति-नेति करके इस ''सनातन धर्म'' की प्रसंसा करते है। पर व्याखया नहीं करते।
"असित गिरी समं स्यात, कज्जलं सिन्धु पात्रे,
सुरतरुवर शाखा, लेखनी पत्र मूर्वी।
लिखति यदि गृहीत्वा, शारदा सर्व कालं,
तदपि तव गुणानामीश! पारं ना याति।"
अर्थात -- हिमालय जैसे असीमित पर्वत के बराबर स्याही को समुद्र के पात्र में घोलकर देववृक्ष की शाखा की लेखनी बनाकर अनंत आकाश में यदि स्वयं ज्ञान की देवी सरस्वती भी कल्प कल्पांत तक यानी सदैव लिखती रहें तो भी शिव की महिमा का गुणगान लिखना संभव नहीं है ।
जिस तरह भगवान शिव की महिमा को कोई नहीं लिख सकता उसी तरह ''सनातन धर्म'' की गहराई नापने को कोई पैमाना नहीं है, ना होगा।
''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
सनातन सत्य वचन !
आशा तजि माया तजै, मोह तजै अरू मान।
हरष शोक निन्दा तजै, कहैं कबीर सन्त जान॥
कबीरदास जी कहते है कि जिस व्यक्ति ने आशाओं का त्याग कर दिया। संसार के माया मोह में नाता तोड़ लिया और मान और अपमान की भावना का त्याग कर दिया। किसी वस्तु की प्राप्ती पर प्रसन्नता व्यक्त करना अथवा कोई हानि होने पर दुखी होना छोड़ दिया। निन्दा और ईर्ष्या से दूर हो गये। ऐसे मानव को भेष कैसा भी पूर्ण सन्त जानो।
सनातनी विचार !
अनुभव की बात !
निष्कपट मन से जो 33 करोड़ देवी-देवताओं की पूज्या गौमाता का कार्य करते है, उनके राह में बाधा पहुचाने वाले कभी सुखी नहीं होते।उन्होंने जितना बुरा दुसरे का किया उससे अधिक उनका हो जाता है, कुछ समय में ही उनको पता चल जाता है। यह हमारी अनुभव की हुई बात है। पर उसके बाद भी उन कपटियों के बारे में पूर्ण जानकारी होने पर भी जो उनके सफलता की कमाना करता है, उनको माफ़ कर उनके साथ फिर से गौ कार्य करने को तैयार रहता है, उसपर गौमाता और अधिक प्रसन्न रहती है। उसका यस दिनों-दिन बढ़ता ही जाता है। यही सनातन सत्य है।
जय गौ माता जय गोपाल।
''सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार''
सनातनी विचार !
भगवान की ---
पंचोपचार (5 प्रकार)
दशोपचार (10 प्रकार)
षोडशोपचार (16 प्रकार)
द्वात्रिशोपचार (32 प्रकार)
चतुषष्टि प्रकार (64 प्रकार)
एकोद्वात्रिंशोपचार (132 प्रकार) और भी अनेक प्रकार पूजा विधि हो सकती है .पर सबसे सरल उपाय है भगवान को देखने का उनको महसूस करने का ध्यान में आप बैठ जाए .परमात्मा को अपने अंदर महसूस करें .अपने स्वासों को आता-जाता देखे, महसूस करें कुछ समय बाद आपको अतुलीनीय आनन्द की प्राप्ति होने लगेगी . जिस तरह इस मंदिर के दरवाजे पर ताला लगा हुआ है जब खुलेगा तब ही देव दर्शन होंगे .उसी प्रकार हमारे आत्मा के दरवाजे पर भी ताला लगा है जब ध्यान करंगे तभी परमात्मा के दर्शन होंगे . और कोई उपाय है ही नहीं परमात्मा तक पहुचाने का, परमात्मा को महसूस करने का -----
''नयाल सनातनी''.संस्थापक अध्यक्ष ;--सर्वदलीय गौरक्षा मंच
सनातनी विचार !
तुम जीत गये मैं हार गया, तेरे संसार ने मुझे मार दिया।
जिन्दगी भर जो 'राम' जपा, अंत समय मेरा काम दिया।
''नयाल सनातनी''
जीत किसके लिए,हार किसके लिए।
ज़िंदगी में ये तकरार किसके लिए।?।
जीव आया है संसार में, एकदिन जाना ही होगा।
फिर इतना सारा अहंकार, किसके लिए।?।

तुम जीत गये मैं हार गया, तेरे संसार ने मुझे मार दिया।
जिन्दगी भर जो 'राम' जपा, अंत समय मेरा काम दिया।
''नयाल सनातनी'
सनातनी विचार !
आदि-अनादि ''सनातन धर्म'' के मुकुटमणि ''सनातन ब्रह्म'' सूर्य देव के उपासना का महान पर्व, ''आदि देव'' सूर्य की कृपा प्राप्त करने का महान पर्व मकर संक्रान्त्रि की हार्द्दिक शुभ कामना सभी ''सनातनी गौ-भक्त समाज'' को जय गौ माता की ।
भगवान सूर्य को ''आदि सनातन देव'' इसलिए भी कहाँ गया है सत्युग में घोर तपश्या के पुण्य से महर्षि कश्यप की संतान के रूप में ऋषि को सम्मान देने प्रकटे सूर्य नारायण, जब श्रीराम ने अवतार लिया त्रेता युग में तब भी आप संसार का अंधकार मिटा रहे थे और जब श्री कृष्ण अवतार हुआ द्वापर युग में तब भी आप मौजूद थे, और आज कल्युग में जब पुरे विश्व में आध्यतम के क्षेत्र में घोर अँधेरे का वातावरण है तो भी आप ही अज्ञान मिटाने मौजूद है अदितीय पुत्र।
''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
मुर्ख और स्वार्थी मित्रों पर, अधर्म से कमाया धन पर - देश-धर्म के काम ना आये बेकार की जवानी पर, कभी गर्व ना करों ! काल कभी भी पलक मारते इनका अपहरण करने आने ही वाला है। इसलिए तो कह गए है ''महापुरुष'' मुर्ख मित्र से विद्द्वान दुशमन हितकारी है।
''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
सावधान -- सतकर्म हो या दुष्कर्म फल समय आने पर जरूर मिलता है। जिस तरह लाखों रुपये से लगाई गई फैक्ट्री सही दिशा में मेहनत न करने पर खाक हो सकती है और मेहनत करने पर करोड़पति बना देती है। वैसे ही सत-कर्म और दुष्कर्म का चक्र है। सतकर्म स्वर्ग और दुष्कर्म नर्क की राह दिखाता ही है।
''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
यमराज कहते है ! जो पुरुष अपने वर्णधर्म से विचलित नहीं होता, अपने सुहृदय और विपक्षियों में समान भाव रखता है, किसी का धन हरण नहीं करता, न किसी जीव को कष्ट ही पहुचता है, गौ-माता में 33 करोड़ देवी-देवताओं की परिकल्पना करते हुए उनकी सेवा रक्षा का प्रयास करता है .
उस अत्यंत रागादिशून्य और निर्मल मन व्यक्ति को भगवान नारायण का भक्त जानो और उसको प्रणाम करने का फल भी श्रीमन-नारायण के प्रणाम के फल सामान ही जानो ------
''विष्णु पुराण से''
''नयाल सनातनी''
!! श्री गिरधर गोपाल गौशाला समिति, देव भूमि, उत्तराखण्ड !!
सनातनी विचार !
जब गाय नहीं होगी, इस कल्युग में गोविन्द क्यों आयेंगे।
गोविन्द के भक्तों, बिना गाय पाले गोविन्द ना रिझ पाएंगे।।
गाय के लिए ही तो गोविन्द, वृन्दावन में नंगे पावँ भागे आये थे।
अगर अब फिर बुलाना है ! गाय पालो फिर गोविन्द को पुकारों जी।।
देखों तो कान्हां फिर कैसे नहीं आते ! कल्कि रूप रख जल्द प्रकट हो जायेंगे।
जब गाय नहीं होगी कान्हा भी नहीं आयेंगे, गाय पालो जी कान्हा चले आयेंगे।।
जो बिना गाय पाले उपदेश बहुत देते,कान्हा भी ना सुने उनकी जनता भी नकारती है।
जब गाय नहीं होगी कान्हा भी नहीं आयेंगे, गाय पालो जी कान्हा फिर चले आयेंगे।।
''नयाल सनातनी''
पर उपदेश कुशल बहुतेरे, जे आचरहिं ते नर न घनेरे----
औरों को नसीहत, खुद मियां फजीहत --- इन निचे वाली दो लाइनों पर जरूर गौर करें सभी गौभक्त मित्र .
श्री गिरधर गोपाल गौशाला समिति, देव भूमि, उत्तराखण्ड
सनातनी विचार !
बच्चों को कुसंगति से, महिलाओं को व्यर्थ बातों से, बुजुर्गों को व्यर्थ चिंता से, स्वयं को विवाद से, गौमाता को मुसीबत से, देश को भ्रष्टाचारियों से बचावें। तब तो देश, विश्व, समस्त ब्रह्माण्ड एवं स्वयंग का कल्याण निश्चित है।
''नयाल सनातनी''
एक सनातन सत्य विचार !
एक बार पत्थरों ने श्री राम सेतु बनकर श्री राम का मान बढाया ,एक बार पत्थर के पहाड़ ने गिरिराज बन कर सम्पूर्ण वृज वासियों की रक्षा कर श्री कृष्ण का यस बढ़ाया। एक बार पत्थर के पहाड़ ने संजीवनी बूटी उगा कर श्री राम के भाई लखन लाल के प्राण बचा कर श्री हनुमान जी महाराज की मेहनत को जग में मान दिलाया। एक बार उसी विशाल पत्थर ने केदार नाथ में महान संकट के समय पौराणिक केदार नाथ के मंदिर एवं उनके भक्तों की रक्षा करके शिव भक्तों के विश्वास को अमर कर दिया।
फिर भी कुछ लोग कहते है ये ''सनातनी हिन्दू'' आखिर क्यों पत्थर को पूजते है ?? जबकि हमारे यहाँ के प्रतेक कंकण- कंकण में शंकर का वास है, जो हमारा द्रण विशवास ही नहीं अटल सनातन सत्य है। इसलिए हम आज पत्थर के ऊपर बैठकर भी उस देवादिदेव महादेव को जो पत्थर के लिंग में सदा विराजमान रहते है, जो इतने भोले है की उनके पत्थर के शिव लिंग पर चोरी की नियत से चड़े चोर को सदा के लिए ईतिहास में अमर कर देते है। मैं ऐसे भोले नाथ, धर्म के रक्षक, नंदी बैल की सवारी करने वाले ''शिव'' को ही याद कर अपना और जग का कल्याण की कमाना करता हूँ। इस पत्थर का आवरण लेकर , पत्थर पर बैठकर ही उनको नमन करता हूँ ।
''नयाल सनातनी'' सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार
सनातन सत्य विचार !
महर्षि मनु की सन्तान मानव जाती के कल्याण के लिए सम्पूर्ण वेद-शास्त्रों का सार !
सहज मृत्यु हो या अकाल मृत्यु मुक्ति हेतु ''श्रीमद् भागवत कथा'' अन्तिम विकल्प !!
श्रीमद भागवत महापुराण 'सनातन हिन्दू धर्म' के 18 पुराणों का मुकुट मणि है। जिसमे भगवान योगी-महा-योगेश्व श्री कृष्ण भगवान की प्राप्ति एवं भक्ति-ज्ञान-वैराग्य और मुक्ति के सरल शाधनों को चारों वेदो की सहायता से सूक्ष्म रूप में भगवान वेद व्यास ने विशाल बुद्दी वाले श्री गणेश की लेखनी की मदद से सहज ही रूपांतरित कर दिया है। जो 'जीव' एक बार ''श्रीमद् भागवत'' का आश्रय ले-लेता है, उसे फिर भक्ति एवं मुक्ति के लिए फटकना नहीं पड़ता।
महाज्ञानी ''गाय के पुत्र गोकर्ण'' ने इस 'महापुराण' में नारद जी ने यही कथा में यह सिद्द किया है जब जीव के गंगा में अस्ति विषर्जन से, 13 दिनों तक पवित्र नदी के तट पर पिंड दान से, एक वर्ष तक विभिन्न श्राद कर्मों से, अनेको प्रकार तिर्थादी एवं अन्य श्राद कर्मों से, अनेको प्रकार के दानादि कर्मो से, अनेको ब्राह्मण-यतियों के भोजन से, गया में श्राद एवं पिंड दान से भी जिस प्रेत आत्मा की मुक्ति नहीं होती उसको किसी 'विद्द्वान वेदपाठी भागवत वक्ता' से अंतिम विकल्प के रूप में ''श्रीमद् भागवत कथा'' सुनानी चाहिए। तब निश्चित ही जीव मुक्त होकर गौलोक धाम चला जाता है। फिर उसे इस 84 लाख योनियों के चक्कर में नहीं आना पड़ता उसे 'पुनर्पि जन्मम पुनर्पि मरणम' से मुक्ति मिल जाती है। यही सनातन सत्य है। यही अमर कथा भगवान शिव ने अमरनाथ में भगवती शिवा को सुनाई थी जिसे एक सुक ने सुनी और सुखदेव नाम से विख्यात होकर श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम वक्ता-श्रोता हुए। और महायोगी सुखदेवजी ने यह कथा प्रथम बार मृत्यु के द्वार पर खड़े राजा परीक्षित को सुनाई जो अंत में भगवान में ही बिलीन हो गए। भगवान नारायण के ही अंस श्री नारदजी ने यही कथा जवान भक्ति के बूढ़े पुत्र ज्ञान एवं वैराग्य को सुनाई थी जो फिर से जवान हो गए , सरांस यह है जिसने भी यह अमर फल खाया वही अमर हो गया,मुक्त हो गया -------
''नयाल सनातनी'' स्वामी करपात्री जी महाराज का अनुयाई
संस्थापक अध्यक्ष ;--- ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच''
सनातनी विचार !
भगवान के वैरी को गुरु माफी दिला सकतें है, सत मार्ग पर ला सकते हैं . पर गुरु से ही वैर करने वाले का सर्वनाश से बचाने वाला परमात्मा भी नही ! गुरु के वैरी को इस धरती पर कही ठोर नही यही सनातन सत्य हैं ..
"नयाल सनातनी"
सनातनी विचार !
जबसे गली के गुंडे राजनीति में आ गये खद्दर (खादी) बदनाम हो गयी, वर्ना पहले हमारे पुर्वजो ने सूत कात-कात कर अपनी तथा बहन-बेटियो की आबरु तन ढककर इस खद्दर ने बचाई थी, आजादी के परवानों ने इसे पहन देश की इज्जत बचाई थी .
हे राम !
यह क्या हो रहा आज उसी खद्दर से बहन- बेटिया डर कर अपनी आबरु बचाती फिर रही हैं .गरीब इस खद्दर से भयभीत कोने मे खडा हैं .
"नयाल सनातनी"
सनातनी विचार !
धर्म किसे कहते है ! युधिष्ठर-भीष्म संवाद -- जिसमे अभुदय ( लोकिक उन्नति ) और निःश्रेयस ( पार-लौकिक उन्नति यानि मोक्ष ) सिद्द होते हो वही धर्म है। धर्म अधोगति में जाने से रोकता है, मानव जीवन की रक्षा करता है।
धर्म ने ही सारी प्रज्ञा को धारण कर रखा है। इसलिए जिससे धारण और पोषण सिद्द हो वही धर्म है। जो अहिंसा से युक्त हो वही धर्म है। जहाँ हिंसा हो वही अधर्म की सुरुवात हो जाती है। सनातन काल से ही हिंसक से जीव-जन्तु दूर भागते हुए 'अहिंसक' की शरण लेते है। जो हिंसा से पीड़ित जीव को शरण देता है वही धार्मिक है।
''नयाल सनातनी''सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार
सनातनी विचार !
मनुष्य के मुख से निकले व्यंग बाण अधिक गहराई तक, (अधिक समय) तक चोट करते हैं, वरन उसके द्दारा चलाये गये तरकस के बाणों के !
द्रोपदि के व्यंग बाण ही थे जो दुर्योधन को अर्जुन के काल समान बाणों, महाबली भीम का दुशासन की छाती फाड कर लहु पी जाने वाला महाकाल रौद्र रुप भी भयभीत नही कर पाया !!!
"नयाल सनातनी"
सत्य पथ है ! या नहीं !
जब कोई पड़ा-लिखा, अमीर या किसी सरकारी-निजी क्षेत्र में उच्च पद पर कार्यरत ब्राह्मण कुल में जन्म लिए व्यक्ति उसी ब्राह्मण कुल में ही जन्म लिए सिर्फ शास्त्रीय, वैदिक और देवपूजा, पाठ से अपने कुटम्ब का भरण-पोषण करने वाले साधारण आय वर्ग के ब्राह्मण का हक़ मारने ! अपने कार्यालय से छूटी लेकर अधिक कमाई के लालच में पंडिताई करता है। मुझे अच्छा नहीं लगता ! मैंने ऐसे ब्राह्मणों से कोई देव कार्य नहीं कराने का संकल्प लिया है। आपने ???
''नयाल सनातनी'' राष्ट्रिय अध्यक्ष :--सर्वदलीय गौरक्षा मंच
सनातनी विचार !
आपका घर वास्तु दोष से मुक्त हो सकता है ! अगर आपके पास गाय या बैल रखने का स्थान है तो एक गौ का पालन करें। अगर आप शहर में रहते है, आपके पास स्थान का आभाव है। तो आप अपने घर में एक गौमाता की मूर्ति अथवा कामधेनु गाय की फोटो जरूर रखें। आपका घर वास्तु-दोष से मुक्त हो जायेगा।क्योकि सबसे अधिक सकारात्मक उर्जा गौमाता से निकलती है। ''नयाल सनातनी''सर्वदलीय गौरक्षा मंच
सनातनी विचार !
दीन-दुनिया की परवाह ना करके अहंकार शून्य होकर जो मानव इस कलिकाल में गौमाता की सेवा-रक्षा और प्रचार का कार्य तन-मन-धन से करता है ! उसके प्रतेक कदम- कदम पर एक-एक यज्ञं का पुण्य फल नौछावर होते रहतें है, गौमाता के कृपा प्रसाद से। गौ सेवक अगर कोई यज्ञं-पूजा-पाठ-तीर्थ स्नान- पुराण पठन आदि नहीं कर सकें तो भी ! उसके द्वारा सच्चे ह्रदय से की गई ''गौ-सेवा'' के पुण्यों से ही वह अपने परिवार के कई पीढ़ी आगे और पीछे के पितरों के साथ गौलोक का अधिकारी बन जाता है। यही सनातन सत्य है।
''नयाल सनातनी'' सर्वदलीय गौरक्षा मंच
सनातनी विचार !
1---- भगवान के तीन ही मुख है प्रसाद ग्रहण करने के !
पहला गाय -गौवंश को दिया तृण सीधे भगवान को प्राप्त होता है और स्वाद की चर्चा तक गौमाता के यहाँ नहीं होती बस आशीर्वाद की प्राप्ति अवश्य
होती है यह सनातन सत्य है।
२---- भगवान का दूसरा मुख है संत- ब्राह्मण का मुख जहां स्वादिष्ट भोजन से आशीर्वाद प्राप्त होता है और आपका दिया भोग नारायण तक पहुचता है।अंत में दक्षिणा अति आवश्यक है !!
३ - --- भगवान का तीसरा मुख है अग्नि जहाँ हवन द्वारा जड़ी- बूटी,जौ -तिल,ड्राय-फ़ूडऔर गौ घृत से भगवान को भोग लगाया जाता है जिसे साधारण
मनुष्य अपनी गरीबी के कारण बहुत कम कर पाते है। जो कर पाते है उनका कल्याण और लोक कल्याण निश्चित है यह भी सनातन सत्य है।
मनुष्य को इन तीनो में से जो सरल उपाय हो या जो उनके सामर्थ्य में हो उसको अपना कर भगवान को नित्य भोग जरूर लगाना चाहिए
जिससे परमात्मा द्वारा प्राप्त मानव शरीर, जल,अग्नि, वायु, पृथवी और आकाश के उपभोग का कर्ज कुछ कम हो। वैसे तो माता- पिता और भगवान
का कर्ज कोई चूका नहीं पाया पर स्वार्थी नहीं परमार्थी बनने की कोशिश मानव को जरूर करनी चाहिए यही सनातन शास्त्रों का मत है ।
''नयाल सनातनी'' सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार।
सनातनी विचार !
जो व्यापारी अपने दुकान पर शुद्द देशी घी से बनी देवतोओं के भोग हेतु मिठाई या बाल भोग लिख कर गाय के घी के वजाय अर्थ लाभ हेतु चर्वी वाला घी में भगवान का भोग बेचता हैं वह अपने साथ अपने कई आगे और पीछे की पीढीयों को नरक मे ले जाता हैं . क्योंकी सनातन शास्त्रों के अनुसार भगवान के भोले-भाले भक्तों को धोखा भगवान को धोखा देने से भी बडा अर्धम हैं .
''नयाल सनातनी"
सनातनी विचार !
एक टिन चर्वी वाले सस्ते घी से हवन करने के वजाय शुद्द प्रमाणित गाय के एक चम्मच घी से किया गया हवन से ठाकुर जी दोडे-दोडे भोग पाने आते है . जबकी चर्वी वाले एक टिन घी से जो हवन करते है उससे दानव बलवान होकर सनातन धर्म की कमर तोडने दोडे-दोडे आते हैं .
"नयाल सनातनी"
सनातनी विचार !
पवित्र भारत देश के प्रधान मंत्री एंव राष्ट्रपति जी को नयाल सनातनी का एक पवित्र संदेश !
मोदी जी गंगा मंत्रालय आपने बनाया साधुवाद !
पर गौ-मंत्रालय पहले बनाना चाहिये था . गंगा से गाय नही निकली है गौमुख से गंगा निकली हैं . गंगा विलुप्त भी हो गयी तो देश खत्म नही होने वाला !
पर अगर कहीं भारतवर्ष से गौवंश खत्म हो गया तो सब कुछ खत्म हो जायेगा . मानव जाति का नामोनिशान मिट जायेगा .
यही सनातन सत्य है .
"नयाल सनातनी"
सनातनी विचार !
एक अति आवश्यक सूचना सभी गौप्रमियों हेतु --
गौशाला मे गायों के साथ कभी कुत्तों को नही रखना चाहियें, क्योकिं गौवंश अस्वस्थ हो जाते हैं, गायों का दूध कम हो जाता हैं,गायों मे रोग उत्पन्न हो जायेंगे . यह सब 'गीताप्रेस' के गो-अंक मे छपा हैं . बताइये जब सब रोगो की नाश करने वाली गौमाता कुत्तो के निकटता से बिमारी हो सकती है तो ! जो लोग गौवंश को त्यागकर कुत्तो के साथ सोते है उनका क्या हाल होता होगा ??
जन हित-गौवंश के हित मे जारी सर्वदलीय गौरक्षा मंच द्दवारा ..
"नयाल सनातनी"
सनातनी विचार !
कल तक अर्धम की राह पर चल रहा कोई व्यक्ति अगर आज धर्म की राह पर चलने की कोशिस कर रहा है, तो उसकी जरुर मदद करें . वह चाहे आपका कल तक लाख विरोधी क्यों ना हों !
यही सनातन धर्म हैं .यही सत्य धर्म हैं .
"नयाल सनातनी"
सनातनी विचार !
संसार का कोई भी मनुष्य एक हाथ से ताली नहीं बजा सकता। ताली तो दो हाथों से ही बजेगी ना !
यहाँ तक की ईश्वर ( देवताओं ) का भी कार्य एक दूसरे के बिना नहीं होता। इसलिए शिव कही राम चरणों के दास हनुमान जी तो कही परमेश्वर राम उनको रामेश्वर रूप में पूजते है।
!! मारुति बन हरि-सेवा कीन्ही। रामेश्वर बन सेवा लीन्ही॥
''नयाल सनातनी'' ;-- सर्वदलीय गौरक्षा मंच - राष्ट्रिय अध्यक्ष
सनातनी विचार !
जो मानव अपने को इज्जत नहीं देता, अपने को प्यार नहीं करता, उससे संसार को भी कोई आसा नहीं होती !
पहले परमात्मा द्वारा दिया गया ( अमूल्य ) खरबों रुपये का अपने तन - शरीर की इज्जत कीजिये, फिर समस्त मानव जाति एवं जीव जन्तुओ से आपको प्यार करना आ जायेगा !
''नयाल सनातनी''
कटु मगर सत्य--- सनातनी विचार !
पहले गेरुवा वस्त्र ( सन्यास आश्रम ) त्याग का प्रतिक होता होगा ! पर आज गेरुवा वस्त्र ( सन्यास आश्रम ) सबसे बड़े संग्रह का प्रतिक बन गया है।
बाबाओं ( साधुओं ) में होड़ मची है अधिक से अधिक कंकरीट के जंगलों की स्थापना करने की।
हे राम तेरी माया ! जिस माया को त्यागने गेरुवा पहना उसने ही सबसे बड़े माया जाल में फंसाया !
इसलिए धन्य है गृहथ आश्रम,धन्य है प्रतेक सद गृहस्थ इसमें चीटी से लेकर हाथी तक और अंत्यज से लेकर साधू- ब्राह्मण तक के कल्याण हेतु मेहनत करता है गृहस्थ। और 33 करोड़ देवों की जननी गौमाता, उसके वंश एवं देवी- देवताओं के लिए भी भोग की व्यवस्था करता है एक गृहस्थ।
''नयाल सनातनी'' सर्वदलीय गौरक्षा मंच .
सनातनी विचार !
शिव (कल्याण ) को पाना पहले भी आसन था, आज भी। अपने अहंकार को त्यागना पहले भी कठिन था आज भी।
जिन्होंने अपने अहंकार को त्याग दिया, उनका जीवन शिव-मय ( कल्याण-मय ) हुआ है पहले भी आज भी !
''नयाल सनातनी''
सनातनी अनुरोध !
आदरणीय प्रधान मंत्री मोदी जी संपूर्ण धरती का 3/4 भाग (71 प्रतिशत) भाग जल है।
भगवान ना करें ! अगर गंगा आदि नदियों में से किसी एक नदी विलुप्त हो गई तो 'महासागरीय जल' को पीने लायक वैज्ञानिक बना सकते है। और कई विकसित देश बना रहे है।
पर अगर गाय - गौवंश विलुप्त हो गया तो शायद ही विश्व में किसी वैज्ञानिक की ताकत हो ! भारतीय देश गौवंश का दूध ( अमृत ) उपलब्ध करा दें।
देर नहीं हुई है अभी भी जागिये - गौ-मुख से निकली - गंगा को भी विपत्ति काल में अपने मूत्र द्वार में स्थान देकर रक्षा करने वाली गाय के लिए ''गौ-मत्रालय'' जल्द बनाइये --. भारतीय गौवंश बचाइये----
''नयाल सनातनी'' - सर्वदलीय गौरक्षा मंच अध्यक्ष
नोट --आपको मतदान देश की गौभक्त जनता ने इसीलिए किया था की गौ-रक्षा हो !
जबाब चाहिए !
गौ-रक्षा हेतु निवेदन लेकर बाबा जी आपसे मिले !
मोदी जी आपके लिए गौरथ लेकर 3 महीने चले !!
बाबा जी आपको 2 सौ करोड़ खाद्य मंत्रालय से मिल गए !
मोदी जी आपतो प्रधान मंत्री बन कर भी गाय मंत्रालय नहीं दिए !!
पुरे 20 महीने बाद भी हम गौ प्रेमियों की तखलीफ़ कोन सुनेगा ?!
मोदी जी क्या गंगा मंत्रालय की तर्ज पर गौ मंत्रालय भी बनेगा ?!!

''नयाल सनातनी''.
सनातनी विचार !
भगवान के घर जाने की तैयारी कर चूका नादान !
गठरी बांध उस रास्ते पर रख चूका सामान ।
पर जो साधन से कुछ साथ जा सकता था .
वह पूरी जिंदगी में कभी कमाया भी !?!
सोच के सोचो साथ क्या ले जायेगा ????------
गौ की सेवा ने सदा मानव को गौलोक पहुचाया ---
''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
अहंकार भारत में नहीं टिक सकता क्योकि यहाँ की सनातनी शिक्षा वैदिक-पौराणिक है ..
उदाहरण --
एक डॉक्टर धर्म, कर्म को नहीं मानता था पर उसकी स्त्री बड़ी साधना शील और धर्म परायण थी। डॉक्टर रोज एक बार कहता मैं हजारों लोगों को बचा लेता हूँ, भगवान क्यों आकर नहीं बचा लेता।
उसकी स्त्री तब तो कुछ न बोली पर कुछ समय बाद जब डॉक्टर के बाल सफेद हुए,
स्त्री बोली आपके दाँत टूट गए नये दाँत, नई काली मूँछें कब तक निकलेंगी ?
डॉक्टर साहब कुछ उत्तर न दे सके-जो ज्ञान जीवन का अर्थ न समझा सके निरर्थक है। ''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
ज्ञान का अहंकार जल्द टूटता है ! क्योकि पूर्ण ज्ञानी यहाँ कोई है ही नहीं ----
एक मनुष्य को पढ़-लिख कर अपनी शिक्षा का बहुत घमंड हो गया। वह घर वालों पर रौब जमाया करता मैं बड़ा ज्ञानी हूँ। एक दिन नन्ही सी बालिका एक नन्हा सा कीड़ा लेकर आई बोली-पिताजी इसका क्या नाम है ? उन सज्जन को उस मकोड़े के नाम का ही नहीं पता था। उसे अपने शिक्षा के अहंकार पर बड़ी ग्लानि हुई।
''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
एक मंदीर में रख्खी मूर्ति को अहंकार हो गया ! कहने लगी देखो लोग कितनी दूर-दूर से आ आकर मुझे शीश झुकाते हैं !
अभी मूर्ति अहंकार में फूल ही रही थी कि आकाश बोला-बावरी मनुष्य तुझे शीश नहीं झुकाते इन्हें तो अपनी श्रद्धा को दूर जाकर प्रणाम करने की आदत है।
आकाश फिर बोला अरे मूर्ति ये मानवों के घर पर 33 करोड़ देवो की मूर्ति गाय है उसको समय पर ये चारा तक नहीं देते ये सब स्वार्थी है --
इनको जो कुछ स्वीकार ना करें सिर्फ देता रहे ( देवता ) उसे प्रणाम करने की आदत है !
.''नयाल सनातनी''
जन हित- गौ हित में जारी !
आज जरूर करें गौ-पूजा, गौ-सेवा, एवं गौ-ग्रास दान !
8 फरवरी आज (सोमवार) को देशभर में मौनी अमावस्या मनाई जा रही है । इस बार मौनी व सोमवती अमावस्या का विशेष संयोग बन रहा है। शास्त्रों के अनुसार मौनी व सोमवती अमावस्या के महासंयोग में आपको दान-पुण्य का कई गुना अधिक फल मिलेगा।
गौ दान- गौ हित में दान --- तुरत कल्याण ---
''नयाल सनातनी'' सर्वदलीय गौरक्षा मंच
सनातनी विचार !
एक बन्दर और भालू में दोस्ती थी एक दिन वे दोनों एक साथ कही जा रहे थे। रास्ते में एक कब्रिस्तान मिला। बन्दर एक कब्र के पास जाकर खड़ा हो गया और आँख मूँदकर कुछ स्तुति सी करने लगा। उसका ख्याल था इससे भालू प्रभावित होकर उसकी विद्वता का लोहा मानेगा। पर भालू ने समझा इसे कोई बीमारी हो गई है। सो उसने पूछा-क्यों भाई क्या पेट में दर्द हो गया है ?
बन्दर झुँझला कर बोला-नहीं यार यह मेरे पूर्वजों की समाधि है। मैं उनके ज्ञान, बल, पौरुष की महानता का गुणानुवाद गा रहा था ताकि में भी उनसा ज्ञानी बन सकू ।
बुद्दिमान जामवंत बोले -- महोदय बानर राज गुण गाने से ही नहीं आचरण में लाने से ही कोई महान बन सकता है । बुद्दिमानी आचरण में होनी चाहिए।
''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
शरीर की सभी इन्द्रियाँ आपस में झगड़ रही थी और अपनी-अपनी श्रेष्ठता सिद्ध कर रही थीं। तब आत्मा ( परमात्मा ) बोली तुम सब मेरे इसी शरीर के अंग हो लड़ने की अपेक्षा परस्पर एक दुसरे के हित की बात सोचो तो सबका मंगल होगा।
शरीर की यह कहानी सुन कर ''गुरु देव'' ने कहा-सभी देवता परमात्मा की ही शक्तियाँ हैं उनके छोटे-बड़े के झगड़े में न पड़कर जो उनके आदर्श अपने जीवन में धारण करते हुए उन्हीं की देवाराधन सार्थक होता है। ध्यान रहे गाय में ये सभी देवता एक साथ स्थित है।
''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
मालवी जी का सनातन जबाब !
सोमनाथ लुटा तब भी शंकर भगवान कुछ न कर सके ! फिर भी आप मूर्ति पूजा को महत्त्व देते हैं? एक अर्ध नास्तिक आदमी ने मदन मोहन मालवीय जी से प्रश्न किया ?
मालवीय जी बोले ‘क’ माने कबूतर और ‘ख’ माने खरगोश भी तो नहीं होता फिर भी छोटे बच्चों को यही क्यों पढ़ाया जाता है ? यह तो प्रारम्भिक शिक्षण की विधि है अल्प बुद्धि बच्चे इसी से शिक्षा की ओर आकर्षित होते हैं। मालवीय जी बोले-उपासना और ध्यान की उच्चस्तरीय साधना के लिये इसी प्रकार मूर्ति पूजा भी प्रारम्भिक अनिवार्य आवश्यकता है।
मूर्ति पूजा साधना की ओर आकर्षित करने की एक राह है, मंजिल तो 'ध्यान' में कठोर साधना से अपने इष्ट को प्राप्त करना है।
''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
मानव जीवन का परम लक्ष्य परमात्मा की प्राप्ति है ! अनासक्ति परमात्मा तक ले जाती है आसक्ति शमशान से नरक की ओर !
वासना के उपक्रम में पड़कर महाराज ययाति असमय ही वृद्ध हो गये। उनकी इन्द्रियाँ शिथिल पड़ गई, पर मन में वासना का भूत नहीं उतरा, अतएव वे अपने पुत्रों से यौवन की याचना करने लगे। पहले तीन पुत्रों ने तो इनकार कर दिया पर चौथे पुत्र ने कहा-पिताजी मनुष्य संसार में इन्द्रिय सुख व भोगों के लिए नहीं आत्मोत्थान के लिए आया है। आप मेरा यौवन लेकर अपनी जरा मुझे सहर्ष दे दें। मैं थोड़े से सुख लेकर क्या करूँगा मुझे जीवन लक्ष्य अभीष्ट है सो उसके लिये वृद्ध शरीर से भी काम चल जायेगा।
पुत्र की इस अनासक्ति ने केवल अन्य भाइयों की ही नहीं वरन् ययाति की भी आँखें खोल दीं।
''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
मनुष्य बन गया तो उसे विदा करते हुए विधाता ( ब्रह्मा जी ) ने कहा-तात जाओ और संसार के प्राणियों का हित करते हुए स्वर्ग और मुक्ति का मार्ग करो, पर ऐसा कुछ न करना जिससे तुम्हें मृत्यु के समय पछतावा हो। आदमी ने विनय कि भगवन् आप एक कृपा और करना मुझे मरने से पहले चेतावनी अवश्य दे देना। ताकि यदि मैं मार्ग भ्रष्ट हो रहा होऊँ तो सँभल जाऊँ !
तथास्तु कह कर विधि ( ब्रह्मा जी ) ने मनुष्य को धरती पर भेज दिया। पर यहाँ आकर मनुष्य इन्द्रिय भोगों में पड़ कर अपने लक्ष्य को भूल गया। जैसे-तैसे आयु समाप्त हुई कर्मों के अनुसार यमदूत उसे नरक ले जाने लगे तो उसने विधाता से शिकायत की आपने मुझे मृत्यु के पूर्व चेतावनी क्यों नहीं दी ??
विधाता हँसे और बोले --
(१) तेरे हाथ काँपे , (२) दाँत टूट गये, (३) आँखों से कम दिखने लगा, (४) बाल पक गये चार संकेत देने पर भी तू न सम्भला तो इसमें मेरा क्या दोष ?
अब पछताये होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत !
''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
धन शांति नहीं साधन दे सकता है !
एक शहर में दो पड़ोसी थे - एक ईमानदार और ईश्वर भक्त, दूसरा छल-कपट से धन कमाता और खूब सांसारिक सुख भोगता। पहला आदमी यह देखकर दिन भर ईर्ष्या से कुढ़ता रहता। एक दिन वह भगवान् से जाकर बोला-प्रभु आपसे जो कुछ माँगा धन, सम्पत्ति, स्त्री, पुत्र सब कुछ मिला फिर भी सुखी नहीं हो पाया सो क्यों ?
भगवान् हँसे और बोले इसलिए कि तू भी वही चाहता है जो कोई भी सांसारिक सुखों में आसक्त चाहता है। अब तू आत्म सुख, आत्म-शान्ति की कामना कर उसी से सुख मिलेगा। धन सम्पत्ति से नहीं।
''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
आपका आचरण ही आपकी पूजा करता है !
एक सुन्दर तालाब के किनारे खुबसुरत फूल से ईर्ष्या वस पत्थर गुस्से से बोला-फूल जानता नहीं तुझे अभी पीस कर रख दूँगा।
फूल मुस्कराया और बोला-तब तो आप बड़े उपकारी हैं, मुझे कुचल कर आप मेरी सुगन्ध और भी दूर-दूर तक फैलाने में ही सहायक होंगे। पत्थर अपनी अकड़ पर बड़ा लज्जित हुआ और अनुभव किया कि फूल का जीवन ही सच्चा और सार्थक है। हम उनका धन्यबाद करते है जिन्होंने हमें कुचलने के लिए साजिस रची थी।
''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
सनातन धर्म ही वह महा सागर है जिसमे सभी मत-धर्म-संप्रदाय समा जाते है !
बूँद सागर में घुलने लगी तो उसे अपना अस्तित्व समाप्त होने का बड़ा दुःख हुआ। सागर ने समझाया-बेटी तुम्हारी जैसी असंख्य बूँदों का ही तो मैं सम्मिलित रूप हूँ। यहाँ तो तुम लघुतम में विराटतम की अनुभूति करोगी। बूँद को यह सब अच्छा नहीं लगा बूँद फिर जमीन से नदी में होती हुई सागर में पहुँची तो बड़ी पछतायी और समझ गई कि अपने उद्गम में लीन होना ही सच्ची शान्ति सच्चा जीवन लक्ष्य है।
''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
संसार में रहकर भी आप विरक्त हो सकते है विदेह हो सकते है !
एक साधु कह रहे थे यह संसार मिथ्या है, स्त्री, पुत्री छोड़ कर आत्म कल्याण की बात सोचनी चाहिए। जंगल की ओर चलना चाहिए। एक बालक ने पूछा-महात्मन् मैं कौन हूँ-साधु बोले-आत्मा। अच्छा तो अब यह बताइये लड़के ने पूछा- मेरी माँ मेरी सेवा सहायता करती है, मेरे हित की बात सोचती है क्या वह आत्म-कल्याण न हुआ ?
प्रवचन करता साधु को कोई उत्तर देते न बना। उनको समझ आ गया संसार खराब नहीं अपना दृष्टिकोण खराब होता है। उसे ठीक कर लिया जाये तो समाज में रहकर ही मुक्ति का आनन्द लिया जा सकता है।
''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
जहाँ आपसी प्रेम है वही स्वर्ग है !
मनुष्यों के व्यवहार में क्रुद्ध होकर देवताओं ने दुर्भिक्ष को भेजा। दुर्भिक्ष धरती में आकर एक स्थान पर छुपकर देखने लगा यहाँ के लोग आखिर किस तरह खराब हैं। तभी वहाँ एक परिवार आकर रुका। खाने के लिये उन्होंने रोटियाँ निकाली। रोटी एक ही थी। पत्नी ने रोटी पति को देते हुए कहा-आप खा लीजिए मुझे तो भूख नहीं है। पति ने पुत्री को देते हुए कहा-बेटी तू खा ले मैंने तो पानी पीकर पेट भर लिया। तभी वहाँ एक अपंग दिखाई दिया लड़की ने रोटी उसे देते हुए कहा-भाई तुम बहुत भूखे दिखाई देते हो लो रोटी खा लो। दुर्भिक्ष यह देखकर चुपचाप लौटकर देवताओं के पास जाकर बोला आप लोगों ने मुझे भूल से स्वर्ग भेज दिया था। देवता कहने जा रहे थे कि वही मृत्युलोक है पर तभी विधाता बोल पड़े-सचमुच तात ! जहाँ लोग प्रेम पूर्वक रहें स्वर्ग वहीं रहता है।
''नयाल सनातनी''

Thursday, January 21, 2016

सनातनी विचार !
मनुष्य के मुख से निकले व्यंग बाण अधिक गहराई तक, (अधिक समय) तक चोट करते हैं, वरन उसके द्दारा चलाये गये तरकस के बाणों के !
द्रोपदि के व्यंग बाण ही थे जो दुर्योधन को अर्जुन के काल समान बाणों, महाबली भीम का दुशासन की छाती फाड कर लहु पी जाने वाला महाकाल रौद्र रुप भी भयभीत नही कर पाया !!!
"नयाल सनातनी"

Saturday, January 16, 2016

सनातनी विचार !
सार्थक और प्रभावी उपदेश वह है जो वाणी से नही अपने आचरण से प्रस्तुत किया जाता हैं ! व्यास पीठ पर बैठे आचरण हीन के उपदेश गरम पानी के भाप की तरह कब उड जाते है खुद वक्ता को मालुम नही पडता !
"जयपाल नयाल सनातनी"